40 फीट ऊंची रस्सी पर 120 फीट तक लटके युवक, बारिश में गनपत ने फोड़ी मटकी जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर कुआंखेड़ा गांव में जन्माष्टमी पर अनूठी मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। यहां 20 फीट गहरे तालाब के बीचोंबीच 40 फीट ऊंचाई पर बंधी दही हांडी को फोड़ने के प्रयास में 199 लोग गिरे। आखिर में ग्राम सुंदरादेही के गनपत सिंह ने चेलेंज पूरा किया और मटकी फोड़कर 5100 रुपए का पुरस्कार जीता। ग्रामीणों ने भी स्वेच्छा से राशि देकर सम्मानित किया। प्रतियोगिता शुक्रवार दिन में आयोजित की गई, जो शाम तक चली। इस दौरान गांव और आसपास के गांव के युवक मटकी फोड़ने पहुंचे। सभी टीम के सदस्यों ने अपना-अपना दम दिखाया पर तेजी से हिलती हुई रस्सी के कारण 199 लोग मटकी तक नहीं पहुंच सके। कोई कम पानी में गिरा तो कोई ज्यादा पानी में। पहले तो रस्सी तेजी से हिल रही थी, फिर बारिश भी हो रही थी। इसलिए प्रतियोगियों के हाथ रस्सी पर ज्यादा देर नहीं थम पाए। 50 फीट पर बांधी जाती है मटकी गांव में करीब 100 फीट का तालाब है। उसके दोनों ओर बढ़ के पेड़ हैं। दोनों पेड़ पर 40 फीट ऊंचाई पर रस्सी बांधी जाती है और रस्सी के बीचोंबीच मटकी। जिसमें दही भरा जाता है। प्रतियोगी को पेड़ पर चढ़कर रस्सी पर लटकते हुए मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ना होता है। जैसे ही प्रतिभागी रस्सी पर पहुंचता है, दोनों और से ग्रामीण रस्सी को हिलाना शुरू कर देते हैं। जिससे प्रतियोगी की पकड़ ढीली पड़ने लगती है और मटकी तक पहुंचने से पहले वह गिर जाता है। 10 साल पहले युवाओं ने शुरू की थी परंपरा कुआंखेड़ा में यह प्रतियोगिता करीब 10 साल पहले गांव के कुछ युवाओं ने शुरू की थी। जन्माष्टमी के दिन होने वाली इस प्रतियोगिता की जिम्मेदारी अब भी गांव के युवा ही संभालते हैं। हर साल इसमें प्रतिभागियों और दर्शकों की संख्या बढ़ रही है। आसपास के गांवों से भी लोग प्रतियोगिता देखने पहुंचते हैं। कई बार प्रतियोगिता दो से तीन दिन तक चलती है। 5100 से 11 हजार रुपए तक इनाम शक्तिमाई सेवा समिति के सदस्य और आयोजक अभिषेक कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए किसी तरह की फीस नहीं ली जाती। विजेता को गांव और समिति की ओर से 5100 से 11 हजार रुपए तक का इनाम दिया जाता है। इसके अलावा ग्रामीण भी अलग से पुरस्कार देते हैं। नशे से दूर रहने का संदेश अभिषेक ने बताया कि आज के युवा मोबाइल पर रील देखने में ज्यादा समय बिताते हैं। इसी वजह से युवाओं के लिए यह आयोजन किया जाता है। प्रतियोगिता के जरिए नशे से दूर रहने और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने का संदेश भी दिया जाता है। कई स्वस्थ युवा भी मटकी तक पहुंचने का प्रयास करते हैं, लेकिन बीच में तालाब में गिर जाते हैं। तैरना आता है तभी मटकी फोड़ने की इजाजत अभिषेक ने बताया कि तालाब काफी गहरा होने के कारण प्रतियोगिता में उतरने से पहले प्रतिभागी से पूछा जाता है कि उसे तैरना आता है या नहीं। शराब या किसी अन्य नशे की हालत में किसी व्यक्ति को मटकी फोड़ने की अनुमति नहीं दी जाती।

