देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्णिया में महागठबंधन और कई जन-संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और बर्खास्तगी की मांग की। इस मांग को लेकर हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन और आक्रोश मार्च निकाला। शहर के रंगभूमि मैदान से शुरू हुए इस मार्च में सरकार विरोधी नारे लगाए गए। बाद में आर एन शॉ चौक पर ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। रंगभूमि मैदान से आर एन शॉ चौक तक निकला आक्रोश मार्च शहर के ऐतिहासिक रंगभूमि मैदान में हज़ारों की संख्या में युवा, महागठबंधन के विभिन्न घटक दल कांग्रेस, राजद, वामदल, वीआईपी, आईआईपी के कार्यकर्ता और स्थानीय विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एकजुट हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ उग्र नारेबाजी करते हुए शहर के व्यस्त आर एन शॉ चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका शहर के आर एन शॉ चौक पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने चौक को पूरी तरह घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया और केंद्र सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाकर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई। लोकतंत्र और जनमत की हत्या बर्दाश्त नहीं कांग्रेस नेता जितेंद्र यादव का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग निष्पक्षता खो चुका है। देश भर में मतदाता सूचियों से नाम हटाने और वोट चोरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लोकतंत्र और जनमत की हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस नेताओं को डिटेन करने का विरोध सांसद पप्पू यादव की टीम में शामिल छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष कारण यादव ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और स्थानीय सांसद पप्पू यादव सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में किया गया। इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की गई और इसे तानाशाही और लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास बताया। सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी राजद के महानगर अध्यक्ष सबी अहमद ने कहा कि 1 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी विरोध का आह्वान किया गया है। यदि ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह जन-आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। राजद के युवा ज़िला अध्यक्ष नवीन यादव ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार इसपर संज्ञान नहीं लेगी तो आंदोलन उग्र होगा और बिना इस्तीफा के कोई बात नहीं होगी। शहर जाम, भारी पुलिस बल तैनात पूर्णिया की सड़कों पर उतरे महागठबंधन के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए शहर में चप्पे चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किए गए थे । इस दरमियान शहर का मुख्य सड़क घंटों जाम रहा और यातायात ठप पड़ गया। ज्ञानेश कुमार पर क्यों हो रहा है बवाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और नागरिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं शुरू हुआ है, बल्कि इसके पीछे मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के भीतर फैसलों की प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न बड़ा कानूनी व राजनीतिक विवाद है। हाल ही में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से काटे जाने की खबरें सामने आई थीं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत देश के करोड़ों योग्य मतदाताओं के वोट देने का संवैधानिक अधिकार छीना गया है और इसमें अनियमितताएं बरती गई हैं। विवाद तब और गहरा गया जब मीडिया रिपोर्ट्स और कोर्ट याचिकाओं के जरिए यह सामने आया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय निकाय में अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद एसआईआर और अन्य नीतिगत मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर एकतरफा लिए गए। मामला सुप्रीम कोर्ट में और विपक्ष की मांग हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के फैसलों पर सवाल उठाते हुए उन्हें निलंबित करने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निलंबन से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनन चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए और कोर्ट ने इस पर केंद्र व चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। महाभियोग की तैयारी विपक्ष संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने और उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी क्रम में 2 अक्टूबर से देश के विभिन्न जिलों में लोकतंत्र बचाओ मार्च और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्णिया में महागठबंधन और कई जन-संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और बर्खास्तगी की मांग की। इस मांग को लेकर हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन और आक्रोश मार्च निकाला। शहर के रंगभूमि मैदान से शुरू हुए इस मार्च में सरकार विरोधी नारे लगाए गए। बाद में आर एन शॉ चौक पर ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। रंगभूमि मैदान से आर एन शॉ चौक तक निकला आक्रोश मार्च शहर के ऐतिहासिक रंगभूमि मैदान में हज़ारों की संख्या में युवा, महागठबंधन के विभिन्न घटक दल कांग्रेस, राजद, वामदल, वीआईपी, आईआईपी के कार्यकर्ता और स्थानीय विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एकजुट हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ उग्र नारेबाजी करते हुए शहर के व्यस्त आर एन शॉ चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका शहर के आर एन शॉ चौक पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने चौक को पूरी तरह घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया और केंद्र सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाकर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई। लोकतंत्र और जनमत की हत्या बर्दाश्त नहीं कांग्रेस नेता जितेंद्र यादव का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग निष्पक्षता खो चुका है। देश भर में मतदाता सूचियों से नाम हटाने और वोट चोरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लोकतंत्र और जनमत की हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस नेताओं को डिटेन करने का विरोध सांसद पप्पू यादव की टीम में शामिल छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष कारण यादव ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और स्थानीय सांसद पप्पू यादव सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में किया गया। इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की गई और इसे तानाशाही और लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास बताया। सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी राजद के महानगर अध्यक्ष सबी अहमद ने कहा कि 1 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी विरोध का आह्वान किया गया है। यदि ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह जन-आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। राजद के युवा ज़िला अध्यक्ष नवीन यादव ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार इसपर संज्ञान नहीं लेगी तो आंदोलन उग्र होगा और बिना इस्तीफा के कोई बात नहीं होगी। शहर जाम, भारी पुलिस बल तैनात पूर्णिया की सड़कों पर उतरे महागठबंधन के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए शहर में चप्पे चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किए गए थे । इस दरमियान शहर का मुख्य सड़क घंटों जाम रहा और यातायात ठप पड़ गया। ज्ञानेश कुमार पर क्यों हो रहा है बवाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और नागरिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं शुरू हुआ है, बल्कि इसके पीछे मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के भीतर फैसलों की प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न बड़ा कानूनी व राजनीतिक विवाद है। हाल ही में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से काटे जाने की खबरें सामने आई थीं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत देश के करोड़ों योग्य मतदाताओं के वोट देने का संवैधानिक अधिकार छीना गया है और इसमें अनियमितताएं बरती गई हैं। विवाद तब और गहरा गया जब मीडिया रिपोर्ट्स और कोर्ट याचिकाओं के जरिए यह सामने आया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय निकाय में अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद एसआईआर और अन्य नीतिगत मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर एकतरफा लिए गए। मामला सुप्रीम कोर्ट में और विपक्ष की मांग हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के फैसलों पर सवाल उठाते हुए उन्हें निलंबित करने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निलंबन से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनन चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए और कोर्ट ने इस पर केंद्र व चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। महाभियोग की तैयारी विपक्ष संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने और उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी क्रम में 2 अक्टूबर से देश के विभिन्न जिलों में लोकतंत्र बचाओ मार्च और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

