अर्नब तूफान की वजह से यूपी का मौसम बदलने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक, 29 से 31 अक्टूबर तक पूर्वांचल और अवध में भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। हैरत की बात यह है कि अर्नब तूफान यूपी तक पहुंचेगा ही नहीं, फिर भी यहां के मौसम में जबरदस्त बदलाव होगा। आंध्र प्रदेश के तट से टकराने वाला तूफान 1000 किमी दूर यूपी को कैसे प्रभावित करेगा? मौसम में क्या बदलाव होंगे? जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: अर्नब तूफान आंध्र प्रदेश में आएगा, तो यूपी का मौसम कैसे बदलेगा? जवाब: तूफान एक बहुत बड़ा विशाल मौसमी चक्र होता है, जिसका व्यास सैकड़ों किलोमीटर तक फैला होता है। भले ही मुख्य तूफान का केंद्र (आई) आंध्र प्रदेश के तट पर हो, लेकिन उसके विशाल बादल और हवाएं (विंड फीडर्स) बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी खींचते हैं। आगे बढ़ते हुए यह रास्ते में आने वाले इलाकों की हवाओं का रुख बदल देता है। यही वजह है कि समुद्र तट से काफी दूर होने के बावजूद नमी भरे बादल यूपी तक खिंचे चले आते हैं। सवाल 2: यूपी के मौसम में क्या बदलाव आएगा?
जवाब: तट से टकराने के बाद अर्नब तूफान की ताकत कम होने लगेगी। अंदरूनी इलाकों से होते हुए अर्नब तूफान उत्तर दिशा की ओर बढ़ेगा। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा होते हुए यूपी तक पहुंचेगा। हालांकि, यूपी पहुंचने तक यह काफी कमजोर हो चुका होगा। फिर भी इस तूफान में नमी की मात्रा बहुत ज्यादा होगी। इस वजह से 29 से 31 अक्टूबर तक पूर्वी यूपी और अवध के इलाकों में भारी बारिश होगी। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं और आंधी चल सकती है। प्रयागराज, वाराणसी, बलिया, मिर्जापुर और चंदौली जैसे पूर्वांचल के 15 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। लगातार बारिश और घने बादलों की वजह से तापमान में भारी गिरावट आएगी, जिससे मौसम में अचानक ठंडक बढ़ जाएगी। मौसम विभाग के मुताबिक तापमान में 6 से 8°C तक की गिरावट आएगी। सवाल 4: अर्नब तूफान की वजह से यूपी में क्या नुकसान हो सकता है?
जवाब: अर्नब तूफान की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान फसलों को होगा। यह अक्टूबर का आखिरी हफ्ता है। इस समय धान की फसल पक चुकी है और काटी जा रही है। इसके साथ ही गेहूं, आलू, सरसों की बुवाई की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। धान को सबसे ज्यादा नुकसान: धान की फसल इस समय पूरी तरह पककर तैयार है या कटकर खेतों में पड़ी है। तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) से धान के पौधे खेतों में बिछ जाएंगे। अगर कटे हुए धान पानी में डूब गए, तो दाने काले पड़ जाएंगे और सड़ने लगेंगे। सब्जियां और बागवानी: गोभी, टमाटर, मिर्च जैसी हरी सब्जियों की नर्सरी और खेतों में जलभराव होने से पौधे गल जाएंगे। इसके अलावा, तेज हवाओं से केले और पपीते के पेड़ों के टूटने या गिरने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। आलू, सरसों की बुवाई में देरी: जो किसान इन दिनों गेहूं, सरसों या अगेती आलू की बुवाई करने वाले थे, खेतों में पानी भरने के कारण वे कम से कम 10 से 15 दिनों तक बुवाई नहीं कर पाएंगे। इससे रबी का पूरा सीजन लेट हो सकता है। अर्नब तूफान को लेकर IMD और कृषि विभाग ने किसानों के लिए खास गाइडलाइन जारी की है… फसल की तुरंत कटाई और सुरक्षित भंडारण: अगर आपकी धान या मक्के की फसल 80 से 85% तक पक चुकी है, तो 28 अक्टूबर से पहले उसकी कटाई कर लें। काटी गई फसल को खुले खेतों या खलिहानों में न छोड़ें। उसे किसी पक्के शेड या ऊंचे स्थान पर रखकर मजबूत तिरपाल से अच्छी तरह ढंक दें। खेतों से पानी निकालने का इंतजाम: सब्जियों, बागवानी और धान के खेतों में पानी जमा नहीं होने दें। इसके लिए खेतों के कोनों पर नालियां पहले से तैयार कर लें। अगले 3-4 दिन खेत में किसी भी तरह की खाद, कीटनाशक का छिड़काव न करें और न ही सिंचाई करें। बीमा: अगर तूफानी बारिश से फसल का नुकसान होता है, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करने वाले किसान 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत जरूर दर्ज कराएं। जिससे समय पर मुआवजा मिल सके। सवाल 4: चक्रवात कैसे बनता है? जवाब: समुद्र का पानी गर्म होने से इसके ऊपर मौजूद हवा भी गर्म होकर ऊपर उठने लगती है। इससे खाली हुई जगह भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा उस तरफ बढ़ने लगती है। सवाल 5: पहले आए तूफानों का यूपी पर क्या असर हुआ था? जवाब: पिछले सालों में समुद्र तट से टकराकर यूपी तक पहुंचे चक्रवाती तूफानों ने मुख्य रूप से बेमौसम भारी बारिश, बाढ़ जैसी स्थिति और खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। चूंकि यूपी चारों तरफ जमीन से घिरा राज्य है, इसलिए यहां 150 किमी/घंटे की सीधी विनाशकारी हवाएं तो नहीं आतीं। लेकिन, तूफानों के बचे हुए बादलों के सिस्टम जब यहां पहुंचते हैं, तो वह जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देते हैं। चक्रवात मोंथा (अक्टूबर, 2025): यह एक भीषण चक्रवात था, जो बंगाल की खाड़ी से उठकर आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। मोंथा तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा था। वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर और सुल्तानपुर जैसे जिलों में तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) के साथ भारी बारिश हुई थी। नुकसान: खेतों में कटी रखी धान की फसल पानी में डूब गई, जिससे अनाज काला पड़ गया और बाजार में उसकी कीमत आधी रह गई थी। चक्रवात फंगल (नवंबर-दिसंबर, 2024): यह तमिलनाडु और पुदुचेरी के पास समुद्र तट से टकराया था। दक्षिण भारत में तबाही मचाने के बाद, इसके बादलों का एक बड़ा हिस्सा उत्तर की तरफ बढ़ा। यूपी में पहले से मौजूद पश्चिमी विक्षोभ से टकरा गया था। इससे पूरे लखनऊ, कानपुर, बरेली, आगरा और नोएडा में अचानक कड़ाके की ठंड बढ़ गई थी। दिसंबर की शुरुआत में घने कोहरे और ठंडी हवाओं (शीतलहर जैसी स्थिति) का दौर चला था। कई जिलों में बूंदाबांदी भी हुई, जिससे दिन का तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री तक गिर गया था। फायदा/नुकसान: यह बारिश और ठंड गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हुई थी। लेकिन, आम जनजीवन और यातायात को कोहरे व ठंड के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। चक्रवात दाना (अक्टूबर, 2024): यह तूफान बंगाल की खाड़ी से उठा और ओडिशा तट से टकराया था। फिर झारखंड के रास्ते पूर्वांचल में दाखिल हुआ था। इससे प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर में 3 दिनों तक बारिश हुई थी। नुकसान: लगातार रिमझिम बारिश और हवाओं से धान की फसल खेतों में गिर गए, जिससे फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। साथ ही, अगेती आलू और सरसों की बुवाई में 10 दिनों की देरी हो गई थी। ——————————————— ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… भारी बारिश के बाद क्या ठंड भी कड़ाके की होगी, गीजर, ब्लोअर का मार्केट कैसा रहेगा मौसम विभाग का अनुमान था कि इस साल यूपी में कम बारिश होगी। कई जिलों में सूखे जैसे हालात होंगे। जुलाई-अगस्त में ऐसी ही स्थिति रही, लेकिन सितंबर आते-आते मौसम पलट गया। अब आम आदमी अनुमान लगा रहा है कि लगातार बारिश की वजह से इस साल सर्दियां जल्दी आ जाएंगी। इस साल हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ेगी या सामान्य रहेगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…

