मोहाली में 2 साल पहले शादी से लौटते रहे बाप-बेटे को तेज रफ्तार टिपर ने टक्कर मार दी थी। हादसे ने 56 साल के जोगिंदर सिंह की जिंदगी बदल दी। उनका दाहिना हाथ पहिए के नीचे आ गया और इलाज के दौरान उसे काटना पड़ा। हाथ के साथ उनका वर्षों पुराना वेल्डिंग का काम भी छूट गया। हादसे के बाद इलाज कराने और हाथ कटने के कारण जोगिंदर भारी नुकसान में आ गया। इस बीच जोगिंदर ने मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। दो साल बाद अब मोहाली की मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्थायी विकलांगता होने के चलते 17.49 लाख का मुआवजा देने के आदेश दिया। इसके साथ राशि पर 7.5 फीसदी ब्याज भी देने को कहा। कोर्ट में इंश्योरेंस कंपनी की एक भी दलील नहीं चली। इस दौरान बीमा कंपनी ने जोगिंदर के पास ड्राइविंग लाइसेंस न होने को भी हादसे में उनकी गलती बताया, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि केवल लाइसेंस न होना किसी व्यक्ति को दुर्घटना का जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। पहले पढ़ें कैसे हादसा हुआ और क्या हुआ पीड़ित के साथ… शादी से लौटते समय टिपर ने बाइक को टक्कर मारी 24 नवंबर 2024 की शाम करीब साढ़े 5 बजे अंबाला निवासी जोगिंदर सिंह अपने बेटे रामनदीप सिंह के साथ स्प्लेंडर बाइक से नारायणगढ़ की ओर से लौट रहे थे। मोहाली के हैंडेसरा गांव के पास तेज और लापरवाही से मोड़ काट रहे टिपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में जोगिंदर का दाहिना हाथ टिपर के पहिए के नीचे आ गया और बुरी तरह कुचल गया। घायल बाप-बेटे को राहगीर अस्पताल ले गए हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटने लगी तो ड्राइवर टिपर लेकर फरार हो गया। जोगिंदर ने टिपर का नंबर HR-68-C-2345 नोट कर लिया था। इसके बाद राहगीरों ने दोनों को अंबाला के मेहंदीरत्ता अस्पताल पहुंचाया। गंभीर चोट के कारण जोगिंदर का इलाज लंबे समय तक चला। इलाज के दौरान काटना पड़ा दाहिना हाथ जांच में डॉक्टरों ने पाया कि हाथ बुरी तरह कुचल चुका था और कई हड्डियां टूट गई थीं। इलाज और प्लास्टिक सर्जरी के बावजूद हाथ बचाया नहीं जा सका। जोगिंदर के अनुसार, उन्हें 24 से 27 नवंबर 2024 और फिर 17 से 19 दिसंबर तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इलाज और दवाओं पर 6.37 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुए। दो दिन बाद FIR दर्ज हुई हादसे के अगले दिन पुलिस बयान लेने अस्पताल पहुंची, लेकिन जोगिंदर का ऑपरेशन चल रहा था। डॉक्टरों ने उस समय बयान दर्ज नहीं करने दिया। अगले दिन 26 नवंबर 2024 को बयान लेने के बाद हैंडेसरा थाने में FIR नंबर 64 दर्ज की गई। हादसे के बाद मुआवजे के लिए कोर्ट कैसे पहुंचा मामला 60% स्थायी विकलांगता, जनवरी 2025 में दायर की याचिका 8 अप्रैल 2026 को सिविल सर्जन अंबाला के मेडिकल बोर्ड ने जोगिंदर की जांच की। बोर्ड ने दाहिना हाथ गंवाने के कारण उन्हें पूरे शरीर के संदर्भ में 60% स्थायी विकलांग माना। इसी स्थायी विकलांगता और हादसे में हुई आर्थिक नुकसान के आधार पर जोगिंदर ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे की मांग की। उनकी क्लेम पिटीशन 3 जनवरी 2025 को MACT में दर्ज हुई थी। बीमा कंपनी ने याचिका को बताया था फर्जी याचिका पर सुनवाई के दौरान द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने मुआवजे के दावे का विरोध किया। कंपनी ने ड्राइवर और वाहन मालिक के साथ मिलीभगत कर फर्जी दावा करने का आरोप लगाया। साथ ही FIR में देरी और पीड़ित के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होने को भी आधार बनाया। 2015 से वेल्डर थे, हादसे के बाद काम छूटा जोगिंदर 2015 से गुरु नानक इंडस्ट्रीज में वेल्डर के रूप में काम कर रहे थे। दाहिना हाथ कटने के बाद वह अपना पुराना काम दोबारा नहीं कर सके। फैक्ट्री मालिक राकेश रल्हन ने भी कोर्ट में गवाही दी कि हादसे के बाद जोगिंदर कभी काम पर वापस नहीं लौटे। इन आधारों पर मुआवजा देने का फैसला हुआ पीड़ित के लाइसेंस न होने की दलील खारिज बीमा कंपनी ने कहा था कि जोगिंदर के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए हादसे में उनकी भी हिस्सेदारी मानी जानी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि केवल लाइसेंस न होना दुर्घटना के लिए लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि जोगिंदर की ड्राइविंग के कारण हादसा हुआ। टिपर ड्राइवर की लापरवाही से हादसा माना उधर, ड्राइवर हरपाल सिंह और वाहन मालिक विशाल शर्मा ट्रिब्यूनल में आकर दावे का विरोध नहीं कर सके। पीड़ित के बयान और FIR के आधार पर कोर्ट ने माना कि हादसा टिपर ड्राइवर की तेज और लापरवाह ड्राइविंग से हुआ था। टिपर के दस्तावेज और बीमा पॉलिसी वैध मिली सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि हादसे के समय टिपर ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। वाहन की RC, फिटनेस और बीमा पॉलिसी भी वैध थी। बीमा कंपनी पॉलिसी की किसी शर्त के उल्लंघन को साबित नहीं कर पाई। अब जानिए कोर्ट ने कैसे तय किया 17.49 लाख का मुआवजा 20 हजार की आय का दावा, कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी मानी जोगिंदर ने अपनी मासिक आय 20 हजार रुपए बताई थी, लेकिन इसका ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर उनकी मासिक आय 10,996 रुपए मानी। इसके बाद भविष्य की आय के नुकसान का आकलन किया गया। ऐसे बनी 17.49 लाख रुपए की मुआवजा राशि कोर्ट ने इलाज और दवाओं के 6,37,886 रुपए, स्पेशल डाइट और असिसटेंट रखने के लिए 45 हजार, ट्रांस्पोर्ट खर्च के लिए 50 हजार, दर्द झेलने के लिए 1 लाख रुपए दिए। इसके अलावा 3 महीने की आय का नुकसान 32,988 रुपए, भविष्य की आय का नुकसान 7,83,756 रुपए और मेंटल पेन सहने के चलते 1 लाख रुपए जोड़े गए। कुल मुआवजा 17,49,630 रुपए तय किया गया। 18% ब्याज मांगा था, कोर्ट ने 7.5% तय किया जोगिंदर ने मुआवजे की राशि पर 18% सालाना ब्याज की मांग की थी। वहीं बीमा कंपनी ने ब्याज दर अधिकतम 6% रखने की दलील दी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने 7.5% सालाना ब्याज तय किया। तीनों जिम्मेदार, भुगतान बीमा कंपनी करेगी ट्रिब्यूनल ने टिपर ड्राइवर हरपाल सिंह, वाहन मालिक विशाल शर्मा और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहराया। चूंकि हादसे के समय वाहन की बीमा पॉलिसी वैध थी, इसलिए 17.49 लाख रुपए और उस पर तय ब्याज का भुगतान बीमा कंपनी को जोगिंदर सिंह को करना होगा। क्या है MACT मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) सड़क हादसों में मौत, चोट या संपत्ति के नुकसान के मुआवजे से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाला विशेष ट्रिब्यूनल है। इसका प्रावधान मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 165 में है। कानून 1988 में बना और 1 जुलाई 1989 से लागू हुआ।

