गरियाबंद जिले में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से धान की पकी फसल खेतों में गिर गई है। पानी भरे खेतों में फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसान कपड़े की रस्सी से धान के पौधों को बांधकर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। देवभोग और अमलीपदर तहसील में करीब 3 हजार हेक्टेयर में धान की फसल गिर गई है। मक्का, सब्जी और दलहन की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। सिनापाली, बाड़ीगांव, गिरशुल और झाखरपारा इलाके के 20 से ज्यादा गांवों में पकी धान की फसल पानी भरे खेतों में गिर गई है। देवभोग तहसील के सिनापाली गांव में किसान कपड़े की रस्सी से धान के पौधों को बांध रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पानी में डूबी बालियों को सड़ने से बचाने की कोशिश की जा रही है। किसान दुर्बल राम और खिरसिंधु ने बताया कि जिन पौधों में धान के दाने भर रहे हैं, उन्हें सबसे ज्यादा खतरा है। फसल तीन दिन से ज्यादा पानी में डूबी रही तो धान खराब हो सकता है। पके हुए पौधों के भी सड़ने का डर है। सब्जी की बिक्री नहीं, घर के सामने लगा रहे दुकान तूफान से मक्का, सब्जी और दलहन की फसलों को भी नुकसान हुआ है। कच्चे मकानों को भी क्षति पहुंची है। बाजार बंद होने से सब्जी उगाने वाले किसान परेशान हैं। खेतों और बाड़ियों में पानी भरने से सब्जियां खराब होने का डर है। वहीं, बाजार बंद होने के कारण उनकी बिक्री भी नहीं हो पा रही है। पिछले दो दिनों में सब्जियों का रंग भी बदलने लगा है। ऐसे में किसान अपने घरों के सामने ही दुकान लगाकर सब्जियां बेच रहे हैं, ताकि खेती में लगी लागत का कुछ पैसा वापस मिल सके। 33% नुकसान पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान देवभोग तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने बताया कि तूफान से काफी नुकसान हुआ है। किसान भी प्रभावित हुए हैं। नुकसान का सर्वे कराकर आकलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 33 प्रतिशत या इससे ज्यादा नुकसान होने पर आरबीसी 6-4 के तहत क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है। इसके लिए प्रभावित किसानों को विधिवत आवेदन देना होगा। इसके बाद नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर राहत राशि दी जाएगी।

