भास्कर संवाददाता | रायसेन वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने अब नौकरी बचाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षक संगठनों ने विशेष टीईटी के बहिष्कार का ऐलान किया है। 22 अगस्त से आवेदन शुरू हो चुके हैं, लेकिन जिले में अब तक किसी शिक्षक ने फॉर्म नहीं भरा है। आवेदन की अंतिम तारीख 4 सितंबर है। विरोध के तहत शिक्षक 5 सितंबर को शिक्षक दिवस नहीं मनाएंगे। वे काली पट्टी बांधकर स्कूल पहुंचेंगे और काम करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे। जिले में करीब 6500 शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें 3 से 4 हजार शिक्षकों के विशेष टीईटी से प्रभावित होने का अनुमान है। किसे टीईटी देनी है, विभाग के पास सूची नहीं परीक्षा को लेकर सबसे बड़ा असमंजस पात्र शिक्षकों की सूची को लेकर है। शिक्षा विभाग के पास ऐसा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन शिक्षकों को विशेष टीईटी देनी है और कौन पहले से परीक्षा पास कर चुका है। डीपीआई से परीक्षा संबंधी पत्र शिक्षकों के ग्रुप में साझा किया गया है, लेकिन इसमें जिलेवार पात्र शिक्षकों की सूची नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि जब विभाग ही यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि परीक्षा किन्हें देनी है, तो वे आवेदन कैसे करें। स्कूल स्तर पर भी प्राचार्यों को पात्र शिक्षकों की अधिकृत सूची नहीं मिली है। डीपीआई से शिक्षकों की सूची नहीं मिली ^जिले में करीब 6500 शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें 3 से 4 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। डीपीआई से परीक्षा में किसे शामिल होना है, इसकी सूची अभी प्राप्त नहीं हुई है। – डीडी रजक, जिला शिक्षा अधिकारी, रायसेन 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों की स्थिति उलझी वर्ष 2005 से 2009 के बीच व्यापमं की परीक्षा पास कर नियुक्त हुए शिक्षकों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को आरटीई अधिनियम के तहत टीईटी से छूट देने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक चयन परीक्षा पास करके सेवा में आए हैं, इसलिए उन्हें विशेष टीईटी से मुक्त रखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बिना टीईटी पास किए शिक्षकों के सेवा में बने रहने पर रोक लगाई गई है। हालांकि जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा है, उन्हें राहत दी गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियुक्ति के समय लागू सेवा शर्तों के आधार पर उन्होंने 15 से 20 साल तक सेवा दी है। अब इतने वर्षों बाद परीक्षा अनिवार्य करना उचित नहीं है।

