नाबालिग से रेप के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, पीड़िता को प्रतिकर योजना के तहत चार लाख रुपए की राशि दिए जाने का भी आदेश दिया गया है। विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि यह फैसला विशिष्ट पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश बृजेश शर्मा ने सुनाया है। यह मामला हिण्डौन थाना क्षेत्र से संबंधित है। परिवादी ने 31 मई 2025 को कोतवाली हिण्डौन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी नाबालिग बेटी 30 मई को सुबह स्कूल गई थी, लेकिन निर्धारित समय तक घर नहीं लौटी। स्कूल प्रबंधन और वाहन ड्राइवर से जानकारी लेने पर पता चला कि बच्ची अन्य विद्यार्थियों के साथ स्कूल से निकली थी और रोजाना जिस स्थान पर उतरती थी, वहीं उतरी थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को विभिन्न माध्यमों से बुलाकर भरतपुर बस स्टैंड से धौलपुर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद उसने परिजनों को नुकसान पहुंचाने और पीड़िता के फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के समक्ष 29 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 29 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट बृजेश कुमार शर्मा ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई। विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र कुमार शर्मा ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की।


