मध्यप्रदेश के देवास जिले में जहरीली शराब पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत के दावों के बीच उज्जैन संभाग के आयुक्त ने इन मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय दल गठित किया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह दल 15 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन के अतिरिक्त जिलाधिकारी प्रथम कौशिक जांच दल के अध्यक्ष होंगे, जबकि मंदसौर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामसनेही मिश्रा, रतलाम जिले के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) लेखराज मीणा, उज्जैन के संभागीय उड़नदस्ते के उप आबकारी आयुक्त हर्षवर्धन राय और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्रीय संचालक डॉ. दीपक कुमार पिप्पल इसके सदस्य होंगे। संभागायुक्त के आदेश के मुताबिक जांच दल मौतों के कारणों, परिस्थितियों और उनसे जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक तथ्यों की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच करके 15 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। ग्रामीणों का दावा है कि देवास जिले में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच जहरीली शराब पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत हुई।
जिला प्रशासन ने पहले इन दावों को असत्य और भ्रामक बताया था, लेकिन बाद में कहा कि दो मृतकों के विसरा के नमूने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजे गए हैं। प्रशासन के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद ही इन मौतों की वजह स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन ने कहा था कि एक से 15 अक्टूबर के बीच चंदाना गांव में 10 लोगों की मौत हुई, लेकिन इनमें से किसी की भी मौत जहरीली शराब से नहीं हुई।
प्रशासन ने दावा किया था कि चंदाना में हुई मौतें जहरीली शराब के कारण नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्याओं, सामान्य बीमारियों, ‘ब्रेन हेमरेज’ और ‘शराब के अत्यधिक सेवन’ की लत से हुई हैं। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि चंदाना, बिंजाना और आसपास के इलाकों में पिछले एक महीने में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत हुई और कम से कम 40 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई। उन्होंने प्रशासन पर मौतों को छिपाने और शराब माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

