पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करने गया पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, प्रमुख पिंडवेदियों पर व्यवस्था बनाए रखना, यातायात सुचारु रखना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। मेले के दौरान पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ भीड़ प्रबंधन और यातायात संचालन में भी जिम्मेदारी निभाई। समारोह में ऐसे ही कार्यों को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की गई। ’13 महीने की सैलरी को लागू किया था’ इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पुलिस वालों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमारे घर में पुलिस वाले थे। इस वजह से पुलिस के चैलेंज को हम बखूबी समझते हैं। जब हम मुख्यमंत्री बने थे तो पुलिस के जवान से लेकर डीएसपी तक का 13 महीने की सैलरी को लागू किया था, लेकिन यह लाभ फिलहाल इंपेक्टर तक ही मिल रहा है। इसका मुझे मलाल है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘बड़ाखाना सह सम्मान समारोह’ इसका नाम नहीं होना चाहिए था। इसका नाम ‘सम्मान सह बड़ाखाना’ होना चाहिए था। गयाजी न केवल शहर का नाम हो बल्कि पूरे जिले का नाम हो, इसके लिए हमारा प्रयास जारी है। ‘रेल मार्ग से 12 लाख लोग आए’ वहीं, बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने गयाजी में हो रहे विकास कार्य का बखान किया। साथ ही पुलिस और प्रशासन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रेल मार्ग से इस वर्ष पितृपक्ष में 12 लाख श्रद्धालु गयाजी आए। पुलिस-प्रशासन ने बेहतरीन काम किए हैं। पुलिस, प्रशासन और मीडिया की भूमिका पर चर्चा समारोह में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अन्य वक्ताओं ने पितृपक्ष मेले के सफल आयोजन में पुलिस, प्रशासन, सफाईकर्मियों और मीडिया की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाले श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर लौटे, इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। वक्ताओं के अनुसार, गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान देश-दुनिया तक पहुंचाने में मेले के दौरान की गई व्यवस्थाओं का अहम योगदान रहता है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य कर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। बेहतर कार्य के लिए सम्मानित वहीं, आईजी विकास वैभव से भास्कर रिपोर्टर ने जब यह पूछा कि मेले में दूसरे जनपद के पुलिस की ड्यूटी लगी थी। उन्होंने भी अपना बेस्ट दिया है, लेकिन इस सम्मान समारोह से उन्हें दूर क्यों रखा गया। इस पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। कहा कि यह सम्मान सांकेतिक है। सभी को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करने गया पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, प्रमुख पिंडवेदियों पर व्यवस्था बनाए रखना, यातायात सुचारु रखना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। मेले के दौरान पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ भीड़ प्रबंधन और यातायात संचालन में भी जिम्मेदारी निभाई। समारोह में ऐसे ही कार्यों को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की गई। ’13 महीने की सैलरी को लागू किया था’ इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पुलिस वालों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमारे घर में पुलिस वाले थे। इस वजह से पुलिस के चैलेंज को हम बखूबी समझते हैं। जब हम मुख्यमंत्री बने थे तो पुलिस के जवान से लेकर डीएसपी तक का 13 महीने की सैलरी को लागू किया था, लेकिन यह लाभ फिलहाल इंपेक्टर तक ही मिल रहा है। इसका मुझे मलाल है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘बड़ाखाना सह सम्मान समारोह’ इसका नाम नहीं होना चाहिए था। इसका नाम ‘सम्मान सह बड़ाखाना’ होना चाहिए था। गयाजी न केवल शहर का नाम हो बल्कि पूरे जिले का नाम हो, इसके लिए हमारा प्रयास जारी है। ‘रेल मार्ग से 12 लाख लोग आए’ वहीं, बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने गयाजी में हो रहे विकास कार्य का बखान किया। साथ ही पुलिस और प्रशासन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रेल मार्ग से इस वर्ष पितृपक्ष में 12 लाख श्रद्धालु गयाजी आए। पुलिस-प्रशासन ने बेहतरीन काम किए हैं। पुलिस, प्रशासन और मीडिया की भूमिका पर चर्चा समारोह में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अन्य वक्ताओं ने पितृपक्ष मेले के सफल आयोजन में पुलिस, प्रशासन, सफाईकर्मियों और मीडिया की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाले श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर लौटे, इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। वक्ताओं के अनुसार, गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान देश-दुनिया तक पहुंचाने में मेले के दौरान की गई व्यवस्थाओं का अहम योगदान रहता है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य कर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। बेहतर कार्य के लिए सम्मानित वहीं, आईजी विकास वैभव से भास्कर रिपोर्टर ने जब यह पूछा कि मेले में दूसरे जनपद के पुलिस की ड्यूटी लगी थी। उन्होंने भी अपना बेस्ट दिया है, लेकिन इस सम्मान समारोह से उन्हें दूर क्यों रखा गया। इस पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। कहा कि यह सम्मान सांकेतिक है। सभी को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया गया है।

