पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी:सुबह मिला ईमेल, मेन गेट बंद कर शुरू किया सर्च ऑपरेशन; लगातार धमकी मिलने से अधिवक्ता नाराज

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी:सुबह मिला ईमेल, मेन गेट बंद कर शुरू किया सर्च ऑपरेशन; लगातार धमकी मिलने से अधिवक्ता नाराज

पटना सिविल कोर्ट को एक अज्ञात मेल के जरिए बम से उड़ने की धमकी मिली है। एहतियातन सिविल कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कोर्ट परिसर को खाली कराया गया है और सर्च अभियान शुरू किया गया है। मेन गेट पर मौजूद पीरबहोर पुलिस के मुताबिक, ‘सुबह मेल के जरिए धमकी आई है। हालांकि, अभी तक जांच के दौरान वैसा कुछ भी नहीं मिला है।’ कोर्ट परिसर की सुरक्षा हर तरह से चाक चौबंध पुलिस के मुताबिक, पटना सिविल कोर्ट परिसर की सुरक्षा हर तरह से चाक चौबंध कर दी गई है। सुबह के वक्त पुलिस की मौजूदगी मेंमेन गेट बंद कर पूरे परिसर में सर्चिंग की जा रही है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को संदिग्ध वस्तुओं का तलाश के लिए सख्त हिदायत दी गई है। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल धमकी की सूचना के बाद अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल है। अधिवक्ता दिनकर दुबे ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘कोर्ट को बार-बार धमकी मिल रही है। इस दिशा में सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसी धमकियों से कोर्ट के कामकाज पर भी असर पड़ता है। पटना सिविल कोर्ट को एक अज्ञात मेल के जरिए बम से उड़ने की धमकी मिली है। एहतियातन सिविल कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कोर्ट परिसर को खाली कराया गया है और सर्च अभियान शुरू किया गया है। मेन गेट पर मौजूद पीरबहोर पुलिस के मुताबिक, ‘सुबह मेल के जरिए धमकी आई है। हालांकि, अभी तक जांच के दौरान वैसा कुछ भी नहीं मिला है।’ कोर्ट परिसर की सुरक्षा हर तरह से चाक चौबंध पुलिस के मुताबिक, पटना सिविल कोर्ट परिसर की सुरक्षा हर तरह से चाक चौबंध कर दी गई है। सुबह के वक्त पुलिस की मौजूदगी मेंमेन गेट बंद कर पूरे परिसर में सर्चिंग की जा रही है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को संदिग्ध वस्तुओं का तलाश के लिए सख्त हिदायत दी गई है। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल धमकी की सूचना के बाद अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल है। अधिवक्ता दिनकर दुबे ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘कोर्ट को बार-बार धमकी मिल रही है। इस दिशा में सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसी धमकियों से कोर्ट के कामकाज पर भी असर पड़ता है।  

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