मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में हैं। गयाजी में शुक्रवार को बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने महिला चिकित्सा केंद्र प्रभावती अस्पताल का निरीक्षण किया। अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की जमीनी हकीकत जानी। साथ ही सुरक्षा मानकों की समीक्षा की। खुद एक-एक वार्ड का दौरा किया। फायर उपकरणों के ‘प्रेशर गेज’ और एक्सपायरी डेट तक की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुजफ्फरपुर की घटना बेहद दुखद थी। सरकार ऐसी पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि सरकारी हो या निजी, सभी अस्पतालों की प्रदेश सरकार सुरक्षा ऑडिट करा रही है। प्रभावती अस्पताल के इंतजाम संतोषजनक हैं। लेकिन सतर्कता में कमी नहीं आनी चाहिए। जहां भी मामूली कमियां भी पाई जाएंगी। उन्हें तुरंत दुरुस्त करने का सख्त आदेश दिया गया है। जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। रोजना 100 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं धार्मिक नगरी स्थित प्रभावती अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक महिला मरीज और प्रसूताएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। प्रसूति, स्त्री रोग और नवजात शिशुओं (NICU) के इलाज के लिए इस चार मंजिला आधुनिक भवन के सभी वार्ड पूरी तरह वातानुकूलित हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव जैसी किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि इस पूरे परिसर को आधुनिकतम फायर सेफ्टी सिस्टम से लैस किया गया है। ‘धुआं उठते ही सक्रिय होगा सिस्टम’ अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के जिन इंतजामों का दावा किया है, वे बेहद आधुनिक और भरोसेमंद नजर आते हैं। जानकारी के अनुसार, पूरे चार मंजिला भवन में पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र, हर फ्लोर और संवेदनशील वार्डों के बाहर पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। कॉरिडोर से लेकर वार्डों तक सेंसर लगाए गए हैं, जो मामूली धुआं या असामान्य तापमान को तुरंत भांप लेते हैं। स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है सीनियर डॉक्टर डॉ. शकुंतला कुमारी वर्मा ने बताया कि चारों मंजिलों पर अलग-अलग जोन बनाकर अग्निशमन उपकरण स्थापित किए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि केवल उपकरण ही नहीं लगाए गए हैं, बल्कि अस्पताल के पैरा मेडिकल स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों, नर्सों को आपदा प्रबंधन और मॉक ड्रिल के जरिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बिना घबराए मरीजों को सुरक्षित निकाला जा सके। मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में हैं। गयाजी में शुक्रवार को बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने महिला चिकित्सा केंद्र प्रभावती अस्पताल का निरीक्षण किया। अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की जमीनी हकीकत जानी। साथ ही सुरक्षा मानकों की समीक्षा की। खुद एक-एक वार्ड का दौरा किया। फायर उपकरणों के ‘प्रेशर गेज’ और एक्सपायरी डेट तक की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुजफ्फरपुर की घटना बेहद दुखद थी। सरकार ऐसी पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि सरकारी हो या निजी, सभी अस्पतालों की प्रदेश सरकार सुरक्षा ऑडिट करा रही है। प्रभावती अस्पताल के इंतजाम संतोषजनक हैं। लेकिन सतर्कता में कमी नहीं आनी चाहिए। जहां भी मामूली कमियां भी पाई जाएंगी। उन्हें तुरंत दुरुस्त करने का सख्त आदेश दिया गया है। जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। रोजना 100 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं धार्मिक नगरी स्थित प्रभावती अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक महिला मरीज और प्रसूताएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। प्रसूति, स्त्री रोग और नवजात शिशुओं (NICU) के इलाज के लिए इस चार मंजिला आधुनिक भवन के सभी वार्ड पूरी तरह वातानुकूलित हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव जैसी किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि इस पूरे परिसर को आधुनिकतम फायर सेफ्टी सिस्टम से लैस किया गया है। ‘धुआं उठते ही सक्रिय होगा सिस्टम’ अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के जिन इंतजामों का दावा किया है, वे बेहद आधुनिक और भरोसेमंद नजर आते हैं। जानकारी के अनुसार, पूरे चार मंजिला भवन में पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र, हर फ्लोर और संवेदनशील वार्डों के बाहर पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। कॉरिडोर से लेकर वार्डों तक सेंसर लगाए गए हैं, जो मामूली धुआं या असामान्य तापमान को तुरंत भांप लेते हैं। स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है सीनियर डॉक्टर डॉ. शकुंतला कुमारी वर्मा ने बताया कि चारों मंजिलों पर अलग-अलग जोन बनाकर अग्निशमन उपकरण स्थापित किए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि केवल उपकरण ही नहीं लगाए गए हैं, बल्कि अस्पताल के पैरा मेडिकल स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों, नर्सों को आपदा प्रबंधन और मॉक ड्रिल के जरिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बिना घबराए मरीजों को सुरक्षित निकाला जा सके।


