स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान अपने जहाजों की आवाजाही आसान बनाने के लिए ओमान से बातचीत में जुटा है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क उठे। उन्होंने ओमान को सीधी धमकी दे डाली है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ओमान ईरानी जहाजों की नाकाबंदी के रास्ते में आया, तो अमेरिका उस पर बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगा।
फोन पर दिया बेहद तल्ख बयान
फॉक्स न्यूज को दिए एक फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर ओमान दखल देगा तो उसकी हालत खराब कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नाकाबंदी ईरान पर दबाव बनाने के लिए जरूरी है। उनके पास इस पूरे मामले को सुलझाने की कोई तय समय सीमा नहीं है। ट्रंप के मुताबिक वे इसमें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते।
ओमान और ईरान के बीच चल रही बातचीत
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप की इस धमकी के ठीक उलट ईरानी कूटनयिक बीते कई हफ्तों से ओमान के साथ बातचीत की टेबल पर बैठे हैं। दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को अस्थायी रूप से आसान बनाने पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटे हैं। सोमवार को ईरान ने बताया कि इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर एक साझा बयान तैयार करने पर ओमान के साथ काम चल रहा है।
जहाजों के रास्ते को लेकर बनी सहमति
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने बताया कि जहाजों के आवागमन के रास्ते के नक्शे को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है। हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। पहले हुई चर्चाओं के मुताबिक जहाज ईरान के करीब से जलडमरूमध्य में दाखिल हो सकते हैं और ओमान के नजदीक से बाहर निकल सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इस दौरान जहाजों से किसी तरह का शुल्क या टोल भी नहीं वसूला जाएगा। बघई ने माना कि ओमान के साथ बातचीत की रफ्तार धीमी है, लेकिन ईरान अब भी इस पूरे पैकेज और साझा बयान को अंतिम रूप देने की कोशिश में लगा हुआ है।
छह महीने से बंद पड़ा है दुनिया का अहम व्यापारिक रास्ता
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद से यह जंग करीब छह महीने से जारी है और अब तक इसका कोई हल नहीं निकल पाया है। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था, लेकिन फरवरी के हमलों के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था। अमेरिका अब चाहता है कि पहले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो, उसके बाद ही वह ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकाबंदी हटाने पर विचार करेगा।

