हरदोई में देहात कोतवाली क्षेत्र में सोमवार रात ढही कच्ची दीवार के हादसे में मलबे से सुरक्षित निकाली गई 18 माह की मासूम निशा ने आखिरकार 21 घंटे चले इलाज के बाद मंगलवार रात करीब 9:30 दम तोड़ दिया। हादसे के वक्त पिता महबूब की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुई मां नफीसा का इलाज अब भी जारी है। दो दिन की लगातार बारिश के कारण चूड़ी विक्रेता महबूब की झोपड़ी की कच्ची दीवार अचानक भरभराकर गिर गई थी। हादसे से ठीक पहले बाहर गए दो मासूम बच्चों की किस्मत से जान बच गई, जबकि 21 घंटे तक चले इलाज के बाद बुधवार सुबह मासूम निशा का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों ने आपसी सहमति से निशा के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। आधी रात को अचानक गिरी थी दीवार यह घटना सोमवार रात करीब 12:30 बजे हुई। महबूब चूड़ी की फेरी लगाकर अपने पांच सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करते थे। वह कच्ची दीवारों पर बनी झोपड़ी में रहते थे। पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण दीवारें कमजोर हो गई थीं, जिसके चलते झोपड़ी अचानक ढह गई। हादसे से कुछ मिनट पहले महबूब के दो अन्य बच्चे, 5 वर्षीय रजा हुसैन और 3 वर्षीय खैरुन्निसा, लघुशंका के लिए बाहर गए थे। मां नफीसा उन्हें बाहर छोड़कर रो रही छोटी बेटी निशा के पास अंदर पहुंचीं, तभी यह हादसा हो गया। मलबे की चपेट में महबूब, नफीसा (33) और मासूम निशा आ गए। तेज आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने तीनों को मलबे से बाहर निकाला। एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाने पर डॉक्टर ने महबूब को मौके पर ही मृत घोषित कर दिया। गंभीर हालत में निशा को पीआईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां करीब 21 घंटे तक चले इलाज के बाद मंगलवार रात 9:30 बजे उसने दम तोड़ दिया। शहर कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि शवों का पंचनामा कर विधिक कार्रवाई की गई है। परिवार के एकमात्र कमाने वाले महबूब और अब उनकी मासूम बेटी की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है।

