मुजफ्फरपुर की रागिनी कुमारी नाम की महिला को साइबर ठगों ने करीब 72 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा। अपराधियों ने 3.14 लाख रुपए ठग लिए। 2 ठगों ने CBI से गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके अलावा, वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी आदेश भेजकर भी डराया। महिला को भरोसे में लेने के लिए साइबर फ्रॉड ने पुलिस और सेना की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया। महिला साहेबगंज के धर्मशाला रोड की रहने वाली है। रागिनी के परिवार में उनके पति और 14 साल का एक बेटा है। घटना के दौरान उनके पति 4-5 दिन के लिए बाहर काम से गए थे। पति के आने के बाद भी पत्नी डरी हुई थी, इसलिए जानकारी नहीं दी। जब पति ने बैंक से 3.14 लाख रुपए कम होने के बारे में पूछा तो पहली बार में पत्नी ने कहा कि किसी सहेली को दिया है, वो लौटा देगी। लेकिन 3 महीने बाद भी पैसे नहीं मिले तो पति ने सख्ती से पूछा तो पत्नी ने सारी कहानी बयां की। फिर 8 सितंबर को मामला दर्ज कराया गया। घटना से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… रागिनी के पति साहेबगंज में प्राइवेट कंपाउंडर हैं रागिनी के पति साहेबगंज में निजी कंपाउंडर हैं। परिवार मूल रूप से गोपालगंज के मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव का रहने वाला है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 13 जुलाई को मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पार्सल कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कहा कि आपके नाम से पार्सल आया है। इसमें आईफोन, सोना, ज्वेलरी और कैश में पाउंड है। विश्वास दिलाने के लिए शातिरों ने पार्सल और उसमें रखे सामान का वीडियो बनाकर वॉट्सऐप पर भी भेजा। पार्सल में आधार कार्ड का झांसा, फिर शुरू किया वीडियो कॉल रागिनी ने जब कहा कि उसने ऐसा कोई पार्सल नहीं मंगाया है तो कॉल काट दी गई। कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। इस बार बताया गया कि पार्सल में उसका आधार कार्ड जुड़ा हुआ है। पार्सल स्वीकार नहीं करने पर CBI की टीम घर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लेगी। इसके बाद वीडियो कॉल शुरू हुई। कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस और दूसरा सेना की वर्दी में दिखाई दिया। दोनों ने खुद को पाकिस्तानी बताया और महिला को डराने लगे। उसे किसी से बात नहीं करने की हिदायत दी गई। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पहले 10 हजार रुपए ट्रांसफर कराए गए। पैसे देने से मना किया तो बेटे को उठा लेने की धमकी ठग लगातार और रुपए की मांग करने लगे। रागिनी ने जब और पैसे देने से इनकार किया तो शातिरों ने उसे और डराना शुरू कर दिया। तीसरे दिन एक और वीडियो कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले नंबर की प्रोफाइल पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति की तस्वीर लगी थी। रागिनी ने सवाल किया कि पाकिस्तान के लोग भारत में अधिकारी बनकर कैसे काम कर सकते हैं। इस पर ठगों ने कहा कि उनके लोग भारत में अधिकारी के रूप में काम करते हैं। इसके बाद रकम देने का दबाव और बढ़ा दिया गया। पैसे नहीं देने पर धमकी दी गई कि उसके बेटे को कोचिंग जाते समय रास्ते से उठा लिया जाएगा। धमकी से डरी महिला ने बेटे को स्कूल-कोचिंग भेजना बंद कर दिया। इसके बाद डर के कारण उसने अलग-अलग किस्तों में यूपीआई के जरिए कुल 3.14 लाख रुपए ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा, ताकि परिजन से संपर्क न कर पाए ठगों ने महिला को वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश भी भेजा। इसमें गिरफ्तारी का डर दिखाया गया था। ठगी के दौरान उसे लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा गया, ताकि वह किसी परिजन से संपर्क न कर सके और पूरी तरह ठगों के नियंत्रण में रहे। चौथे दिन भी जब ठगों ने रुपए की मांग की तो महिला को शक हुआ। उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजन भी हैरान रह गए। साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करने के बाद मामले की शिकायत साइबर थाने में की गई। पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब कॉल करने वाले मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल और यूपीआई लेनदेन के आधार पर ठगों की पहचान और पैसे के लेनदेन की जांच की जा रही है। मुजफ्फरपुर की रागिनी कुमारी नाम की महिला को साइबर ठगों ने करीब 72 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा। अपराधियों ने 3.14 लाख रुपए ठग लिए। 2 ठगों ने CBI से गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके अलावा, वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी आदेश भेजकर भी डराया। महिला को भरोसे में लेने के लिए साइबर फ्रॉड ने पुलिस और सेना की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया। महिला साहेबगंज के धर्मशाला रोड की रहने वाली है। रागिनी के परिवार में उनके पति और 14 साल का एक बेटा है। घटना के दौरान उनके पति 4-5 दिन के लिए बाहर काम से गए थे। पति के आने के बाद भी पत्नी डरी हुई थी, इसलिए जानकारी नहीं दी। जब पति ने बैंक से 3.14 लाख रुपए कम होने के बारे में पूछा तो पहली बार में पत्नी ने कहा कि किसी सहेली को दिया है, वो लौटा देगी। लेकिन 3 महीने बाद भी पैसे नहीं मिले तो पति ने सख्ती से पूछा तो पत्नी ने सारी कहानी बयां की। फिर 8 सितंबर को मामला दर्ज कराया गया। घटना से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… रागिनी के पति साहेबगंज में प्राइवेट कंपाउंडर हैं रागिनी के पति साहेबगंज में निजी कंपाउंडर हैं। परिवार मूल रूप से गोपालगंज के मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव का रहने वाला है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 13 जुलाई को मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पार्सल कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कहा कि आपके नाम से पार्सल आया है। इसमें आईफोन, सोना, ज्वेलरी और कैश में पाउंड है। विश्वास दिलाने के लिए शातिरों ने पार्सल और उसमें रखे सामान का वीडियो बनाकर वॉट्सऐप पर भी भेजा। पार्सल में आधार कार्ड का झांसा, फिर शुरू किया वीडियो कॉल रागिनी ने जब कहा कि उसने ऐसा कोई पार्सल नहीं मंगाया है तो कॉल काट दी गई। कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। इस बार बताया गया कि पार्सल में उसका आधार कार्ड जुड़ा हुआ है। पार्सल स्वीकार नहीं करने पर CBI की टीम घर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लेगी। इसके बाद वीडियो कॉल शुरू हुई। कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस और दूसरा सेना की वर्दी में दिखाई दिया। दोनों ने खुद को पाकिस्तानी बताया और महिला को डराने लगे। उसे किसी से बात नहीं करने की हिदायत दी गई। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पहले 10 हजार रुपए ट्रांसफर कराए गए। पैसे देने से मना किया तो बेटे को उठा लेने की धमकी ठग लगातार और रुपए की मांग करने लगे। रागिनी ने जब और पैसे देने से इनकार किया तो शातिरों ने उसे और डराना शुरू कर दिया। तीसरे दिन एक और वीडियो कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले नंबर की प्रोफाइल पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति की तस्वीर लगी थी। रागिनी ने सवाल किया कि पाकिस्तान के लोग भारत में अधिकारी बनकर कैसे काम कर सकते हैं। इस पर ठगों ने कहा कि उनके लोग भारत में अधिकारी के रूप में काम करते हैं। इसके बाद रकम देने का दबाव और बढ़ा दिया गया। पैसे नहीं देने पर धमकी दी गई कि उसके बेटे को कोचिंग जाते समय रास्ते से उठा लिया जाएगा। धमकी से डरी महिला ने बेटे को स्कूल-कोचिंग भेजना बंद कर दिया। इसके बाद डर के कारण उसने अलग-अलग किस्तों में यूपीआई के जरिए कुल 3.14 लाख रुपए ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा, ताकि परिजन से संपर्क न कर पाए ठगों ने महिला को वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश भी भेजा। इसमें गिरफ्तारी का डर दिखाया गया था। ठगी के दौरान उसे लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा गया, ताकि वह किसी परिजन से संपर्क न कर सके और पूरी तरह ठगों के नियंत्रण में रहे। चौथे दिन भी जब ठगों ने रुपए की मांग की तो महिला को शक हुआ। उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजन भी हैरान रह गए। साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करने के बाद मामले की शिकायत साइबर थाने में की गई। पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब कॉल करने वाले मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल और यूपीआई लेनदेन के आधार पर ठगों की पहचान और पैसे के लेनदेन की जांच की जा रही है।

