केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अब वे पहले जितना काम नहीं कर पा रहे हैं और अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दी जानी चाहिए। नागपुर के काटोल में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम में आदिवासी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यही वजह है कि गडकरी के इस बयान को भावी राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। कोरोना के बाद सेहत सुधारने पर दिया ध्यान गडकरी ने अपने पुराने दिनों का एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया, ‘जवानी के दिनों में मेरी जीवनशैली बहुत ही अनियंत्रित थी। पार्टी का काम करते समय शाम को समोसा खाकर सो जाता था। लेकिन कोविड के बाद मैंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया।’
युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ‘अब मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। आप सभी को भी रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करना चाहिए।’ सेहत ठीक नहीं तो सत्ता और संपत्ति सब बेकार जीवन की अनिश्चितता और स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा, ‘शरीर स्वस्थ है तभी हर चीज का महत्व है। अगर सेहत खराब हो जाए तो सत्ता, संपत्ति, सुंदरता और ज्ञान किस काम का? मान लीजिए आप यहां बैठे हैं और अगले ही मिनट हार्ट अटैक आ जाए, तो साथ क्या जाएगा? न गाड़ी जाएगी, न बंगला, न पत्नी और न ही बच्चे। इंसान खाली हाथ आया था और खाली हाथ ही जाएगा।’ 4 लोग एक स्कूटर पर बैठकर जाते थे, नंबर प्लेट पर हाथ रखते थे राजनीतिक सफर की शुरुआती यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरा जीवन पहले बहुत अनियमित था। हम भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे। उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हो सके, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।’
आगे उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मेरे पास एक लूना थी, जो ‘कू-कू’ की आवाज करती थी। उस पर दो लोग बैठकर जाते थे। बाद में विजय स्कूटर आया, जिस पर हम चार-चार लोग बैठ जाते थे। पुलिस से बचने के लिए हम पीछे बैठे-बैठे नंबर प्लेट पर हाथ रख लेते थे।’ आदिवासी इलाकों में कोई गांव अंधेरे में न रहे कार्यक्रम में गडकरी ने ‘एकलव्य एकल विद्यालय’ संस्था के सामाजिक कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा का दीप जलाना जरूरी है। गडकरी के मुताबिक, ‘एक दिन यह अभियान इतना बड़ा बनेगा कि राज्य का कोई भी आदिवासी गांव अंधेरे में नहीं रहेगा। हर घर में शिक्षा का उजाला पहुंचेगा।’ उन्होंने युवाओं से अपने व्यक्तित्व और गुणों को निखारने का आह्वान करते हुए कहा कि खुद को सक्षम बनाने के बाद समाज के गरीब और वंचित वर्ग के जीवन को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में हलचल गडकरी के इस बयान को हाल ही में चल रही उन चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनमें देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में गडकरी का ‘नई पीढ़ी को जिम्मेदारी’ वाला बयान काफी अहम माना जा रहा है। ये खबर भी पढ़ें… खड़गे बोले-सरकार की चोर दरवाजे से आरक्षण हटाने की साजिश: सरकारी पद खाली रखने से अवसर खत्म, भाजपाई नीति का पर्दाफाश हो चुका कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्गों का आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है। खड़गे ने कहा कि सरकारी पद जानबूझकर खाली रखे जा रहे हैं और कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…

