नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर उठे सवाल:प्रयागराज में 12 पदों पर चयन, न्याय विभाग ने मांगी पूरी रिपोर्ट

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर उठे सवाल:प्रयागराज में 12 पदों पर चयन, न्याय विभाग ने मांगी पूरी रिपोर्ट

तीन साल पहले प्रयागराज में शुरू हुई डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से अभी पढ़ाई का एक भी बैच पास आउट नहीं हुआ है कि यहां असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस चयन प्रक्रिया पर किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी की ही कार्य परिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) के सदस्यों ने तीखी आपत्ति जताई थी।
इसके बावजूद कुलपति ने उनके विरोध को दरकिनार करते हुए उसी दिन परिणाम जारी कर दिए और चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग भी शुरू करवा दी। अगस्त के पहले सप्ताह तक सभी की जॉइनिंग कराई जा चुकी है।
चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद प्रदेश सरकार के न्याय विभाग ने 2 अगस्त को ही कुलपति से भर्ती से जुड़े सभी अभिलेख तलब कर लिए हैं।
फिलहाल विभाग उनके जवाब का परीक्षण कर रहा है और अब तक कोई नया निर्देश जारी नहीं हुआ है। इस बीच, भर्ती में धांधली और पक्षपात का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में गंभीर आरोप लगाया गया है कि कुलपति ने अपने तीन पसंदीदा शिष्यों का भी चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर किया है। 2023 में शुरू हुई थी यूनिवर्सिटी
प्रयागराज में युवाओं को कानून की उच्च शिक्षा देने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. उषा टंडन को 2023 में इसका पहला कुलपति नियुक्त किया गया। फिलहाल यूनिवर्सिटी का अपना स्थाई परिसर बनकर तैयार नहीं हुआ है, झलवा में इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए फाफामऊ स्थित बीबीएस कॉलेज के परिसर को किराए पर लेकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
यूनिवर्सिटी में बीए एलएलबी (BA LLB) पाठ्यक्रम में 60 सीटें स्वीकृत हैं, जिन पर प्रवेश प्रक्रिया वर्ष 2024 से शुरू हुई है। 2024 में ही पहले चरण में 6 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की गई थी। इसके बाद अब जुलाई में 12 और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की गई, जिसको लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जनवरी में शुरू हुई थी 12 पदों पर भर्ती प्रक्रिया
राज्य शासन ने 27 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी में यूजीसी (UGC) के दिशानिर्देशों के तहत 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी थी। अनुमति मिलने के बाद कुलपति ने 6 मार्च को विज्ञापन जारी किया, जिसके जवाब में कुल 680 आवेदन प्राप्त हुए। स्क्रूटनी के बाद 569 अभ्यर्थी योग्य पाए गए।
रिक्त पदों के मुकाबले 47 गुना ज्यादा अभ्यर्थी होने के बावजूद कोई लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की गई और सभी योग्य अभ्यर्थियों को सीधे इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया। 22 से 30 जुलाई के बीच हुए इंटरव्यू में 367 अभ्यर्थी शामिल हुए। इंटरव्यू संपन्न होते ही 31 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई। बैठक में जब चयन का मुद्दा रखा गया तो परिषद के दो सदस्यों—डॉ. विभा मिश्रा और न्याय विभाग के विशेष सचिव दिनेश सिंह—ने प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया। हालांकि, आपत्तियों के बावजूद 31 जुलाई को ही परिणाम घोषित कर दिए गए और चयनितों की जॉइनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इन अभ्यर्थियों का हुआ है चयन
अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के रवि प्रकाश राहुल, तान्या सागर, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के गौरव सिंह सचान, आकृति शर्मा, निकिता चौधरी, मुदित सोनी, ईडब्ल्यूएस (EWS) श्रेणी के विवेक त्रिवेदी, अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी के स्वाति कुमारी मवांडिया, कीर्ति डबास, गरिमा सिंह, यश सक्सेना और आस्था मिश्रा का चयन हुआ है। शिकायत है कि इसमें कीर्ति डबास, स्वाति कुमारी मवांडिया और यश सक्सेना कुलपति के शिष्य हैं। 31 जुलाई की कार्य परिषद बैठक में क्या-क्या हुआ?
31 जुलाई को आयोजित कार्य परिषद की बैठक में अध्यक्ष व कुलपति प्रो. उषा टंडन ने सदन को बताया कि 680 आवेदनों में से 569 अभ्यर्थी पात्र पाए गए थे। चूंकि कार्य परिषद द्वारा इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों का कोई अनुपात (शॉर्टलिस्टिंग दायरा) पहले से तय नहीं किया गया था, इसलिए सभी पात्र अभ्यर्थियों को चयन समिति के सामने प्रस्तुत होने का अवसर दिया गया। इनमें से 367 अभ्यर्थी इंटरव्यू में शामिल हुए।
बैठक में जब सदस्यों ने पूछा कि चयन प्रक्रिया में यूनिवर्सिटी के कुलसचिव (Registrar) को क्यों शामिल नहीं किया गया, तो कुलपति ने तर्क दिया कि यूजीसी के नियम चयन समिति में कुलसचिव को शामिल करने का प्रावधान नहीं करते। इसके बाद सदस्यों ने लिखित परीक्षा न कराने और अन्य निर्धारित मानकों की अनदेखी पर सवाल उठाए, जिन पर अध्यक्ष की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
चयन प्रक्रिया को लेकर दो सदस्यों की असहमति के बाद एजेंडे पर वोटिंग कराई गई। वोटिंग में चार के मुकाबले दो वोटों से प्रस्ताव पास कर दिया गया।
पक्ष में मतदान करने वाले: प्रो. अरुण मोहन शौरी, डॉ. सोनिका, डॉ. सुचित कुमार यादव और कुलपति प्रो. (डॉ.) उषा टंडन।
विरोध में मतदान करने वाले: प्रो. विभा त्रिपाठी और विशेष सचिव (न्याय) दिनेश सिंह।
प्रस्ताव बहुमत से पास होते ही कुलपति ने उसी दिन परिणाम जारी कर दिए। न्याय विभाग ने इन तीखे सवालों के मांगे हैं जवाब
31 जुलाई के घटनाक्रम के बाद न्याय विभाग के विशेष सचिव दिनेश सिंह ने 2 अगस्त को कुलपति को पत्र भेजकर भर्ती से जुड़े कई अहम अभिलेख और स्पष्टीकरण मांगे हैं:
क्या इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग यूजीसी विनियम, 2018 के नियम 4.1 का पालन करते हुए की गई थी? यदि नहीं, तो इस अवहेलना के क्या कारण थे?
यदि पालन हुआ था, तो क्या यूजीसी विनियम, 2018 के परिशिष्ट-II की तालिका 3A के अनुसार कोई व्यापक मेरिट चार्ट तैयार किया गया था? यदि नहीं, तो वजह बताई जाए।
क्या चयन समिति का गठन यूजीसी नियम 5.1 के अनुरूप किया गया था?
क्या दिव्यांजनों (PwD) के लिए निर्धारित आरक्षण नियमों पर विचार किया गया और मानकों के अनुसार इसे लागू किया गया?
क्या लागू नियमों के आधार पर अभ्यर्थियों को दिए गए अंकों का अंतिम समेकित (Consolidated) स्कोर चार्ट तैयार किया गया था? यदि हां, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाए। सभी उम्मीदवारों का श्रेणीवार (Category-wise) विवरण, जिसमें उनकी अनिवार्य योग्यताएं और अन्य विवरण दर्ज हों, उपलब्ध कराया जाए। पिछली बैठक में तय हुआ था कि सहायक रजिस्ट्रार के पद के लिए 20 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाया जाएगा, लेकिन बैठक के दौरान पता चला कि 23 या 24 अभ्यर्थियों को बुलाया गया। कार्य परिषद की अनुमति के बिना किए गए इस बदलाव का स्पष्ट कारण बताया जाए। यूनिवर्सिटी में आउटसोर्सिंग के भरोसे चल रहा 45 कर्मचारियों का स्टाफ
फाफामऊ स्थित किराए के परिसर में चल रही इस यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक और लिपिकीय (Clerical) काम पूरी तरह से ठेके के कर्मचारियों के भरोसे है। वर्तमान में यहाँ 45 कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर तैनात हैं, जबकि लिपिक वर्ग में काम करने के लिए यूनिवर्सिटी के पास एक भी स्थायी कर्मचारी मौजूद नहीं है। यूनिवर्सिटी के पीआरओ बोले- ‘शासन को भेज दिया गया है जवाब’
मामले पर यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) प्रकाश त्रिपाठी ने बताया, “असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन के संबंध में न्याय विभाग की ओर से जो भी जानकारियां मांगी गई थीं, उनका जवाब बनाकर भेज दिया गया है। वहां से अभी कोई नया पत्र नहीं मिला है। पूरी भर्ती प्रक्रिया यूजीसी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए कराई गई है और सभी चयनित अभ्यर्थियों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

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