जींद जिले में गांव हाट के बिजली सब स्टेशन कर्मचारियों और वकील का विवाद 10 दिन बाद भी थम नहीं रहा है। जिला बार की एडहॉक कमेटी ने 25 सितंबर को वर्क सस्पेंड कर सभी न्यायिक कार्य बंद रखने का ऐलान कर दिया है। धरने पर बैठे ग्रामीणों के अल्टीमेंट का समय भी दोपहर 12 बजे खत्म हो जाएगा। जिसके बाद धरना स्थल पर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया जा सकता है। कर्मचारी यूनियन ने भी मंगलवार तक जेई को जमानत नहीं मिलने पर पैन और प्लास डाउन हड़ताल की चेतावनी दी हुई है। इससे पहले बुधवार को बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पॉवर हाउस से जुड़े दर्जनों गांवों की बिजली सप्लाई बाधित रही थी। कर्मचारी यूनियन भी हड़ताल का ऐलान कर चुकी है। जानिए कब क्या हुआ गांव हाट के पॉवर हाउस में 16 सितंबर की रात शिकायत दर्ज करवाने को लेकर वकील और कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ। वकील प्रवीण बूरा ने बिजली कर्मचारियों पर मारपीट के आरोप लगाए। सफीदों थाना पुलिस ने प्रवीण बूरा की शिकायत पर एसडीओ समेत पांच कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। वकील के साथ मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर भाकियू के समर्थन से ग्रामीणों ने पॉवर हाउस के सामने धरना शुरू कर दिया। 22 सितंबर को धरने पर बैठे ग्रामीणों ने 23 सितंबर तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर कर्मचारियों को बाहर निकालकर बिजली घर को ताला लगाने की चेतावनी दी। 23 सितंबर को पुलिस ने लाइनमैन रवि को गिरफ्तार किया। लाइनमैन की गिरफ्तारी के विरोध में बिजली कर्मचारी प्लास और पैन डाउन हड़ताल पर चले गए। दर्जनों गांवों की बिजली बाधित होने पर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सफीदों बिजली निगम के एक्सईएन मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को बिजली सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया। सुरक्षा की दृष्टि से पॉवर हाउस पर पुलिस तैनात रही। जिला बार ने वर्क सस्पेंड करने का निर्णय लिया 23 सितंबर को कर्मचारी यूनियन और सफीदों बार पदाधिकारियों के बीच बातचीत हुई। जिसमें कोई फैसला नहीं हो पाया। 24 सितंबर को किसान नेता सुरक्षा कोथ और अभिमन्यु कोहड़ धरना स्थल पर पहुंचे। धरना स्थल पर पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 25 सितंबर दोपहर तक का समय दिया। 24 सितंबर की रात जिला बार ने अधिवक्ता प्रवीण बूरा के समर्थन में 25 सितंबर को वर्क सस्पेंड रखने और न्यायिक कार्य बंद रखने का निर्णय लिया। एडहॉक कमेटी के पदाधिकारी अधिवक्ता हरिमोहन ने यह जानकारी दी। जिससे विवाद में भाकियू और कर्मचारी यूनियन के साथ जिला बार एसोसिएशन की एंट्री हो गई।

