दिल्ली में गैस सिलेंडर विस्फोट, जीजा-साले की मौत:गयाजी पहुंची डेड बॉडी, पिता बोले- बिहार में नौकरी होती तो बेटे की जान नहीं जाती

दिल्ली में गैस सिलेंडर विस्फोट, जीजा-साले की मौत:गयाजी पहुंची डेड बॉडी, पिता बोले- बिहार में नौकरी होती तो बेटे की जान नहीं जाती

दिल्ली में गैस सिलेंडर विस्फोट में 3 सितंबर को जीजा-साले की मौत हुई थी। इलाज के दौरान 6 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। मृतकों में साला पंकज कुमार (32) और उनके जीजा राजेंद्र राम (38) हैं। पंकज की डेड बॉडी 7 सितंबर को एंबुलेंस से इमामगंज के अलीगनर गांव लाई गईं, जबकि जीजा राजेंद्र राम की लाश को उनके घर पलामू ले जाया गया है। दोनों दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वीपर का काम करते थे। पंकज के पिता परमेश्वर दास कहते हैं बिहार में अगर जॉब होता तो बेटा रोजगार के लिए बाहर नहीं जाता और न उसकी मौत होती। कमरे में गैस रिसाव के बाद हुआ था विस्फोट परिजनों के अनुसार, 3 सितंबर को पंकज कुमार और उनके जीजा राजेंद्र राम दिल्ली में ड्यूटी से लौटे थे। दोनों कमरे पर पहुंचे। खाना बनाया। खाना खाने के बाद दोनों सो गए।
कमरे में गैस का रिसाव हुआ। इसके बाद आग लग गई। गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया। कमरे में सो रहे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह दोनों को बाहर निकाला गया। इसके बाद इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई थी, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रोजगार की तलाश में गया था, बेटा अभ कभी नहीं लौटेगा- पिता पंकज कुमार की मौत से उनके पिता परमेश्वर दास पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को गांव और आसपास रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा तो गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार के लिए दिल्ली और दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। रोजगार की तलाश में बेटा घर से निकला था। जो अब कभी वापस नहीं आएगा। पंकज की मां लकवाग्रस्त
पंकज कुमार की मां पहले से ही गंभीर परेशानी से जूझ रही हैं। उन्हें लकवा मार चुका है। वह बोल भी नहीं पाती हैं। ऐसे में जवान बेटे की मौत ने परिवार का दर्द और बढ़ा दिया है। जिस घर में बेटे के लौटने का इंतजार रहता था, वहां अब उसकी अर्थी पहुंची है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
राजेंद्र तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे
दूसरी तरफ जीजा राजेंद्र राम पलामू के रहने वाले थे। पिता जगलाल दास हैं। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। दिल्ली में रहकर काम करते थे। हादसे में उनकी मौत की खबर मिलते ही पलामू स्थित उनके घर में भी मातम छा गया। जीजा-साले की एक साथ मौत ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि दोनों रोजी-रोटी के लिए घर से दूर दिल्ली गए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वहां से दोनों के शव वापस आएंगे। दिल्ली में गैस सिलेंडर विस्फोट में 3 सितंबर को जीजा-साले की मौत हुई थी। इलाज के दौरान 6 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। मृतकों में साला पंकज कुमार (32) और उनके जीजा राजेंद्र राम (38) हैं। पंकज की डेड बॉडी 7 सितंबर को एंबुलेंस से इमामगंज के अलीगनर गांव लाई गईं, जबकि जीजा राजेंद्र राम की लाश को उनके घर पलामू ले जाया गया है। दोनों दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वीपर का काम करते थे। पंकज के पिता परमेश्वर दास कहते हैं बिहार में अगर जॉब होता तो बेटा रोजगार के लिए बाहर नहीं जाता और न उसकी मौत होती। कमरे में गैस रिसाव के बाद हुआ था विस्फोट परिजनों के अनुसार, 3 सितंबर को पंकज कुमार और उनके जीजा राजेंद्र राम दिल्ली में ड्यूटी से लौटे थे। दोनों कमरे पर पहुंचे। खाना बनाया। खाना खाने के बाद दोनों सो गए।
कमरे में गैस का रिसाव हुआ। इसके बाद आग लग गई। गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया। कमरे में सो रहे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह दोनों को बाहर निकाला गया। इसके बाद इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई थी, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रोजगार की तलाश में गया था, बेटा अभ कभी नहीं लौटेगा- पिता पंकज कुमार की मौत से उनके पिता परमेश्वर दास पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को गांव और आसपास रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा तो गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार के लिए दिल्ली और दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। रोजगार की तलाश में बेटा घर से निकला था। जो अब कभी वापस नहीं आएगा। पंकज की मां लकवाग्रस्त
पंकज कुमार की मां पहले से ही गंभीर परेशानी से जूझ रही हैं। उन्हें लकवा मार चुका है। वह बोल भी नहीं पाती हैं। ऐसे में जवान बेटे की मौत ने परिवार का दर्द और बढ़ा दिया है। जिस घर में बेटे के लौटने का इंतजार रहता था, वहां अब उसकी अर्थी पहुंची है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
राजेंद्र तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे
दूसरी तरफ जीजा राजेंद्र राम पलामू के रहने वाले थे। पिता जगलाल दास हैं। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। दिल्ली में रहकर काम करते थे। हादसे में उनकी मौत की खबर मिलते ही पलामू स्थित उनके घर में भी मातम छा गया। जीजा-साले की एक साथ मौत ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि दोनों रोजी-रोटी के लिए घर से दूर दिल्ली गए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वहां से दोनों के शव वापस आएंगे।  

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