नवादा में 102 एंबुलेंस सेवा ठप, कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर:जेन प्लस कंपनी पर परेशान करने, मनमाने तबादले और पैसे मांगने का आरोप

नवादा में 102 एंबुलेंस सेवा ठप, कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर:जेन प्लस कंपनी पर परेशान करने, मनमाने तबादले और पैसे मांगने का आरोप

नवादा जिले में 102 एंबुलेंस सेवा से जुड़े ड्राइवर और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वे अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बिहार राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ के बैनर तले यह हड़ताल शुरू हुई है। इस हड़ताल से जिले के 14 प्रखंडों में चलने वाली इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा पर असर पड़ा है। कर्मचारियों ने एंबुलेंस को तय जगहों पर खड़ा कर दिया है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कत हो रही है। नौकरी से निकालने की धमकी भी दी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने जेन प्लस कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी उन्हें परेशान करती है, मनमाने तरीके से तबादले करती है और पैसे भी मांगती है। कर्मचारियों ने बताया कि छोटी गलतियों पर या अधिकारियों से काम से जुड़े सवाल पूछने पर उन्हें दूसरे जिले में भेज दिया जाता है। आरोप है कि वापस अपने जिले में आने के लिए 30 से 40 हजार रुपये मांगे जाते हैं। पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी भी दी जाती है। हर महीने करीब 12 से 13 हजार रुपये वेतन संघ ने जिलाधिकारी को एक आवेदन भी दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि नई भर्तियों के दौरान भी पैसे लिए जाते हैं। आवेदन के मुताबिक, ड्राइवर पद पर भर्ती के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये और ईएमटी पद के लिए करीब दो लाख रुपये तक लिए जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें हर महीने करीब 12 से 13 हजार रुपये वेतन मिलता है। कई बार उन्हें 200 से 300 किलोमीटर तक ड्यूटी करनी पड़ती है। संघ ने इस पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। इस हड़ताल के कारण गंभीर मरीजों और गांवों से अस्पताल आने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। नवादा जिले में 102 एंबुलेंस सेवा से जुड़े ड्राइवर और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वे अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बिहार राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ के बैनर तले यह हड़ताल शुरू हुई है। इस हड़ताल से जिले के 14 प्रखंडों में चलने वाली इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा पर असर पड़ा है। कर्मचारियों ने एंबुलेंस को तय जगहों पर खड़ा कर दिया है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कत हो रही है। नौकरी से निकालने की धमकी भी दी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने जेन प्लस कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी उन्हें परेशान करती है, मनमाने तरीके से तबादले करती है और पैसे भी मांगती है। कर्मचारियों ने बताया कि छोटी गलतियों पर या अधिकारियों से काम से जुड़े सवाल पूछने पर उन्हें दूसरे जिले में भेज दिया जाता है। आरोप है कि वापस अपने जिले में आने के लिए 30 से 40 हजार रुपये मांगे जाते हैं। पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी भी दी जाती है। हर महीने करीब 12 से 13 हजार रुपये वेतन संघ ने जिलाधिकारी को एक आवेदन भी दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि नई भर्तियों के दौरान भी पैसे लिए जाते हैं। आवेदन के मुताबिक, ड्राइवर पद पर भर्ती के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये और ईएमटी पद के लिए करीब दो लाख रुपये तक लिए जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें हर महीने करीब 12 से 13 हजार रुपये वेतन मिलता है। कई बार उन्हें 200 से 300 किलोमीटर तक ड्यूटी करनी पड़ती है। संघ ने इस पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। इस हड़ताल के कारण गंभीर मरीजों और गांवों से अस्पताल आने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।  

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