गोल्डन सिटी की पहचान और पर्यटकों के प्रमुख आकर्षणों में शामिल गड़ीसर लेक इस बार बारिश की कमी और तेज गर्मी के कारण सूखने के कगार पर पहुंच गई है। झील में पानी का स्तर घटने से यहां आने वाले पर्यटक मायूस हो रहे हैं। इसका सीधा असर बोटिंग करने वाले नाव संचालकों और झील की पाल पर राजस्थानी गहने और श्रृंगार सामग्री बेचकर परिवार चलाने वाले दुकानदारों पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को वर्ष 2002-03 के सूखे जैसे हालात की याद सताने लगी है। इस स्थिति से निपटने के लिए नगर परिषद ने झील के आसपास चार ट्यूबवेल खुदवाकर पानी भरने की योजना तैयार की है, ताकि झील का आकर्षण बना रहे और स्थानीय कारोबारियों को राहत मिल सके। जहां पर्यटकों की रौनक थी, वहां अब सन्नाटा जैसलमेर शहर के एंट्री गेट के पास स्थित गड़ीसर लेक ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से खास महत्व रखती है। कभी शाम होते ही इसकी पाल पर पर्यटकों की भीड़ जुटती थी। झील में नौकायन, पानी के बीच बनी छतरियों और मंदिरों का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता था। लेकिन अब पानी कम होने से झील का स्वरूप बदल गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं होने और अक्टूबर में पड़ रही गर्मी के कारण झील का जलस्तर लगातार घटा है। झील के बीच स्थित छतरियों और मंदिरों के आसपास कई जगह पानी के बजाय सूखी जमीन नजर आ रही है। झील देखने पहुंचने वाले पर्यटकों को जब यहां अपेक्षित जलराशि नहीं मिलती, तो वे निराश होकर लौट जाते हैं। इससे गड़ीसर लेक की रौनक के साथ इससे जुड़े स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। बोटिंग बंद होने से नाव संचालकों की कमाई प्रभावित झील में बोटिंग का काम करने वाले हाजी खान बताते हैं कि उनकी रोजी-रोटी इसी व्यवसाय पर निर्भर है। पर्यटक नावों में बैठकर झील के बीच बने मंदिरों और छतरियों को निहारते थे, जिससे उनकी कमाई होती थी। लेकिन पानी कम होने से नावें किनारे पर खड़ी हैं। हाजी खान के अनुसार, झील में पर्याप्त पानी नहीं होने से बोटिंग का काम प्रभावित हुआ है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो परिवार का खर्च चलाने, बच्चों की फीस भरने और घर का राशन जुटाने में परेशानी बढ़ सकती है। गहने और सामग्री बेचने वालों का कारोबार भी ठप गड़ीसर लेक की पाल पर राजस्थानी गहने, कांच की चूड़ियां और श्रृंगार सामग्री बेचने वाली धापू भी परेशान हैं। उनका कहना है कि वे सुबह सामान लेकर दुकान लगाने पहुंचती हैं, ताकि देशी और विदेशी पर्यटकों को सामान बेचकर कमाई कर सकें। लेकिन झील में पानी नहीं होने से पर्यटक यहां ज्यादा देर नहीं रुकते। धापू के मुताबिक, पिछले कई दिनों से बिक्री बेहद कम हो गई है। पर्यटकों की संख्या और ठहराव घटने से उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। झील की बदली स्थिति ने छोटे दुकानदारों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। 2002-03 के सूखे की यादें हुईं ताजा गड़ीसर लेक की मौजूदा स्थिति ने जैसलमेर के पुराने बाशिंदों को साल 2002-03 के सूखे की याद दिला दी है। उस समय भी बारिश की कमी के कारण झील का जलस्तर काफी घट गया था और पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ था। स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को आशंका है कि यदि झील में पानी की स्थिति नहीं सुधरी, तो आगामी पर्यटन सीजन पर भी असर पड़ सकता है। जैसलमेर में सर्दियों का मौसम पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में गड़ीसर लेक का सूखना पर्यटन से जुड़े होटल व्यवसायियों, ट्रैवल एजेंटों, नाव संचालकों और छोटे दुकानदारों के लिए चिंता का विषय है। नगर परिषद चार ट्यूबवेल से पानी भरने की बना रही योजना झील की स्थिति को देखते हुए नगर परिषद ने इसके आसपास चार ट्यूबवेल खुदवाकर पानी भरने की योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य झील में पानी का स्तर बढ़ाना और पर्यटकों के आकर्षण को बनाए रखना है। योजना के क्रियान्वयन और इससे झील में कितना पानी पहुंच सकेगा, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। स्थानीय कारोबारियों को उम्मीद है कि झील में पानी बढ़ने से पर्यटकों की आवाजाही और कारोबार में सुधार होगा। गड़ीसर लेक का ऐतिहासिक महत्व गड़ीसर लेक जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। इसका निर्माण रेगिस्तानी क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से कराया गया था। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, जैसलमेर के संस्थापक महारावल जैसल के समय 12वीं शताब्दी में इस जलाशय की शुरुआत हुई थी। बाद में 14वीं शताब्दी में महारावल गड़सी सिंह ने इसका पुनर्निर्माण और विस्तार करवाया, जिसके बाद इसे गड़ीसर के नाम से जाना जाने लगा। यह झील लंबे समय तक जैसलमेर शहर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत रही। इसके आसपास बनी कलात्मक छतरियां, मंदिर और ऐतिहासिक प्रवेश द्वार ‘टीलों की पोल’ इसे खास पहचान देते हैं। आज यह जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। ऐसे में गड़ीसर लेक में पानी की कमी केवल एक ऐतिहासिक जलाशय की समस्या नहीं है, बल्कि इससे शहर के पर्यटन और स्थानीय लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। अब सबकी निगाहें नगर परिषद की योजना और झील में पानी का स्तर बढ़ने पर टिकी हैं। जैसलमेर- बारिश के आंकड़े और ऐतिहासिक स्थिति (2002 से 2026) जैसलमेर में सामान्य वार्षिक वर्षा का औसत 186 मिलीमीटर (मिमी) माना जाता है। वर्ष 2002 के अकाल के बाद 2026 में एक बार फिर मानसून की भारी बेरुखी देखी गई है। वर्ष 2002 से 2026 तक जैसलमेर की वार्षिक वर्षा का विवरण

