नेपाल में फिर आ सकता है ‘जलप्रलय’! वैज्ञानिकों ने दी दूसरी बड़ी बाढ़ की चेतावनी, जानें क्यों गहराया खतरा

नेपाल में फिर आ सकता है ‘जलप्रलय’! वैज्ञानिकों ने दी दूसरी बड़ी बाढ़ की चेतावनी, जानें क्यों गहराया खतरा

Bhotekoshi River: नेपाल की भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद अब एक और बड़े खतरे की चेतावनी जारी की गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में दूसरा ‘जलप्रलय’ आ सकता है। नेपाल-चीन सीमा के पास नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी पानी और मलबे का बड़ा जमावड़ा (वाटर ब्लॉकेज) बना हुआ है, जिसके अचानक टूटने पर निचले इलाकों में फिर से तबाही मच सकती है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। संस्था के अनुसार, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी टला नहीं है।

30 मिनट में 9 मीटर बढ़ा पानी, मची अफरा-तफरी

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ा, जिसका पानी बहकर त्रिशूली नदी सिस्टम में जा मिला। पानी का बहाव इतना तेज और भयानक था कि गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट में 9 मीटर तक ऊपर चढ़ गया। वहीं मलेखु में भी इतने ही समय में नदी 7 मीटर तक उफान पर आ गई। इतने कम समय में इतना ज्यादा पानी बढ़ना इशारा करता है कि पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा और पानी अचानक नीचे आया था।

आखिर क्यों मंडरा रहा है दोबारा बाढ़ का खतरा?

वैज्ञानिकों ने इस प्राकृतिक आपदा के पीछे दो मुख्य वजहें जताई हैं-

  • बर्फ और चट्टानों का गिरना: शुरुआती जांच के अनुसार, भोटेकोशी की सहायक नदी ‘लेंधे खोला’ में बर्फ और भारी चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा गिर गया। इससे बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित हुआ और मलबे के साथ तेजी से नीचे की ओर बहा।
  • अस्थाई बांध बनने की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि हिमस्खलन के मलबे ने नदी के संकरे रास्ते को रोककर एक अस्थाई बांध बना दिया। यदि यह रुका हुआ पानी अचानक रास्ता बनाता है, तो बाढ़ की दूसरी भयानक लहर आ सकती है।

अलर्ट पर निचले इलाके, सुरक्षित जगहों पर भेजे जा रहे लोग

ICIMOD में क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंटल रिस्क के हेड कियांगगोंग झांग और आपदा विशेषज्ञ शाश्वत सान्याल ने बताया कि लेन्डे खोला क्षेत्र में बीते 14 महीनों में यह दूसरी बार बाढ़ आई है। पिछले साल 2024 में भी इसी बेसिन में भीषण तबाही हुई थी। फिलहाल मौजूदा स्थिति को देखते हुए नेपाल के नुआकोट और धाडिंग जिलों समेत नदी के किनारे बसे निचले इलाकों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर संवेदनशील घाटियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

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