दलित उत्पीड़न मामले में 9 को सश्रम कारावास:सरकारी चापाकल पर स्नान को लेकर जानलेवा हमला, 8 को 5, एक को 7 साल कैद

दलित उत्पीड़न मामले में 9 को सश्रम कारावास:सरकारी चापाकल पर स्नान को लेकर जानलेवा हमला, 8 को 5, एक को 7 साल कैद

शेखपुरा में जिला न्यायालय शेखपुरा ने दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत एक मामले में नौ आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इनमें से आठ आरोपियों को पांच-पांच साल और मुख्य आरोपी विनोद बिंद को सात साल की सजा दी गई है। सभी दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। विशेष न्यायाधीश नीरज किशोर ने शुक्रवार को इन सभी को दोषी ठहराते हुए जेल भेज दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए सोमवार को उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। यह मामला सरकारी चापाकल पर स्नान करने को लेकर हुए जानलेवा हमले से संबंधित है। दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के विशेष लोक अभियोजक चंद्रमौली यादव ने बताया कि यह घटना 14 जुलाई 2017 को कुसुंभा थाना अंतर्गत बरैया बीघा टोला गांव में हुई थी। गांव के शिवकुमार चौधरी सरकारी चापाकल पर स्नान कर रहे थे, तभी विनोद बिंद ने उन्हें दलित कहकर गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। जब शिवकुमार चौधरी के परिजन नकुल चौधरी, गुड़िया देवी और बिशुन चौधरी उन्हें बचाने पहुंचे, तो उन पर भी घातक हथियारों से हमला किया गया। हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से उनके सिर, पैर और हाथों पर वार कर उन्हें अधमरा कर दिया। बाद में अन्य ग्रामीणों के पहुंचने पर घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने घायलों के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था। मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने शुक्रवार को सभी आरोपियों को दोषी पाया। दोषियों में विनोद बिंद, श्री बिंद, श्री बिंद के तीन पुत्र शिव कुमार बिंद, मनोज बिंद, राजकुमार बिंद, नगीना बिंद, पप्पू बिंद, मदन बिंद और पैरू बिंद शामिल हैं। न्यायालय ने विनोद बिंद को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के साथ-साथ दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत भी दोषी ठहराया है। उत्पीड़न अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई जबकि अन्य आठ को भारतीय दंड विधान की धारा 147, 148, 323, 504 आदि के साथ दलित उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाया। सजा सुनाये जाने के बाद में इन सभी को कड़ी सुरक्षा में मंडल कारा भेज दिया गया। शेखपुरा में जिला न्यायालय शेखपुरा ने दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत एक मामले में नौ आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इनमें से आठ आरोपियों को पांच-पांच साल और मुख्य आरोपी विनोद बिंद को सात साल की सजा दी गई है। सभी दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। विशेष न्यायाधीश नीरज किशोर ने शुक्रवार को इन सभी को दोषी ठहराते हुए जेल भेज दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए सोमवार को उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। यह मामला सरकारी चापाकल पर स्नान करने को लेकर हुए जानलेवा हमले से संबंधित है। दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के विशेष लोक अभियोजक चंद्रमौली यादव ने बताया कि यह घटना 14 जुलाई 2017 को कुसुंभा थाना अंतर्गत बरैया बीघा टोला गांव में हुई थी। गांव के शिवकुमार चौधरी सरकारी चापाकल पर स्नान कर रहे थे, तभी विनोद बिंद ने उन्हें दलित कहकर गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। जब शिवकुमार चौधरी के परिजन नकुल चौधरी, गुड़िया देवी और बिशुन चौधरी उन्हें बचाने पहुंचे, तो उन पर भी घातक हथियारों से हमला किया गया। हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से उनके सिर, पैर और हाथों पर वार कर उन्हें अधमरा कर दिया। बाद में अन्य ग्रामीणों के पहुंचने पर घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने घायलों के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था। मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने शुक्रवार को सभी आरोपियों को दोषी पाया। दोषियों में विनोद बिंद, श्री बिंद, श्री बिंद के तीन पुत्र शिव कुमार बिंद, मनोज बिंद, राजकुमार बिंद, नगीना बिंद, पप्पू बिंद, मदन बिंद और पैरू बिंद शामिल हैं। न्यायालय ने विनोद बिंद को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के साथ-साथ दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत भी दोषी ठहराया है। उत्पीड़न अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई जबकि अन्य आठ को भारतीय दंड विधान की धारा 147, 148, 323, 504 आदि के साथ दलित उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाया। सजा सुनाये जाने के बाद में इन सभी को कड़ी सुरक्षा में मंडल कारा भेज दिया गया।  

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