दिल्ली कोर्ट से Swatantra Bhardwaj को 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत, पुलिस को दिए जांच के निर्देश

दिल्ली कोर्ट से Swatantra Bhardwaj को 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत, पुलिस को दिए जांच के निर्देश

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को हिंदुत्व समर्थक ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देते हुए हमले से जुड़े मामले की जांच के संबंध में पुलिस को कई निर्देश जारी किए। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत एक विशेष अदालत होने के नाते, जांच एजेंसी को निर्देश दिया जाता है कि वह तेजी से जांच करे। जांच अधिकारी के कानून के तहत कोई अन्य कदम उठाने के अधिकार प्रभावित हुए बिना वह विशेष तौर पर सभी उपलब्ध सरकारी और निजी स्रोतों से जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन वाली जगह, खासकर घटना वाली जगह या उसके आस-पास की 23 जून, 2026 की सीसीटीवी फुटेज एकत्र करेगा और उसे सुरक्षित रखेगा।’’
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उस दिन विरोध-प्रदर्शन के दौरान तैनात दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए किसी भी वीडियो या तस्वीर (जिसमें घटना की सर्विलांस फ़ुटेज भी शामिल हो) को हासिल किया जाए; आरोपी के विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से लेकर उसकी गिरफ्तारी तक का ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड’ और टावर लोकेशन डेटा प्राप्त किए जाएं।

इसने यह भी कहा कि विवादित पॉडकास्ट से संबंधित मंच या चैनलों से ‘सब्सक्राइबर’ की जानकारी, अपलोड लॉग, आईपी एड्रेस और मूल फाइल हासिल की जाएं; और यह सुनिश्चित किया जाए कि डेटा सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने कहा, ‘‘उस चैनल को प्रबंधित या संचालित करने वाले व्यक्ति की जांच करें और रिकॉर्डिंग का स्रोत, तारीख तथा स्थिति का पता लगाया जाए; दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए पेन ड्राइव, पॉडकास्ट और वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजें ताकि यह पता चल सके कि वे असली हैं या उनमें कोई बदलाव किया गया है या उन्हें कृत्रिम तरीके से बनाया गया है, और जहां भी ज़रूरी हो, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत प्रमाण हासिल करें।’’
इसमें शिकायतकर्ता और उसकी बेटी को धमकी भरे या अपशब्दों वाले संदेश भेजने के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने के भी निर्देश दिए गए कि क्या इनमें से कोई व्यक्ति भारद्वाज से जुड़ा है। अदालत ने सह-आरोपी सूरज कुमार के ठिकाने और दूसरे साथियों की पहचान में हुई प्रगति के बारे में रिपोर्ट मांगी, साथ ही मेडिकल बोर्ड की राय पर आगे की कार्रवाई की जानकारी तलब की।

इसने कहा, ‘‘सुनवाई की अगली तारीख पर, जांच अधिकारी द्वारा उपरोक्त हर बात पर वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। इस रिपोर्ट में अंतरिम जमानत के दौरान आवेदक के व्यवहार (जिसमें उससे जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियां भी शामिल हैं) और शिकायतकर्ता व उसकी नाबालिग बेटी को मिली धमकियों पर की गई कार्रवाई का भी ज़िक्र होगा।’’
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी को यह छूट है कि वे ज़मानत की शर्तों के किसी भी उल्लंघन की जानकारी तुरंत अदालत को दें, और इसके लिए अगली तारीख का इंतज़ार न करें, ताकि अंतरिम जमानत की समीक्षा की जा सके या उसे रद्द किया जा सके। इसने कहा, ‘‘नियमित जमानत की अर्जी लंबित रहेगी और अगली तारीख पर आवेदक के आचरण तथा वस्तुस्थिति रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार किया जाएगा।

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