‘नेवी में नौकरी के बाद बेटे ने मतलब रखना छोड़ा’:पिता बोले- उससे संपर्क नहीं, पैसे भी भेजने किए बंद; जासूसी में गिरफ्तारी हुई, पता नहीं था

‘नेवी में नौकरी के बाद बेटे ने मतलब रखना छोड़ा’:पिता बोले- उससे संपर्क नहीं, पैसे भी भेजने किए बंद; जासूसी में गिरफ्तारी हुई, पता नहीं था

‘बेटे अभिषेक (31) को पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। उसे नेवी में नौकरी लगी। पहले रुपए भी भेजा करता था, लेकिन करीब एक साल से पैसे भी भेजना बंद कर दिया। एक साल से उससे कोई मतलब नहीं है। आखिरी बार बात हुई थी, तब हमने उसे घर आने के लिए कहा तो उससे बहस हो गई थी। हम उससे कहते थे कि परिवार से मिलकर रहो, पर वह अपनी मन मर्जी से चलता है। अब उसपर पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप लगा है। मुझे उसकी गिरफ्तारी की भी जानकारी नहीं थी।’ मुजफ्फरपुर के प्रगति नगर मोहल्ले के रहने वाले सुरेंद्र सिंह ने भास्कर से बातचीत में ये बातें कहीं हैं। दरअसल, 4 अक्टूबर को असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। जिसमें पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में अभिषेक को गिरफ्तार किया था। अभिषेक पर आरोप है कि वो पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी (PIO – Pakistan Intelligence Operative) के संपर्क में है। आरोपी ये है कि सुरक्षा से जुड़ी अति-संवेदनशील और गोपनीय सैन्य जानकारियां सीमा पार भेजता था। अभिषेक के पिता कौन हैं, परिवार का क्या बैकग्राउंड है, अभिषेक के बारे में और क्या बताया, गिरफ्तारी की जानकारी कैसे हुई, पढ़ें रिपोर्ट… मुजफ्फरपुर में अभिषेक के घर की तस्वीरें… अभिषेक के बारे में पूछते ही दरवाजा किया बंद भास्कर रिपोर्टर मुजफ्फरपुर में अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह के घर अहियापुर थाना क्षेत्र के प्रगति नगर मोहल्ले में पहुंचे। बेल बजाने पर अभिषेक के छोटे भाई आदित्य (28) ने गेट खोला। रिपोर्टर ने उससे अभिषेक के बारे में पूछा तो वो घबरा गया। उसने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद चाचा टुनटुन आएं तो वे बातचीत के लिए तैयार हुए। इसके बाद अभिषेक के पिता से भी बात हुई, पर उनलोगों ने वीडियो बनाने से मना कर दिया। अभिषेक के पिता सेना में सूबेदार थे अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह भारतीय सेना में थे। करीब 10 साल पहले वे रिटायर हुए थे। सूबेदार के पद पर अलग-अलग जगहों पर उनकी पोस्टिंग हुई थी। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मुजफ्फपुर में अपना घर बना लिया। पूर्वी चंपारण के सेमराहा में पैतृक घर है। अभी सुरेंद्र अपने बड़े बेटे विवेक सिंह (34) और आदित्य के साथ रहते हैं। अभिषेक की मां की 10 साल पहले मौत हो गई थी। ‘केंद्रीय विद्यालय से अभिषेक की स्कूलिंग हुई’ सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि मेरी अलग-अलग पोस्टिंग रहती थी। इस कारण अभिषेक की पढ़ाई भी अलग-अलग शहरों के केंद्रीय विद्यालय में हुई। अभिषेक का स्नातक मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से हुआ था। प्रतियोगी परीक्षा की वो तैयारियां करता रहता था। इसी बीच उसे भारतीय नौ सेना में ढाई साल पहले नौकरी मिल गई। जहाज की क्वालिटी एश्योरेंस विभाग में एमटीएस के पद पर काम कर चुका है। ‘पुलिस टीम पूछताछ करने के लिए पहुंची थी’ सुरेंद्र कहते हैं कि पहले तो मुझे ये भी नहीं पता था कि अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया गया है। मैं 6 अक्टूबर को घर पर नहीं था। इसी दौरान स्पेशल ब्रांच पुलिस की टीम पहुंची। उनलोगों ने अभिषेक के बारे में पूछताछ की और चले गए। जब मैं घर पहुंचा तो आदित्य ने मुझे बताया कि पुलिस आई थी, वे लोग भइया के बारे में पूछताछ कर रहे थे। भइया पर जासूसी का आरोप लगा है। बड़ा भाई विवेक भी सेना में जवान था एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अभिषेक तीन भाइयों में दूसरे नंबर है। उसकी शादी नहीं हुई है। बड़ा भाई विवेक सिंह है, वो भी भारतीत सेना में जवान रह चुका है। उसकी शादी हो चुकी थी, पर पत्नी से उसका तलाक हो गया था। जिसके बाद विवेक ने सेना की नौकरी छोड़ दी। फिलहाल विवेक पिता सुरेंद्र सिंह के साथ अहियापुर में ही रहता है। अभिषेक वीडियो कॉल से महिला के संपर्क में आया था पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक कुछ दिन पहले एक अनजान वीडियो कॉल के जरिए एक महिला के संपर्क में आया था। इसके बाद उसे ब्लैकमेल किया गया, फिर वह खुफिया जासूसी से जुड़े हैंडलर्स के संपर्क में आया। आरोप है कि इसी के बाद से संवेदनशील जानकारी की जासूसी करनी शुरू की। अब पता लगाया जा रहा कि उसे वीडियो कॉल किसने किया था। उसे ब्लैकमेल किस तरह से किया गया था। अभिषेक के साथ उसका सहयोगी रितेश भी गिरफ्तार हुआ है असम पुलिस के अनुसार अभिषेक के साथ बेगूसराय के रहने वाले रितेश को भी गिरफ्तार किया गया है। रितेश पर आरोप है कि वो जासूसी में अभिषेक की मदद किया करता था। रितेश कुमार सिंह ने अपने गांव में ही रहकर स्नातक (बीए ऑनर्स) की पढ़ाई की थी। साल 2006 में वो भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। साल 2015 में उसकी शादी उलाव गांव की रहने वाली अर्चना के साथ संपन्न हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे अभिषेक और आदया हैं। 2023 में रितेश ने सेना से विआरएस ले लिया था। असम पुलिस के अनुसार ये दोनों भारतीय सेना के बुनियादी ढांचे यानी डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और सेना की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स को सप्लाई कर रहे थे। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात भारतीय सेना के बड़े काफिलों की आवाजाही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों और ढांचों की वास्तविक स्थिति और छावनियों की बारीक मैपिंग जैसी अति-संवेदनशील जानकारियां डिजिटल माध्यमों से सीमा पार भेजी जा रही थी। ‘आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के जाल में फंस चुके थे’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान के अनुसार शुरुआती जांच में इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि ब्लैकमेलिंग, डर या पैसों के लालच के दम पर उनसे देश की सुरक्षा से जुड़े अति-गोपनीय दस्तावेज और इनपुट हासिल किए जाते हैं। पुलिस अब इस वित्तीय और तकनीकी पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों को इस राष्ट्रविरोधी जासूसी के बदले कितनी रकम मिली और उसका भुगतान बैंक खातों, यूपीआई या हवाला के किस रास्ते से किया गया था। इस संवेदनशील स्पाइडर वेब को ध्वस्त करने में भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस की भूमिका सबसे अहम साबित हुई। ‘बेटे अभिषेक (31) को पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। उसे नेवी में नौकरी लगी। पहले रुपए भी भेजा करता था, लेकिन करीब एक साल से पैसे भी भेजना बंद कर दिया। एक साल से उससे कोई मतलब नहीं है। आखिरी बार बात हुई थी, तब हमने उसे घर आने के लिए कहा तो उससे बहस हो गई थी। हम उससे कहते थे कि परिवार से मिलकर रहो, पर वह अपनी मन मर्जी से चलता है। अब उसपर पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप लगा है। मुझे उसकी गिरफ्तारी की भी जानकारी नहीं थी।’ मुजफ्फरपुर के प्रगति नगर मोहल्ले के रहने वाले सुरेंद्र सिंह ने भास्कर से बातचीत में ये बातें कहीं हैं। दरअसल, 4 अक्टूबर को असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। जिसमें पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में अभिषेक को गिरफ्तार किया था। अभिषेक पर आरोप है कि वो पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी (PIO – Pakistan Intelligence Operative) के संपर्क में है। आरोपी ये है कि सुरक्षा से जुड़ी अति-संवेदनशील और गोपनीय सैन्य जानकारियां सीमा पार भेजता था। अभिषेक के पिता कौन हैं, परिवार का क्या बैकग्राउंड है, अभिषेक के बारे में और क्या बताया, गिरफ्तारी की जानकारी कैसे हुई, पढ़ें रिपोर्ट… मुजफ्फरपुर में अभिषेक के घर की तस्वीरें… अभिषेक के बारे में पूछते ही दरवाजा किया बंद भास्कर रिपोर्टर मुजफ्फरपुर में अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह के घर अहियापुर थाना क्षेत्र के प्रगति नगर मोहल्ले में पहुंचे। बेल बजाने पर अभिषेक के छोटे भाई आदित्य (28) ने गेट खोला। रिपोर्टर ने उससे अभिषेक के बारे में पूछा तो वो घबरा गया। उसने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद चाचा टुनटुन आएं तो वे बातचीत के लिए तैयार हुए। इसके बाद अभिषेक के पिता से भी बात हुई, पर उनलोगों ने वीडियो बनाने से मना कर दिया। अभिषेक के पिता सेना में सूबेदार थे अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह भारतीय सेना में थे। करीब 10 साल पहले वे रिटायर हुए थे। सूबेदार के पद पर अलग-अलग जगहों पर उनकी पोस्टिंग हुई थी। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मुजफ्फपुर में अपना घर बना लिया। पूर्वी चंपारण के सेमराहा में पैतृक घर है। अभी सुरेंद्र अपने बड़े बेटे विवेक सिंह (34) और आदित्य के साथ रहते हैं। अभिषेक की मां की 10 साल पहले मौत हो गई थी। ‘केंद्रीय विद्यालय से अभिषेक की स्कूलिंग हुई’ सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि मेरी अलग-अलग पोस्टिंग रहती थी। इस कारण अभिषेक की पढ़ाई भी अलग-अलग शहरों के केंद्रीय विद्यालय में हुई। अभिषेक का स्नातक मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से हुआ था। प्रतियोगी परीक्षा की वो तैयारियां करता रहता था। इसी बीच उसे भारतीय नौ सेना में ढाई साल पहले नौकरी मिल गई। जहाज की क्वालिटी एश्योरेंस विभाग में एमटीएस के पद पर काम कर चुका है। ‘पुलिस टीम पूछताछ करने के लिए पहुंची थी’ सुरेंद्र कहते हैं कि पहले तो मुझे ये भी नहीं पता था कि अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया गया है। मैं 6 अक्टूबर को घर पर नहीं था। इसी दौरान स्पेशल ब्रांच पुलिस की टीम पहुंची। उनलोगों ने अभिषेक के बारे में पूछताछ की और चले गए। जब मैं घर पहुंचा तो आदित्य ने मुझे बताया कि पुलिस आई थी, वे लोग भइया के बारे में पूछताछ कर रहे थे। भइया पर जासूसी का आरोप लगा है। बड़ा भाई विवेक भी सेना में जवान था एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अभिषेक तीन भाइयों में दूसरे नंबर है। उसकी शादी नहीं हुई है। बड़ा भाई विवेक सिंह है, वो भी भारतीत सेना में जवान रह चुका है। उसकी शादी हो चुकी थी, पर पत्नी से उसका तलाक हो गया था। जिसके बाद विवेक ने सेना की नौकरी छोड़ दी। फिलहाल विवेक पिता सुरेंद्र सिंह के साथ अहियापुर में ही रहता है। अभिषेक वीडियो कॉल से महिला के संपर्क में आया था पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक कुछ दिन पहले एक अनजान वीडियो कॉल के जरिए एक महिला के संपर्क में आया था। इसके बाद उसे ब्लैकमेल किया गया, फिर वह खुफिया जासूसी से जुड़े हैंडलर्स के संपर्क में आया। आरोप है कि इसी के बाद से संवेदनशील जानकारी की जासूसी करनी शुरू की। अब पता लगाया जा रहा कि उसे वीडियो कॉल किसने किया था। उसे ब्लैकमेल किस तरह से किया गया था। अभिषेक के साथ उसका सहयोगी रितेश भी गिरफ्तार हुआ है असम पुलिस के अनुसार अभिषेक के साथ बेगूसराय के रहने वाले रितेश को भी गिरफ्तार किया गया है। रितेश पर आरोप है कि वो जासूसी में अभिषेक की मदद किया करता था। रितेश कुमार सिंह ने अपने गांव में ही रहकर स्नातक (बीए ऑनर्स) की पढ़ाई की थी। साल 2006 में वो भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। साल 2015 में उसकी शादी उलाव गांव की रहने वाली अर्चना के साथ संपन्न हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे अभिषेक और आदया हैं। 2023 में रितेश ने सेना से विआरएस ले लिया था। असम पुलिस के अनुसार ये दोनों भारतीय सेना के बुनियादी ढांचे यानी डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और सेना की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स को सप्लाई कर रहे थे। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात भारतीय सेना के बड़े काफिलों की आवाजाही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों और ढांचों की वास्तविक स्थिति और छावनियों की बारीक मैपिंग जैसी अति-संवेदनशील जानकारियां डिजिटल माध्यमों से सीमा पार भेजी जा रही थी। ‘आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के जाल में फंस चुके थे’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान के अनुसार शुरुआती जांच में इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि ब्लैकमेलिंग, डर या पैसों के लालच के दम पर उनसे देश की सुरक्षा से जुड़े अति-गोपनीय दस्तावेज और इनपुट हासिल किए जाते हैं। पुलिस अब इस वित्तीय और तकनीकी पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों को इस राष्ट्रविरोधी जासूसी के बदले कितनी रकम मिली और उसका भुगतान बैंक खातों, यूपीआई या हवाला के किस रास्ते से किया गया था। इस संवेदनशील स्पाइडर वेब को ध्वस्त करने में भारतीय सेना की तेजपुर स्थित गजराज कॉर्प्स की मिलिट्री इंटेलिजेंस की भूमिका सबसे अहम साबित हुई।  

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