फ्लाईओवर निर्माण में बड़ी लापरवाही हुई है। ठीक से रोलर भी नहीं चलाया गया। गिट्टी भी ठीक से नहीं बैठी। अधिकारियों और ठेकेदारों ने सिर्फ अपनी जेबें भरी हैं। जब से सड़क बनी है, एक दिन भी ऐसा नहीं रहा, जब दोनों लेन चालू रही हों। कभी बाएं तो कभी दाएं लेन को बंद रखा जाता है। मरम्मत का काम चलता रहता है। पुल से गिट्टी सिर पर गिरने का डर रहता है।’ ये बातें नालंदा के पावापुरी बाजार निवासी कुमार रजनीश ने कहीं। सिर्फ रजनीश ही नहीं, कई अन्य स्थानीय लोगों ने भी फ्लाईओवर को लेकर नाराजगी जताई है। दरअसल, NH-20 बख्तियारपुर-रजौली फोरलेन, जो करीब 104Km का है। उद्घाटन के डेढ़ साल बाद ही फोरलेन के पावापुरी बाजार फ्लाईओवर पर दो जगह क्रैक आ गया है। जिसकी दूरी 50m है। पैनल 25mm तक धंस गया है। कई बार बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। इसके बाद करीब 30 फीट लंबे और 15 फीट चौड़े हिस्से की सतह को काटकर दोबारा ढलाई का काम किया जा रहा है। फोरलेन का रूट, कितना काम हुआ और कितना बाकी है, फ्लाईओवर में क्रैक के बाद लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इस मामले में अधिकारियों ने क्या कहा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट… पहले कुछ तस्वीरें… अब पढ़ें लोगों की परेशानी और कैसी है नारजगी…. ‘पुल का ट्रैफिक नीचे सर्विस लेन पर डायवर्ट कर दिया गया है’ स्थानीय निवासी संजय कुमार ने कहा कि रात के समय पुल पर काफी अंधेरा रहता है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी फ्लाईओवर पर लगी स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं हैं। अगर कभी 2 दिन के लिए लाइट जल भी जाए, तो अगले ही दिन खराब हो जाती है। ऊपर का मुख्य मार्ग बंद होने के कारण ट्रैफिक नीचे संकरी सर्विस लेन में डायवर्ट कर दी गई है। सर्विस रोड के दोनों किनारों पर स्थानीय बाजार हैं, जहां फल, सब्जी और रोजमर्रा के सामान की दुकानें सजती हैं। इसी रास्ते से होकर छोटे-छोटे बच्चे स्कूल और कोचिंग जाते हैं। हमेशा हादसे की आशंका रहती है स्थानीय युवक सौरभ का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि घर से बाहर निकलना किसी युद्ध के मैदान में जाने जैसा हो गया है। लोग हर पल किसी बड़े सड़क हादसे के खौफ में जी रहे हैं। निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने क्या दिया जवाब… सुपरस्ट्रक्चर में कोई खराबी नहीं, नमी की वजह से पैनल धंसे निर्माण कंपनी गावर कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील रावत ने कहा कि मुख्य ब्रिज के सुपरस्ट्रक्चर में कोई खराबी नहीं है। उसके आगे-पीछे का रोड पैनल 20 से 25 मिलीमीटर तक नीचे सेटल हो गया यानी धंस गया था। हाईवे पर क्षमता से अधिक ओवरलोडेड वाहन चल रहे हैं। भारी ट्रकों के कारण सड़क के जोड़ों में नमी चली जाती है, जिससे पैनल धंस जाते हैं। पैनल के 25 एमएम तक धंस जाने के कारण कई बाइक सवार फिसलकर गिर रहे थे, जिसके चलते आनन-फानन में सड़क को तुड़वाकर दोबारा बनवाना पड़ रहा है। कंक्रीट की ढलाई के बाद 7 से 8 दिनों का क्यूरिंग पीरियड (जमने) में लगेगा, जिसके बाद ही ट्रैफिक बहाल हो सकेगा। अब जानें फोरलेन पर कब-कब हुए हादसे… नालंदा के वेना में फ्लाइओवर पर दरारें आईं थी एनएच-20 के बख्तियारपुर-रजौली खंड में इससे पहले जुलाई महीने में नालंदा जिले के वेना स्थित फ्लाईओवर पर इतनी भयानक दरारें आ गईं थी कि निर्माण कंपनी ने आनन-फानन में उसकी ‘ओपन सर्जरी’ शुरू कर दी थी। कंपनी के कर्मियों ने दरारों में सीमेंट और कोलतार ठूंसकर बाहर से लोहे की छड़ें घुसा दी थी। जनता ने इसे रोड इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा मजाक करार दिया था, जिसके बाद दबाव में आकर नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी को उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्देश देना पड़ा था। धोबा पुल संख्या 150 के मुहाने पर सड़क धंस गई थी इसके अलावा मई महीने में बख्तियारपुर की तरफ जाने वाले धोबा पुल संख्या 150 के मुहाने पर सड़क अचानक धंस गई थी, जिससे कई किलोमीटर लंबा भीषण जाम लगा था और प्रशासन को एक लेन बंद करके हफ्तों तक मरम्मत का काम चलाना पड़ा था। निर्माण कार्य के वक्त गर्डर गिरा था, मजदूरों की मौत हुई थी फोरलेन शुरुआत से ही विवादों और हादसों से घिरा रहा है। जब इस सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था, तब नवंबर 2022 में भागनबिगहा के पास एलिवेटेड रोड के निर्माण के दौरान हादसा हुआ था। क्रेन के जरिए एक विशाल कंक्रीट गर्डर को ऊपर चढ़ाया जा रहा था, तभी सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते गर्डर टूटकर नीचे गिर पड़ा। दबकर काम कर रहे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य मजदूर अपंग हो गए थे। उस वक्त भी स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल उठाए थे, लेकिन जांच रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह गई और परियोजना को आनन-फानन में खींचतान कर पूरा कर दिया गया। फ्लाईओवर निर्माण में बड़ी लापरवाही हुई है। ठीक से रोलर भी नहीं चलाया गया। गिट्टी भी ठीक से नहीं बैठी। अधिकारियों और ठेकेदारों ने सिर्फ अपनी जेबें भरी हैं। जब से सड़क बनी है, एक दिन भी ऐसा नहीं रहा, जब दोनों लेन चालू रही हों। कभी बाएं तो कभी दाएं लेन को बंद रखा जाता है। मरम्मत का काम चलता रहता है। पुल से गिट्टी सिर पर गिरने का डर रहता है।’ ये बातें नालंदा के पावापुरी बाजार निवासी कुमार रजनीश ने कहीं। सिर्फ रजनीश ही नहीं, कई अन्य स्थानीय लोगों ने भी फ्लाईओवर को लेकर नाराजगी जताई है। दरअसल, NH-20 बख्तियारपुर-रजौली फोरलेन, जो करीब 104Km का है। उद्घाटन के डेढ़ साल बाद ही फोरलेन के पावापुरी बाजार फ्लाईओवर पर दो जगह क्रैक आ गया है। जिसकी दूरी 50m है। पैनल 25mm तक धंस गया है। कई बार बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। इसके बाद करीब 30 फीट लंबे और 15 फीट चौड़े हिस्से की सतह को काटकर दोबारा ढलाई का काम किया जा रहा है। फोरलेन का रूट, कितना काम हुआ और कितना बाकी है, फ्लाईओवर में क्रैक के बाद लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इस मामले में अधिकारियों ने क्या कहा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट… पहले कुछ तस्वीरें… अब पढ़ें लोगों की परेशानी और कैसी है नारजगी…. ‘पुल का ट्रैफिक नीचे सर्विस लेन पर डायवर्ट कर दिया गया है’ स्थानीय निवासी संजय कुमार ने कहा कि रात के समय पुल पर काफी अंधेरा रहता है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी फ्लाईओवर पर लगी स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं हैं। अगर कभी 2 दिन के लिए लाइट जल भी जाए, तो अगले ही दिन खराब हो जाती है। ऊपर का मुख्य मार्ग बंद होने के कारण ट्रैफिक नीचे संकरी सर्विस लेन में डायवर्ट कर दी गई है। सर्विस रोड के दोनों किनारों पर स्थानीय बाजार हैं, जहां फल, सब्जी और रोजमर्रा के सामान की दुकानें सजती हैं। इसी रास्ते से होकर छोटे-छोटे बच्चे स्कूल और कोचिंग जाते हैं। हमेशा हादसे की आशंका रहती है स्थानीय युवक सौरभ का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि घर से बाहर निकलना किसी युद्ध के मैदान में जाने जैसा हो गया है। लोग हर पल किसी बड़े सड़क हादसे के खौफ में जी रहे हैं। निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने क्या दिया जवाब… सुपरस्ट्रक्चर में कोई खराबी नहीं, नमी की वजह से पैनल धंसे निर्माण कंपनी गावर कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील रावत ने कहा कि मुख्य ब्रिज के सुपरस्ट्रक्चर में कोई खराबी नहीं है। उसके आगे-पीछे का रोड पैनल 20 से 25 मिलीमीटर तक नीचे सेटल हो गया यानी धंस गया था। हाईवे पर क्षमता से अधिक ओवरलोडेड वाहन चल रहे हैं। भारी ट्रकों के कारण सड़क के जोड़ों में नमी चली जाती है, जिससे पैनल धंस जाते हैं। पैनल के 25 एमएम तक धंस जाने के कारण कई बाइक सवार फिसलकर गिर रहे थे, जिसके चलते आनन-फानन में सड़क को तुड़वाकर दोबारा बनवाना पड़ रहा है। कंक्रीट की ढलाई के बाद 7 से 8 दिनों का क्यूरिंग पीरियड (जमने) में लगेगा, जिसके बाद ही ट्रैफिक बहाल हो सकेगा। अब जानें फोरलेन पर कब-कब हुए हादसे… नालंदा के वेना में फ्लाइओवर पर दरारें आईं थी एनएच-20 के बख्तियारपुर-रजौली खंड में इससे पहले जुलाई महीने में नालंदा जिले के वेना स्थित फ्लाईओवर पर इतनी भयानक दरारें आ गईं थी कि निर्माण कंपनी ने आनन-फानन में उसकी ‘ओपन सर्जरी’ शुरू कर दी थी। कंपनी के कर्मियों ने दरारों में सीमेंट और कोलतार ठूंसकर बाहर से लोहे की छड़ें घुसा दी थी। जनता ने इसे रोड इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा मजाक करार दिया था, जिसके बाद दबाव में आकर नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी को उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्देश देना पड़ा था। धोबा पुल संख्या 150 के मुहाने पर सड़क धंस गई थी इसके अलावा मई महीने में बख्तियारपुर की तरफ जाने वाले धोबा पुल संख्या 150 के मुहाने पर सड़क अचानक धंस गई थी, जिससे कई किलोमीटर लंबा भीषण जाम लगा था और प्रशासन को एक लेन बंद करके हफ्तों तक मरम्मत का काम चलाना पड़ा था। निर्माण कार्य के वक्त गर्डर गिरा था, मजदूरों की मौत हुई थी फोरलेन शुरुआत से ही विवादों और हादसों से घिरा रहा है। जब इस सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था, तब नवंबर 2022 में भागनबिगहा के पास एलिवेटेड रोड के निर्माण के दौरान हादसा हुआ था। क्रेन के जरिए एक विशाल कंक्रीट गर्डर को ऊपर चढ़ाया जा रहा था, तभी सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते गर्डर टूटकर नीचे गिर पड़ा। दबकर काम कर रहे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य मजदूर अपंग हो गए थे। उस वक्त भी स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल उठाए थे, लेकिन जांच रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह गई और परियोजना को आनन-फानन में खींचतान कर पूरा कर दिया गया।

