भास्कर न्यूज | जालंधर मानसून की सुस्ती और बारिश का इंतजार लंबा होने के कारण जालंधर समेत पूरे पंजाब में बिजली संकट गहराता जा रहा है। जालंधर शहर में बिजली का लोड हर घंटे 500 लाख यूनिट से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है। दूसरी तरफ, धान की फसल को इस समय सबसे ज्यादा पानी की जरूरत है, लेकिन बारिश न होने से खेत पूरी तरह सूख रहे हैं। इस स्थिति में किसान फसलों को बचाने के लिए पूरी तरह ट्यूबवेलों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे राज्य के 14 लाख से अधिक ट्यूबवेल लगातार 8 से 10 घंटे चल रहे हैं। इसके चलते कृषि क्षेत्र में सिंचाई की मांग घटने के बजाय अचानक 30% से 35% तक बढ़ गई है। उमस भरी भीषण गर्मी के कारण घरेलू और व्यावसायिक क्षेत्रों में एसी का इस्तेमाल भी चरम पर है। इस दोहरे दबाव की वजह से पंजाब स्तर पर बिजली की मांग रिकॉर्ड 1,500 लाख यूनिट यानी 15,000 से 15,100 मेगावाट के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले साल अगस्त के आखिरी दिनों की तुलना में 1,000 मेगावाट अधिक है। इस भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को सेंट्रल ग्रिड से रोजाना 9,500 से 10,000 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ रही है, जबकि राज्य के अपने थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट भी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। पंजाब ग्रिड पर दबाव स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के अनुसार पूरे पंजाब में बिजली का लोड पीक लेवल पर है। रोजाना अधिकतम मांग 15,000 से 15,100 मेगावाट तक पहुंच रही है। इस लोड को संभालने के लिए पावरकॉम को सेंट्रल ग्रिड से रोजाना लगभग 9,500 से 10,000 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ रही है, जबकि राज्य के अपने थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट भी पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार 15 सितंबर तक उमस से राहत मिलने के आसार नहीं हैं, जिससे आने वाले 3 हफ्तों तक पावर ग्रिड पर दबाव बना रहेगा।

