जयपुर। सेहत बनाने के लिए जिम में पसीना बहाते हुए कोई अचानक गिर पड़े और कुछ ही देर में उसकी मौत हो जाए, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर हुआ क्या था? क्या वजह दिल की बीमारी थी या कोई दूसरा कारण? और अगर मौत हो गई, तो क्या मेडिकल जांच भी हमेशा इसकी वजह बता पाती है? इन सवालों के जवाब आसान नहीं है। 18 से 45 वर्ष के लोगों में संदिग्ध अचानक हृदय मृत्यु के मामलों पर हुए एक अध्ययन के आंकड़े इसकी गंभीरता सामने रखते हैं। अध्ययन में 35.6 फीसदी मामलों में पोस्टमार्टम के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
करीब 29 फीसदी मामलों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के साथ हार्ट अटैक सामने आया, जबकि 15 मामलों में हृदय की संरचनात्मक बीमारियां मिलीं। ये चौकाने वाले आंकड़े इंडियन हार्ट जर्नल की रिपोर्ट में शामिल है। यह अध्ययन केवल जिम में हुई युवा मौतों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि 18 से 45 वर्ष के युवाओं में संदिग्ध रूप से अचानक हृदय मृत्यु के मामलों का अध्ययन है। मेडिकल जांच की चुनौती के साथ एक दूसरा सवाल भी जुड़ा है-ऐसी घटनाओं के दौरान जान बचाने के लिए जिम कितने तैयार है?
राजस्थान में संचालित जिम की कुल संख्या और व्यायाम के दौरान होने वाली मौतों का अलग सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। डॉ. शर्मा के अनुसार, जिम सहित स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों में पंजीकरण, सुरक्षा मानक, आपातकालीन प्रशिक्षण और मौतों का पारदर्शी रिकॉर्ड जरूरी है। जब तक सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक समस्या का वास्तविक आकार सामने लाना और जवाबदेही तय करना मुश्किल रहेगा।
आए दिन सामने आ रहे हैं मामले
राजस्थान में भी जिम और व्यायाम के दौरान अचानक मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। चूरू के सरदारशहर में दो दिन पहले 49 वर्षीय सरकारी स्कूल प्रिंसिपल की ट्रेडमिल पर दौड़ते समय अबानक गिरने के बाद मौत हो गई। घटना के सीसीटीवी फुटेज सामने आए।
कोटा में बॉडी बिल्डर और भाजपा नेता की वर्कआउट के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हुई थी। बीकानेर में 17 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई। भारी वजन उठाने के प्रयास में बारबेल उनकी गर्दन पर गिर गई।
जयपुर में गत माह जिम के पहले ही दिन 35 वर्षीय युवक की मौत हो गई। वह एक्सरसाइज कर रहा था, तभी असहज महसूस करने लगा। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
इन घटनाओं में परिस्थितियां अलग-अलग थीं। हर मामले में मौत का कारण हृदय संबंधी हो, यह मान लेना सही नहीं होगा, लेकिन ये घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं।
सरकार के सामने ये 5 सवाल
1. प्रदेश में कुल कितने जिम और फिटनेस सेंटर संचालित हैं?
2. इनमें से कितने पंजीकृत हैं और उनके निरीक्षण की जिम्मेदारी किस विभाग की है?
3. जिम में हुई मौतों का अलग रिकॉर्ड किस विभाग के पास है?
4. क्या जिम में प्रशिक्षित ट्रेनर, सीपीआर प्रशिक्षण व आपातकालीन सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित है?
5. जिम में मौत होने पर जिम की भूमिका, सुरक्षा इंतजाम और संभावित लापरवाही की जांच के लिए क्या मानक तय हैं?
क्यों उलझ जाती है जांच?
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जी.एल. शर्मा के अनुसार, ईसीजी में बदलाव मिलने पर हृदय संबंधी कारणों की पहचान में मदद मिलती है। कुछ मामलों में अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाने पर इसका पता नहीं चलता। करीब 50 से 60 फीसदी मामलों में मौत का कारण हृदय संबंधी नहीं पाया गया है। ऐसे में मौत के कारणों का निर्धारण परिस्थितियों और उपलब्ध जांच पर निर्भर करता है। यानी अचानक मौत की जांच को केवल हार्ट अटैक की पुष्टि या खंडन तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

