पालनहार योजना में 4 हजार से ज्यादा बच्चों का नवीनीकरण अटका, तो फिर नहीं मिल पाएगी राशि

पालनहार योजना में 4 हजार से ज्यादा बच्चों का नवीनीकरण अटका, तो फिर नहीं मिल पाएगी राशि

पालनहार योजना के नवीनीकरण में जायल आगे, मुंडवा पीछे, 4195 बच्चों की प्रक्रिया बाकी
छह ब्लॉक में 9742 बच्चे योजना से जुड़े, 56.9 प्रतिशत का नवीनीकरण पूरा, खींवसर में सर्वाधिक 950 बच्चे लंबित
नागौर.
पालनहार योजना के 4 हजार से ज्यादा बच्चों का नवीनीकरण अभी तक नहीं हो पाया है। समय पर नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो फिर मिलने वाली राशि पर भी संकट आ सकता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अनुसार नागौर छह ब्लॉक के कुल 9742 बच्चों में से 5547 का नवीनीकरण पूरा हो चुका है, जबकि 4195 बच्चों की प्रक्रिया लंबित है। इसमें जायल 59.7 प्रतिशत नवीनीकरण के साथ सबसे आगे है, जबकि मुंडवा में 52.9 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। दोनों ब्लॉक की प्रगति में 6.8 प्रतिशत अंक का अंतर है। वहीं, लंबित बच्चों की संख्या के लिहाज से खींवसर सबसे आगे है, जहां 950 बच्चों का नवीनीकरण बाकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इनके नवीनीकरण के लिए विभाग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

जायल में 59.7 प्रतिशत नवीनीकरण
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार जायल में 1200 पालनहारों के 2179 बच्चे योजना से जुड़े हैं। इनमें 1302 बच्चों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है, और 877 बच्चे लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों में जायल की प्रगति छह ब्लॉक में सर्वाधिक है। इसी क्रम में डेगाना में 889 पालनहारों के 1495 बच्चों में से 878 का नवीनीकरण हुआ है। यहां 617 बच्चों की प्रक्रिया बाकी है और प्रगति 58.7 प्रतिशत है। वहीं, मेड़ता में 994 पालनहारों के 1673 बच्चों में से 973 का नवीनीकरण पूरा हुआ है। यहां 700 बच्चे लंबित हैं और प्रगति 58.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। दोनों ब्लॉक में मिलाकर 1317 बच्चों का नवीनीकरण होना बाकी है। इनमें खींवसर ब्लॉक की स्थिति सर्वाधिक गंभीर है। बताते हैं कि खींवसर में 1108 पालनहारों के 2153 बच्चे योजना से जुड़े हैं। इनमें 1203 बच्चों का नवीनीकरण हुआ है, जबकि 950 बच्चे लंबित हैं। यहां नवीनीकरण की दर 55.8 प्रतिशत है। छह ब्लॉक में खींवसर में बच्चों की संख्या भी सबसे अधिक है। इसी तरह भेरूंदा में 312 पालनहारों के 568 बच्चों में से 304 का नवीनीकरण पूरा हुआ है। यहां 264 बच्चे लंबित हैं और प्रगति 53.5 प्रतिशत है। बच्चों की कुल संख्या अन्य ब्लॉक के मुकाबले कम है, लेकिन नवीनीकरण की दर अभी 55 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंची है। नवीनीकरण की लेटलतीफी की प्रक्रिया से मूण्डवा भी अछूता नहीं रहा है। यहां मुंडवा में भी केवल 948 पालनहारों के 1674 बच्चों में से 887 का नवीनीकरण पूरा हुआ है। यहां 787 बच्चे लंबित हैं। 52.9 प्रतिशत प्रगति के साथ मुंडवा छह ब्लॉक में सबसे पीछे है। जायल की तुलना में यहां नवीनीकरण की दर 6.8 प्रतिशत अंक कम है।

समय पर नवीनीकरण जरूरी
विभागीय अधिकारियों की माने तो पालनहार योजना के तहत नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी होने से पात्र बच्चों के योजना संबंधी रिकॉर्ड रिन्यूवल होता रहा है। इसके लिए बच्चों के परिजनों का सहयोग बेहद जरूरी है, लेकिन ज्यादातर मामलों में परिजनों की बेफिक्री से नवीनीकरण की प्रक्रिया की रफ्तार सुस्त हो जाती है। इस बार भी ऐसा हुआ है। इसको ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से खुद ही इनके नंबरों पर संपर्क कर बच्चों को संरक्षित रखने वाले जिम्मेदारों से बातचीत कर नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने का काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, ताकि बच्चों के पेटे आने वाली राशि बच्चों को को पूरी तरह से मिल सके।
क्या कहते हैं जिम्मेदार…संपर्क कर नवीनीकरण कराया जा रहा है।
पालनहार योजना में नवीनीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। लंबित मामलों को पूरा कराने के लिए संबंधित स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। पात्र बच्चों के नवीनीकरण में आने वाली समस्याओं का समाधान कर प्रक्रिया पूरी कराने पर ध्यान दिया जाएगा। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
जगदीश चांगल, उपनिदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग नागौर

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