इस्पात नगर के जिस प्लॉट में नकली सीमेंट का गोरखधंधा संचालित हो रहा था, आखिर वो प्लॉट किसका है ? यह पता लगाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जांच में सामने आया कि 625 वर्ग मीटर का प्लॉट वर्ष 2014 में कानपुर विकास प्राधिकरण से आवंटित हुआ था। वर्ष 2019 से यहां नकली सीमेंट का वेयर हाउस बना था। अडानी ग्रुप के रीजनल मैनेजर ने भी गोदाम में सीमेंट के कारोबार से संबंधित जानकारी की पुष्टि की है, लेकिन यह प्लॉट किसका है। इसकी जानकारी अब तक पुलिस नहीं जुटा सकी है, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्लॉट के मालिक का नाम पता करने के लिए केडीए को पत्र भेजा गया है। वहीं दूसरी ओर घटना के 13 दिन बीतने के बाद भी डैमेज सीमेंट की नमूने जांच के लिए अब तक नहीं भेज सकी है। गोरखधंधा चलाने वाले सगे भाई नीरज और धीरज अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस के मुताबिक एक आरोपी की नेपाल तो दूसरे की प्रयागराज में होने की जानकारी मिली है। अडानी ग्रुप के सेल्स मैनेजर ने कराया था मुकदमा अडानी ग्रुप कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की स्पेशल टीम ने 14 अक्टूबर को इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापा मारा था। जिसके बाद ब्रांडेड कंपनियों के नाम की बोरियों में एक्सपायरी सीमेंट भरकर सप्लाई किए जाने का भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस ने मौके से मुंशी राहुल को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद लालबंगला निवासी वेयर हाउस संचालक धीरज गुप्ता, नीरज गुप्ता व मेरठ निवासी निशांत मित्तल और उसके पिता सुनील मित्तल के खिलाफ पनकी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने निशांत को मेरठ से अरेस्ट किया था, हालांकि उसे एक लाख के बांड पर बेल मिल गई थी। इस पूरे मामले में धीरज, नीरज व सुनील फरार चल रहे हैं। मामले की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मेरठ का निशांत डैमेज सीमेंट को यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों से नीलामी में स्क्रैप के दामों में खरीदता और नीरज और धीरज को सप्लाई करता था। निशांत ने बताया था कि वह प्रतिमाह करीब 30 हजार डैमेज सीमेंट कानपुर भेजता था, जिससे करीब 2 करोड़ की डैमेज सीमेंट प्रतिमाह यूपी समेत अन्य राज्यों में सप्लाई की जा रही थी। 17 से अधिक फर्मों में सप्लाई हुई डैमेज सीमेंट पुलिस की जांच में सामने आया कि मेरठ से एमकॉम करने वाले निशांत ने त्रिदेव इंटरप्राइजेज के नाम से फर्म खोली थी। त्रिदेव इंटरप्राइजेज के बिलों की जांच में मुस्कान ट्रेडर्स, अयाना इंटरप्राइजेज, श्री सांवरिया सेठजी ट्रेडिंगग कंपनी, देवेंद्र सिंह चौहान, गंगा ट्रेडिंग कंपनी, रियासत कांट्रेक्टर, चंचल इंटरप्राइजेज, दिया इंटरप्राइजेज, हरेंद्र इंटर प्राइजेज, बिरजू ट्रेडर्स, तिवारी ट्रेडर्स, डीपी डेवलपर्स, अग्रवाल सीमेंट ट्रेडर्स, कुनाल कंस्ट्रक्शन, शारदा ट्रेडर्स और शिवायु इंडस्ट्रीज समेत 17 से अधिक फर्मं को डैमेज सीमेंट सप्लाई की जा रही थी। जांच से जुड़े यह अहम सवाल – सात साल पुराने कारोबार में कितनी नकली सीमेंट बेची गई ? – जिन 17 से अधिक फर्मों को सीमेंट सप्लाई हुई, वो किसकी और कहां–कहां पर हैं ? – प्लॉट मालिक कौन है और इस सिंडिकेट में उसकी क्या भूमिका है ? – छापेमारी के दौरान बिल लेकर कौन फरार हुआ था ? – नकली सीमेंट का इस्तेमाल किन भवनों और सरकारी प्रोजेक्टों में हुआ था ?

