नगर पंचायत जगदीशपुर के चौरास्ता स्थित सवारथ साहु ठाकुरबाड़ी और सदर बाजार महावीर मंदिर में सोमवार को चौथ माता का व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कृष्ण पक्ष की तृतीया के अवसर पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं नए परिधानों में सजकर मंदिरों में पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से चौथ माता की पूजा-अर्चना की। उन्होंने समूह में बैठकर व्रत की कथा सुनी और अपने परिवार में सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। चौथ पर्व को सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चौथ माता की पूजा और व्रत करने से पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं दिनभर श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं और शाम को पूजा-अर्चना कर व्रत कथा सुनती हैं। इस पर्व पर माता से परिवार की रक्षा और संतान के उज्ज्वल भविष्य की भी कामना की जाती है। सुबह से ही मंदिरों में महिलाओं का आना शुरू हो गया था। वे भजन-कीर्तन करती हुई मंदिर पहुंचीं और चौथ माता को विभिन्न प्रकार के नैवेद्य व पकवान अर्पित किए। मंदिर परिसर में महिलाओं ने समूह में बैठकर बुजुर्ग महिलाओं से चौथ माता की कथा सुनी। कथा समाप्त होने के बाद उन्होंने सूर्यदेव को जल अर्पित किया और बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण चौथ माता के जयकारों एवं भक्ति गीतों से गूंजता रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और माता से अखंड सुहाग, पति की लंबी आयु तथा घर-परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की। इस अवसर पर कई घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए। पूजा के बाद माता को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया गया। रात में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद सुहागिन महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपना व्रत खोला। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति और परिवार की मंगलकामना करते हुए चंद्रदेव से सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मांगा। चौथ पर्व ने एक बार फिर जगदीशपुर में पारंपरिक धार्मिक आस्था, पारिवारिक संस्कार और महिलाओं की श्रद्धा का सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया। नगर पंचायत जगदीशपुर के चौरास्ता स्थित सवारथ साहु ठाकुरबाड़ी और सदर बाजार महावीर मंदिर में सोमवार को चौथ माता का व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कृष्ण पक्ष की तृतीया के अवसर पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं नए परिधानों में सजकर मंदिरों में पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से चौथ माता की पूजा-अर्चना की। उन्होंने समूह में बैठकर व्रत की कथा सुनी और अपने परिवार में सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। चौथ पर्व को सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चौथ माता की पूजा और व्रत करने से पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं दिनभर श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं और शाम को पूजा-अर्चना कर व्रत कथा सुनती हैं। इस पर्व पर माता से परिवार की रक्षा और संतान के उज्ज्वल भविष्य की भी कामना की जाती है। सुबह से ही मंदिरों में महिलाओं का आना शुरू हो गया था। वे भजन-कीर्तन करती हुई मंदिर पहुंचीं और चौथ माता को विभिन्न प्रकार के नैवेद्य व पकवान अर्पित किए। मंदिर परिसर में महिलाओं ने समूह में बैठकर बुजुर्ग महिलाओं से चौथ माता की कथा सुनी। कथा समाप्त होने के बाद उन्होंने सूर्यदेव को जल अर्पित किया और बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण चौथ माता के जयकारों एवं भक्ति गीतों से गूंजता रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और माता से अखंड सुहाग, पति की लंबी आयु तथा घर-परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की। इस अवसर पर कई घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए। पूजा के बाद माता को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया गया। रात में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद सुहागिन महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपना व्रत खोला। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति और परिवार की मंगलकामना करते हुए चंद्रदेव से सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मांगा। चौथ पर्व ने एक बार फिर जगदीशपुर में पारंपरिक धार्मिक आस्था, पारिवारिक संस्कार और महिलाओं की श्रद्धा का सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया।

