तमिलनाडु उपचुनाव में दोनों सीटों पर हार के बाद एमके स्टालिन ने दी प्रतिक्रिया, कहा- विजय की पार्टी ने वोटरों को ब्लैकमेल किया

तमिलनाडु उपचुनाव में दोनों सीटों पर हार के बाद एमके स्टालिन ने दी प्रतिक्रिया, कहा- विजय की पार्टी ने वोटरों को ब्लैकमेल किया

तमिलनाडु उपचुनाव में दोनों सीटों पर पूर्व सीएम एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को हार का सामना करना पड़ा है। सीएम विजय की पार्टी टीवीके ने दोनों सीटों पर भारी बहुमत से जीत दर्ज की है।

हार के बाद एमके स्टालिन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने खुलकर कहा कि तमिलनाडु के उपचुनावों में लोकतंत्र की हत्या हुई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने साफ कहा कि ये चुनाव सिर्फ जीत-हार का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ खुला खिलवाड़ था।

‘आम आदमी को डराकर वोट लेने की कोशिश हुई’

स्टालिन ने टीवीके और उसके नेता विजय पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके ने मतदाताओं को ब्लैकमेल किया। उनके पार्टी के लोगों ने जनता से कहा कि अगर सत्ताधारी दल हार गई तो क्षेत्र में कोई विकास नहीं होगा। ये धमकी थी, वादा नहीं।

स्टालिन ने कहा- आम आदमी को डराकर वोट लेने की कोशिश हुई। स्टालिन ने इसके साथ एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद विजय ने कई कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान कर दिया।

डीएमके का प्रभाव कम नहीं कर पाए विजय

स्टालिन ने कहा- आचार संहिता लागू होने के बावजूद ये कदम उठाया गया। ये नियमों का खुला उल्लंघन है। चुनावी प्रक्रिया को साफ रखने के लिए जो बंदिशें हैं, उन्हें जानबूझकर तोड़ा गया।

उन्होंने आगे कहा कि विजय ने सिर्फ डीएमके को निशाना बनाया। सारी रैलियों और भाषणों में डीएमके पर ही हमले होते रहे। लेकिन पार्टी की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उन्हें हिलाया नहीं जा सका। जनता ने फिर भी डीएमके के प्रभाव को पहचाना।

‘विश्वासघात की जीत है’

टीवीके की जीत को स्टालिन ने अस्थायी बताया। उन्होंने इसे विश्वासघात की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि झूठी छवि की राजनीति का अंत शुरू हो चुका है।

स्टालिन ने जोर देकर कहा कि ये नतीजे किसी बड़े बदलाव की निशानी नहीं हैं। ये सिर्फ कुछ समय के लिए हैं। असली राजनीति में छल-कपट से काम नहीं चलता। जनता देर-सबेर सच्चाई समझ लेती है।

उन्होंने कहा कि डीएमके लंबे समय से राज्य की सेवा कर रही है। विकास के काम और कल्याणकारी योजनाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में ब्लैकमेल और आचार संहिता तोड़कर जीत हासिल करने की कोशिश लंबे समय तक नहीं टिकेगी।

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