तमिलनाडु विधानसभा: त्रिशा विवाद के बीच विजय ने दिखाए तेवर, महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी को लेकर कही दो टूक बात!

तमिलनाडु विधानसभा: त्रिशा विवाद के बीच विजय ने दिखाए तेवर, महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी को लेकर कही दो टूक बात!

Tamil Nadu Assembly: तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सख्त रुख दिखाया। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में किसी की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल ठीक नहीं है।

विजय ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा और जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में महिलाओं के बारे में गलत या अभद्र भाषा का इस्तेमाल उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने नेताओं से भी अपील की कि राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत हमलों में नहीं बदलना चाहिए।

‘डबल मीनिंग’ भाषा पर भी जताई चिंता

पुलिस विभाग से जुड़ी चर्चा के दौरान विजय ने तमिलनाडु में महिलाओं को लेकर हो रही कुछ टिप्पणियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों ऐसी बातें सुनने को मिल रही हैं, जिनका गलत या दूसरा मतलब निकाला जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को बोलते समय अपनी भाषा का खास ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने किसी नेता या महिला का नाम नहीं लिया। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी व्यक्ति को निजी तौर पर निशाना बनाना या महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा इस्तेमाल करना सही नहीं है।

त्रिशा को लेकर हुए विवाद के बीच आया बयान

विजय का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले अभिनेत्री त्रिशा को लेकर डीएमके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की एक टिप्पणी विवाद में आ गई थी। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। विजय की पार्टी टीवीके की ओर से भी इस मामले का विरोध किया गया था।

हालांकि उदयनिधि स्टालिन ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने त्रिशा का नाम लेकर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी।

ऐसे में विधानसभा में विजय का महिलाओं की गरिमा और आपत्तिजनक भाषा को लेकर दिया गया बयान उसी विवाद की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस पूरे मामले का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया।

बोलने की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

विजय ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन बोलने की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। किसी के खिलाफ ऐसी भाषा नहीं इस्तेमाल होनी चाहिए, जिससे उसकी छवि या सम्मान को नुकसान पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने खास तौर पर महिलाओं को लेकर होने वाली बयानबाजी पर चिंता जताई और कहा कि राजनीतिक बहस को मर्यादा के दायरे में रखना जरूरी है।

विजय के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नेताओं की भाषा और राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा चर्चा में आ गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि डीएमके और दूसरे विपक्षी दल मुख्यमंत्री के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *