द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में दक्षिणपंथी पार्टी AfD की बड़ी जीत, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को बड़ा झटका

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में दक्षिणपंथी पार्टी AfD की बड़ी जीत, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को बड़ा झटका

बर्लिन। जर्मनी की राजनीति में दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने रविवार को सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य के चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर सियासी समीकरण बदल दिए हैं। एग्जिट पोल के मुताबिक AfD करीब 44 फीसदी वोट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह नतीजा चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व वाले रूढ़िवादी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

AfD को हालांकि स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, लेकिन पार्टी की यह सफलता ऐतिहासिक मानी जा रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी राज्य स्तर पर सत्ता के बेहद करीब पहुंची है। चुनाव में करीब 77 फीसदी मतदान हुआ।

‘हमने इतिहास रच दिया’

AfD के सैक्सोनी-आनहाल्ट के प्रमुख उम्मीदवार उलरिख सीगमुंड ने नतीजों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जनता ने राजनीतिक बदलाव के पक्ष में स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह जीत 2029 के संघीय चुनाव में राष्ट्रीय सत्ता हासिल करने की दिशा में पहला कदम है। नतीजे सामने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया। मैगडेबर्ग में आयोजित चुनावी कार्यक्रम में लोगों ने जर्मन झंडे लहराए और एक-दूसरे को गले लगाकर जीत का जश्न मनाया।

मर्ज सरकार से नाराजगी का फायदा

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एएफडी की सफलता के पीछे केंद्र सरकार के प्रति बढ़ती नाराजगी भी बड़ी वजह है। एक सर्वे के अनुसार, सैक्सोनी-आनहाल्ट के 87 फीसदी मतदाता संघीय सरकार के कामकाज से असंतुष्ट हैं। जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अध्यक्ष मार्सेल फ्रात्शर ने कहा कि यह नतीजा मुख्य रूप से संघीय सरकार के खिलाफ अविश्वास का संकेत है। चांसलर मर्ज जर्मनी की कमजोर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कारोबार समर्थक सुधारों और सरकारी खर्च बढ़ाने की योजना पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता भी हाल के दिनों में काफी गिरी है।

प्रवासियों पर सख्त रुख

AfD की राजनीति का प्रमुख आधार आव्रजन विरोधी नीतियां हैं। पार्टी अवैध और अनियंत्रित प्रवासन पर कड़े प्रतिबंध लगाने, रूस के साथ संबंध बहाल करने, यूक्रेन को समर्थन कम करने और यूरो मुद्रा से बाहर निकलने जैसी नीतियों की वकालत करती रही है।

चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने जर्मनी को अधिक सुरक्षित और साफ-सुथरा बनाने तथा पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। पार्टी स्कूलों और सांस्कृतिक संस्थानों में पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने, आव्रजन पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था में बदलाव की भी पक्षधर है।

मुख्यधारा की पार्टियां AfD से दूरी बनाए हुए

जर्मनी की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां एएफडी के साथ गठबंधन या सहयोग से इनकार करती रही हैं। जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी के स्थानीय कार्यालय ने पार्टी को दक्षिणपंथी चरमपंथी के रूप में वर्गीकृत किया है। एएफडी इन आरोपों को खारिज करती है और इसे अपने समर्थकों का अपमान बताती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एएफडी बहुमत के अभाव में सैक्सोनी-आनहाल्ट में सरकार कैसे बनाएगी। पार्टी के संभावित सहयोगियों को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। छोटी सहारा वागेनक्नेख्त अलायंस (BSW) पार्टी ने गैर-दलीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बनाने की संभावना जताई है, लेकिन एएफडी नेता सीगमुंड ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ रहा एएफडी का प्रभाव

पूर्वी जर्मनी का हिस्सा रहे सैक्सोनी-आनहाल्ट की आबादी करीब 20 लाख है। राज्य छोटा होने के बावजूद यहां एएफडी की बड़ी जीत जर्मनी की राष्ट्रीय राजनीति के लिए अहम संकेत मानी जा रही है। हालिया INSA सर्वे में एएफडी को 28 फीसदी समर्थन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर सबसे लोकप्रिय पार्टी बताया गया है, जबकि रूढ़िवादी दल करीब 20 फीसदी पर हैं। ऐसे में सैक्सोनी-आनहाल्ट का परिणाम चांसलर मर्ज और उनकी सरकार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

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