पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुरू कर दी है। हालांकि, जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस घटनास्थल से सबूत जुटाने की है, जहां 13 अक्टूबर को झोटा की गोली मारकर हत्या की गई थी। वारदात के अगले ही दिन मेडिकल स्टोर को तोड़कर आग लगा दी गई थी। ऐसे में अब CBI के लिए घटनास्थल की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और क्राइम सीन दोबारा तैयार करना आसान नहीं होगा। जांच एजेंसी को यह समझने के लिए आसपास के दुकानदारों, प्रत्यक्षदर्शियों और वारदात की लाइव वीडियो का सहारा लेना पड़ सकता है कि गोलीबारी के दौरान कौन व्यक्ति कहां मौजूद था और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा। प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई, भीड़ ने गिराई बाकी दुकान
झोटा की हत्या के बाद 14 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाया था। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने दुकान का बाकी हिस्सा गिराकर आग लगा दी थी। प्रशासन ने आरोपी के मकान के अवैध निर्माण वाले हिस्से पर भी कार्रवाई की थी। इस घटनाक्रम ने जांच के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि दुकान गिराए जाने से पहले पुलिस ने घटनास्थल से कितने वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्य सुरक्षित किए थे। गोलियों के निशान, खोखे, दुकान की अंदरूनी बनावट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का रिकॉर्ड जांच में अहम साबित हो सकता है। पत्नी ने कहा हमारी मांग नहीं थी दुकान तोड़ना
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने भी जिला व पुलिस प्रशासन की तरफ से आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान को गिराने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाएं है। मनप्रीत कौर ने कहा कि ना उन्होंने और नहीं उसके पिता या परिवार ने आरोपी अश्वनी की दुकान या घर को गिराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन व पुलिस ने सबूत खत्म करने के लिए दुकान को गिरकर सभी सबूत खत्म कर दिए है।
सिद्धू मूसेवाला के पिता ने कहा दुकान तोड़ना गलत कदम
सीबीआई जांच शुरू होने के बाद सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने भी आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान को तोड़ना जिला व पुलिस प्रशासन का गलत कदम बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कर उन्हें झोटा की हत्या में केस प्रापर्टी बनने वाले सभी अहम सबूत खत्म कर दिए है। उन्होंने कहा कि अगर दुकान होती, तो सीबीआई चेक करती कि दुकान में बिना बिल की कितनी दवाई है और कितनी दवाएं बिल समेत है। नशीली दवाओं को रिकार्ड मिलता। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे भी अहम सबूत बनते, लेकिन वह सब खत्म हो चुके है। आसपास के दुकानदार बन सकते हैं अहम गवाह
CBI की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के दुकानदारों से बातचीत की है। टीम ने उनसे वारदात के दिन की परिस्थितियों और घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई। जांच में पड़ोसी दुकानदारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके बयानों से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि झोटा कब दुकान पर पहुंचे, उनके साथ कितने लोग थे, विवाद कैसे शुरू हुआ और गोलीबारी के बाद आरोपी किस तरफ गया। इसके अलावा आसपास की दुकानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में उपयोगी साबित हो सकती है।
CBI ने पुलिस से लिया रिकॉर्ड, नई FIR दर्ज
CBI ने बुधवार को मामले की औपचारिक जांच शुरू करते हुए अपनी FIR दर्ज की। जांच टीम ने मानसा के संबंधित पुलिस थाने से पहले दर्ज FIR और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज हासिल किए हैं।एक DIG रैंक के अधिकारी की अगुवाई में टीम जांच को आगे बढ़ा रही है। टीम ने झोटा के परिवार से भी संपर्क किया है। जांच अधिकारियों ने उनके पिता और पत्नी से घटनाक्रम तथा झोटा की नशा विरोधी गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली है। लाइव वीडियो से खुल सकती हैं वारदात की परतें
13 अक्टूबर को झोटा मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने पहुंचे थे। इसी दौरान दुकान संचालक अश्वनी कुमार के साथ उनका विवाद हुआ और गोलीबारी में उनकी मौत हो गई। घटना का एक हिस्सा फेसबुक लाइव वीडियो में भी रिकॉर्ड हुआ था।
जांच एजेंसी के लिए यह वीडियो महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य साबित हो सकता है। इससे गोली चलने से पहले हुए विवाद, मौके पर मौजूद व्यक्तियों और घटनाक्रम की समयरेखा को समझने में मदद मिलेगी। CBI ने वारदात की वीडियो और झोटा द्वारा पहले सोशल मीडिया पर किए गए नशे संबंधी खुलासों की जानकारी भी जुटाई है।
हत्या के पीछे की वजह भी जांच का अहम हिस्सा
झोटा लंबे समय से मानसा और आसपास के क्षेत्रों में नशे तथा कथित तौर पर नशीली दवाएं बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे थे। वह सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके नशे की बिक्री और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे थे।
अब जांच में यह पता लगाना भी अहम होगा कि हत्या अचानक हुए विवाद का परिणाम थी या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित साजिश थी। झोटा द्वारा पहले लगाए गए आरोपों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। राजस्थान से गिरफ्तार हुआ था मुख्य आरोपी
हत्या के बाद फरार हुए मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को पुलिस ने राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया था। घटना के बाद मानसा में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी, जिसके बाद पंजाब सरकार ने मामला CBI को सौंप दिया। अब जांच एजेंसी के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़कर घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर तैयार करना है। साथ ही यह सवाल भी जांच के लिहाज से अहम रहेगा कि घटनास्थल को ध्वस्त किए जाने से पहले साक्ष्यों को किस हद तक सुरक्षित किया गया था।

