परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र से 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद, बोले AK Mohanty

परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र से 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद, बोले AK Mohanty

(नमिता तिवारी)
रांची, 11 अक्टूबर परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने कहा कि भारत में निजी क्षेत्र से करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने और उसके 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में 30 गीगावाट का योगदान देने की उम्मीद है। मोहंती ने कहा कि देश में फिलहाल करीब नौ गीगावाट की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता है और 2047 तक इसे उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की योजना है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव का भी दायित्व संभाल रहे मोहंती ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम ‘न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (एनपीसीआईएल) फिलहाल 24 परमाणु संयंत्रों का संचालन करता है।

हमारा मानना है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी परमाणु ऊर्जा कारोबार में प्रवेश करना चाहिए और इसी वजह से नया कानून बनाया गया।’’
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अब से पांच साल बाद निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां संयंत्रों का संचालन कर रही होंगी। हमारा मानना है कि 2047 तक निजी क्षेत्र को 30 गीगावाट क्षमता का योगदान देना चाहिए। एक मेगावाट बिजली उत्पादन की लागत करीब 25 करोड़ रुपये है।’’
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के 36वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने रांची आए मोहंती ने कहा कि भारत परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में तेजी लाने की दिशा में काम कर रहा है और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र पर आधारित पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत है, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेश और प्रौद्योगिकी के विकास की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 में ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (शांति) अधिनियम लागू होना एक बड़ा नीतिगत बदलाव है और इस कानून के जरिए संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण बरकरार रखते हुए परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक एवं निजी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी का रास्ता खोला गया है। मोहंती ने कहा कि प्रौद्योगिकी, नियामकीय मंजूरियों और निर्माण संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को पूरा करने में आमतौर पर पांच से सात साल लगते हैं। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां रिएक्टर प्रौद्योगिकियों, ईंधन की आपूर्ति की व्यवस्था, जमीन की जरूरतों और संभावित साझेदारियों का आकलन कर रही हैं तथा इनमें एनपीसीआईएल और विदेशी प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने की संभावनाएं भी शामिल हैं।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सरकारी उपक्रम एनपीसीआईएल फिलहाल करीब नौ गीगावाट की कुल क्षमता वाले 24 परमाणु संयंत्रों का संचालन करता है। इसके अलावा करीब 13 गीगावाट की कुल क्षमता वाले 17 अन्य संयंत्रों पर विभिन्न चरणों में काम चल रहा है। मोहंती ने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश की जरूरत होती है और खर्च का एक बड़ा हिस्सा निर्माण के शुरुआती चरणों में ही करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में नयी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं से बनने वाली बिजली की लागत निवेशकों और बिजली खरीदने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू होगी। उन्होंने कहा, ‘‘बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के साथ-साथ भारत विशेष जरूरतों के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाश रहा है। खासकर उन उद्योगों के लिए, जहां बिजली की खपत बहुत अधिक होती है।

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