जाखल में धान की फसल को मंडी तक पहुंचाने के लिए रेलवे द्वारा बनाए जा रहे अस्थायी रास्ते का काम निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं होने से किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। किसानों को उम्मीद थी कि 15 अक्टूबर तक काम पूरा हो जाएगा और 16 अक्टूबर तक रास्ता खोल दिया जाएगा, लेकिन काम अधूरा रहने के कारण किसानों को अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को SDM टोहाना आकाश शर्मा ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान रेलवे कर्मचारियों की ओर से काम पूरा करने के लिए पांच से सात दिन का अतिरिक्त समय मांगे जाने पर किसान भड़क गए और उन्होंने रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर की। किसानों ने कहा कि रेलवे प्रशासन बार-बार समय मांग रहा है, लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं किया जा रहा। किसानों का कहना था कि धान की फसल पककर तैयार है और किसान कटाई की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में यदि बारिश हो जाती है तो खेतों में खड़ी फसल के साथ मंडी में धान लेकर पहुंचने की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। किसानों को अपनी फसल समय पर मंडी तक पहुंचानी है, लेकिन रास्ता तैयार नहीं होने के कारण उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करने और आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। इस मौके पर किसान लाभ सिंह, नसीब सिंह, नवजोत सिंह, नानक सिंह, रसविंद्र सहित आदि उपस्थित रहे। रेलवे की समय सीमा पर किसानों ने जताई नाराजगी निरीक्षण के दौरान किसानों ने रेलवे प्रशासन के सामने अपना रोष जाहिर करते हुए कहा कि बार-बार समय दिया जा रहा है, लेकिन अधिकारी अपनी तय समय सीमा पर खरे नहीं उतर रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि धान का सीजन चल रहा है और अब वे लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते। रेलवे कर्मचारियों की ओर से पांच से सात दिन का समय मांगे जाने के बाद किसानों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई। 20 अक्टूबर तक काम पूरा करने पर सहमति बातचीत के बाद सहमति बनी कि रेलवे प्रशासन 20 अक्टूबर तक अस्थायी रास्ते का काम हर हाल में पूरा करे। किसानों ने स्पष्ट किया कि अब इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा। यदि 20 अक्टूबर तक रास्ता तैयार नहीं हुआ, तो किसान इसके बाद आंदोलन की अगली रूपरेखा तैयार करेंगे। इस सहमति के बाद अब रेलवे प्रशासन के सामने तय समय में निर्माण कार्य पूरा करने की चुनौती है। फिलहाल किसानों की नजर 20 अक्टूबर की समय सीमा पर टिकी है। यदि निर्धारित तारीख तक रास्ता नहीं खुलता है, तो जाखल में किसानों के आंदोलन को लेकर अगला कदम उठाया जा सकता है।

