जरूरत की खबर- लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है:यह सामान्य वॉक से कितनी अलग, डॉक्टर से समझें इसका साइंस, फायदे और करने का सही तरीका

जरूरत की खबर- लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है:यह सामान्य वॉक से कितनी अलग, डॉक्टर से समझें इसका साइंस, फायदे और करने का सही तरीका

सोशल मीडिया पर फिटनेस से जुड़े कई ट्रेंड पॉपुलर हैं। ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ भी इन्हीं में से एक है। इसमें नॉर्मल वॉक के साथ गहरी सांस लेने, पोश्चर सीधा रखने और हाथों को स्विंग करने पर जोर होता है। दावा है कि इस तरह चलने से शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड कम करने में मदद मिलती है। इससे सूजन और ब्लोटिंग कम होती है। साथ ही वजन घटाने में भी मदद मिलती है। लेकिन किसी भी फिटनेस ट्रेंड को अपनाने से पहले उसके दावों की सच्चाई जानना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ के हेल्थ बेनिफिट्स और इससे जुड़े दावों की सच्चाई समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- शरीर का लिम्फैटिक सिस्टम क्या है और यह क्या काम करता है? जवाब- लिम्फैटिक सिस्टम (लसीका तंत्र) बॉडी का एक ऐसा नेटवर्क है, जो बॉडी में फ्लूइड का संतुलन बनाए रखता है। साथ ही इम्यून सिस्टम को भी सपोर्ट करता है। लेकिन हार्ट की तरह इसमें फ्लूइड को आगे बढ़ाने वाला कोई एक पंप नहीं होता। ऐसे में मसल्स एक्टिविटी और सांस लेने की प्रक्रिया लिम्फ फ्लो बनाए रखने में मदद करती है। लिम्फैटिक सिस्टम के सभी काम पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- वॉकिंग और शरीर के लिम्फ फ्लो के बीच क्या संबंध है? जवाब- वॉकिंग के दौरान शरीर की मांसपेशियां लगातार सिकुड़ती और फैलती हैं। इससे लिम्फ वेसल्स पर दबाव पड़ता है और लिम्फ फ्लूइड को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही गहरी सांस लेने से सीने और पेट के अंदर प्रेशर में बदलाव होता है, जो लिम्फ फ्लो बनाए रखने में मदद करता है। सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है? जवाब- यह हल्की गति से की जाने वाली वॉक है। इसका उद्देश्य शरीर की मसल्स एक्टिविटी के जरिए लिम्फ फ्लो को सपोर्ट करना है। इसमें आरामदायक गति से चलना, गहरी और नियंत्रित सांस लेना तथा पैरों और हाथों का रेगुलर मूवमेंट शामिल है। यह वॉक शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड को लिम्फैटिक सिस्टम के जरिए आगे बढ़ाने में मदद करती है। सवाल- सामान्य और लिम्फैटिक वॉकिंग में क्या फर्क है? जवाब- इसमें मूल अंतर उद्देश्य और तरीके का है। सामान्य वॉकिंग का मुख्य उद्देश्य फिटनेस, कैलोरी बर्न और हार्ट-लंग्स को हेल्दी रखना होता है। वहीं लिम्फैटिक वॉकिंग में धीमी और आरामदायक गति के साथ गहरी सांस, हाथ-पैरों के हल्के मूवमेंट पर ध्यान दिया जाता है। सभी अंतर ग्राफिक में देखिए- सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग का सही तरीका क्या है? जवाब- इसका कोई एक वैज्ञानिक रूप से तय मानक तरीका नहीं है। इसमें नॉर्मल वॉक के साथ सांस और शरीर के हल्के मूवमेंट पर ध्यान दिया जाता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग के क्या फायदे हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- लिम्फैटिक वॉकिंग के संभावित फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग में किन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब- आमतौर पर हल्की वॉकिंग सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन कुछ लोगों को इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए- लिम्फैटिक वॉकिंग से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग वेट लॉस को कैसे सपोर्ट करती है? जवाब- यह वेट लॉस की कोई खास तकनीक नहीं है। हालांकि, रेगुलर वॉकिंग से कैलोरी बर्न होती है, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ती है और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट मिलता है। इसे संतुलित खानपान और नियमित एक्सरसाइज के साथ वेट लॉस रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। सवाल- क्या लिम्फैटिक वॉकिंग से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं? जवाब- नहीं, लिम्फैटिक वॉकिंग को शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने का तरीका नहीं मानना चाहिए। लिम्फैटिक सिस्टम अतिरिक्त फ्लूइड को ब्लडस्ट्रीम में वापस पहुंचाने और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद करता है। सवाल- क्या लिम्फैटिक वॉकिंग से सूजन या पैरों में भारीपन कम हो सकता है? जवाब- हां, हल्की वॉकिंग से पैरों की मसल्स एक्टिव होती हैं, जिससे ब्लड और लिम्फ फ्लो को सपोर्ट मिलता है। लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले हल्के भारीपन या असहजता में इससे राहत मिलती है। हालांकि, लगातार या ज्यादा सूजन होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सवाल- क्या लिम्फैटिक वॉकिंग के लिए कोई खास जूते, कपड़े या उपकरण की जरूरत होती है? जवाब- नहीं, इसके लिए किसी खास जूते, कपड़े या उपकरण की जरूरत नहीं होती। आरामदायक कपड़े और अच्छी फिटिंग वाले जूते पर्याप्त हैं। सवाल- लिम्फैटिक वॉकिंग कब और कितनी देर करनी चाहिए? जवाब- इसे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय कर सकते हैं। शुरुआत 10-15 मिनट से करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। नियमित रूप से चलना ज्यादा जरूरी है। सवाल- क्या इसे सुबह खाली पेट करना जरूरी है? जवाब- नहीं, इसे अपनी सुविधा और शरीर की सहनशीलता के अनुसार किसी भी समय किया जा सकता है। ************* ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मुफ्त की धूप के 7 हेल्थ बेनिफिट्स: उम्र बढ़ेगी, बुढ़ापा देर से आएगा, डॉक्टर से समझें मॉर्निंग सनलाइट के 7 रूल्स हममें से ज्यादातर लोग सुबह आंख खुलते ही सनलाइट की बजाय मोबाइल स्क्रीन देखते हैं। दिन की शुरुआत नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया से होती है। जबकि सुबह की धूप बॉडी क्लॉक को सेट करने और शरीर को पूरे दिन के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है। पूरी खबर पढ़िए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *