धान खरीद और पैक्सों की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेशभर के पैक्स अध्यक्षों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। गयाजी के मानपुर स्थित सिकहर मोड़ के राज महल रिसोर्ट में दी मगध सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष विनय कुमार यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि सरकार ने सात सूत्री मांगें नहीं मानीं तो 15 नवंबर से प्रदेशभर के पैक्स अध्यक्ष अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस दौरान धान खरीद पूरी तरह ठप करने की भी चेतावनी दी गई। बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों और बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम (एसएफसी) की ओर से भुगतान में देरी के कारण पैक्स और किसान आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। उनका कहना था कि पैक्सों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगामी धान खरीद पर भी असर पड़ेगा। 174 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज, 29 पैक्स डिफॉल्टर कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष विनय कुमार यादव ने कहा कि पैक्सों ने किसानों से धान खरीदकर समय पर चावल एसएफसी को उपलब्ध कराया। इसके बावजूद एसएफसी की ओर से समय पर भुगतान नहीं किया गया। भुगतान में देरी के कारण समितियों पर करीब 174 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज लग गया है। उन्होंने बताया कि अकेले गया जिले के 29 पैक्स डिफॉल्टर घोषित हो चुके हैं। बैंक के ब्याज का बोझ बढ़ने से समितियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। उनका कहना था कि जब तक पैक्सों के खाते माइनस से प्लस में नहीं आते, तब तक वे अगली बार धान खरीदने की स्थिति में नहीं रहेंगे। सात सूत्री मांगों पर अड़े पैक्स अध्यक्ष बैठक में पैक्स अध्यक्षों ने सरकार के सामने सात सूत्री मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग एसएफसी की ओर से भुगतान में देरी के कारण लगाए गए अतिरिक्त ब्याज को पूरी तरह माफ करने की है। उनका कहना है कि डिफॉल्टर घोषित पैक्सों को इस आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए ब्याज माफी जरूरी है। दूसरी मांग है कि किसानों के कुल धान उत्पादन का कम से कम 50 प्रतिशत खरीदने का लक्ष्य पैक्सों को दिया जाए। पैक्स अध्यक्षों का आरोप है कि कम खरीद लक्ष्य के कारण उन्हें अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर धान बेचने की मजबूरी होती है। कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क बढ़ाने की मांग पैक्स अध्यक्षों ने कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क में भी बढ़ोतरी की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2012-13 से अब तक डीजल, मजदूरी और परिवहन का खर्च कई गुना बढ़ गया है, लेकिन हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टिंग चार्ज में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके अलावा जूट के बोरे की कीमत बढ़ाने की मांग की गई है। फिलहाल बोरे के लिए 25 रुपए प्रति क्विंटल दिए जाने की बात कही गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि बाजार में इस दर पर बोरा मिलना मुश्किल है। उन्होंने इसे बढ़ाकर कम से कम 100 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। प्रबंधकीय अनुदान 30 से बढ़ाकर 60 रुपए करने की मांग बैठक में पैक्स, कोऑपरेटिव बैंक और एसएफसी के बीच त्रिपक्षीय समझौता लागू करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही प्रबंधकीय अनुदान को 30 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि इससे समितियों को कामकाज चलाने में आर्थिक मदद मिलेगी। मांगें नहीं मानीं तो धान खरीद पूरी तरह बंद बैठक के बाद विनय कुमार यादव ने कहा कि एसएफसी और सरकार की नीतियों के कारण गया जिले के 29 पैक्स डिफॉल्टर हो चुके हैं। उन पर 174 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज लगाया गया है। वर्ष 2012 के बाद से कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क में बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि खर्च लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पैक्स किसानों की सेवा करते हैं, लेकिन आर्थिक संकट के कारण अब उनके लिए काम जारी रखना मुश्किल हो रहा है। सरकार ने सात सूत्री मांगों पर ध्यान नहीं दिया और पैक्सों को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया तो 15 नवंबर से धान खरीद पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पैक्सों का अस्तित्व बचाने के लिए सरकार को इन समस्याओं का जल्द समाधान करना होगा। बैठक में पैक्स अध्यक्ष श्रवण सिंह, उदय सिंह, राजेश यादव, जितेंद्र सिंह, शंकर सिंह, कमलेश सिंह, उत्तम सिंह, हेमंत सिंह, योगेंद्र सिंह, सोनू सिंह, राजेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह, महेंद्र यादव, मृत्युंजय सिंह और वीरेंद्र यादव सहित कई लोग मौजूद रहे। धान खरीद और पैक्सों की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेशभर के पैक्स अध्यक्षों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। गयाजी के मानपुर स्थित सिकहर मोड़ के राज महल रिसोर्ट में दी मगध सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष विनय कुमार यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि सरकार ने सात सूत्री मांगें नहीं मानीं तो 15 नवंबर से प्रदेशभर के पैक्स अध्यक्ष अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस दौरान धान खरीद पूरी तरह ठप करने की भी चेतावनी दी गई। बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों और बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम (एसएफसी) की ओर से भुगतान में देरी के कारण पैक्स और किसान आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। उनका कहना था कि पैक्सों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगामी धान खरीद पर भी असर पड़ेगा। 174 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज, 29 पैक्स डिफॉल्टर कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष विनय कुमार यादव ने कहा कि पैक्सों ने किसानों से धान खरीदकर समय पर चावल एसएफसी को उपलब्ध कराया। इसके बावजूद एसएफसी की ओर से समय पर भुगतान नहीं किया गया। भुगतान में देरी के कारण समितियों पर करीब 174 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज लग गया है। उन्होंने बताया कि अकेले गया जिले के 29 पैक्स डिफॉल्टर घोषित हो चुके हैं। बैंक के ब्याज का बोझ बढ़ने से समितियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। उनका कहना था कि जब तक पैक्सों के खाते माइनस से प्लस में नहीं आते, तब तक वे अगली बार धान खरीदने की स्थिति में नहीं रहेंगे। सात सूत्री मांगों पर अड़े पैक्स अध्यक्ष बैठक में पैक्स अध्यक्षों ने सरकार के सामने सात सूत्री मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग एसएफसी की ओर से भुगतान में देरी के कारण लगाए गए अतिरिक्त ब्याज को पूरी तरह माफ करने की है। उनका कहना है कि डिफॉल्टर घोषित पैक्सों को इस आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए ब्याज माफी जरूरी है। दूसरी मांग है कि किसानों के कुल धान उत्पादन का कम से कम 50 प्रतिशत खरीदने का लक्ष्य पैक्सों को दिया जाए। पैक्स अध्यक्षों का आरोप है कि कम खरीद लक्ष्य के कारण उन्हें अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर धान बेचने की मजबूरी होती है। कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क बढ़ाने की मांग पैक्स अध्यक्षों ने कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क में भी बढ़ोतरी की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2012-13 से अब तक डीजल, मजदूरी और परिवहन का खर्च कई गुना बढ़ गया है, लेकिन हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टिंग चार्ज में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके अलावा जूट के बोरे की कीमत बढ़ाने की मांग की गई है। फिलहाल बोरे के लिए 25 रुपए प्रति क्विंटल दिए जाने की बात कही गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि बाजार में इस दर पर बोरा मिलना मुश्किल है। उन्होंने इसे बढ़ाकर कम से कम 100 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। प्रबंधकीय अनुदान 30 से बढ़ाकर 60 रुपए करने की मांग बैठक में पैक्स, कोऑपरेटिव बैंक और एसएफसी के बीच त्रिपक्षीय समझौता लागू करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही प्रबंधकीय अनुदान को 30 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि इससे समितियों को कामकाज चलाने में आर्थिक मदद मिलेगी। मांगें नहीं मानीं तो धान खरीद पूरी तरह बंद बैठक के बाद विनय कुमार यादव ने कहा कि एसएफसी और सरकार की नीतियों के कारण गया जिले के 29 पैक्स डिफॉल्टर हो चुके हैं। उन पर 174 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज लगाया गया है। वर्ष 2012 के बाद से कमीशन, मजदूरी और परिवहन शुल्क में बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि खर्च लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पैक्स किसानों की सेवा करते हैं, लेकिन आर्थिक संकट के कारण अब उनके लिए काम जारी रखना मुश्किल हो रहा है। सरकार ने सात सूत्री मांगों पर ध्यान नहीं दिया और पैक्सों को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया तो 15 नवंबर से धान खरीद पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पैक्सों का अस्तित्व बचाने के लिए सरकार को इन समस्याओं का जल्द समाधान करना होगा। बैठक में पैक्स अध्यक्ष श्रवण सिंह, उदय सिंह, राजेश यादव, जितेंद्र सिंह, शंकर सिंह, कमलेश सिंह, उत्तम सिंह, हेमंत सिंह, योगेंद्र सिंह, सोनू सिंह, राजेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह, महेंद्र यादव, मृत्युंजय सिंह और वीरेंद्र यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।

