दशहरा और दिवाली पर किसी तरह धक्के खाकर घर पहुंचे परदेसियों की चिंता अब काम पर लौटने को लेकर बढ़ गई है। छठ महापर्व के समापन के बाद कार्यक्षेत्र पर लौटने के लिए ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना नामुमकिन साबित हो रहा है। पर्व खत्म होते ही 17 नवंबर से लेकर अगले एक सप्ताह तक दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब जाने वाली सभी नियमित ट्रेनों में सीटें पूरी तरह फुल हो चुकी हैं। वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि टिकट कन्फर्म होने की गुंजाइश न के बराबर है। नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट 16 नवंबर को छठ के सुबह के अर्घ्य (पारण) के बाद 17 नवंबर से वापसी की मारामारी शुरू हो जाएगी। राजगीर से नई दिल्ली जाने वाली 12391 श्रमजीवी एक्सप्रेस में 17 नवंबर से स्लीपर और थर्ड एसी में वेटिंग 100 के पार पहुंच चुकी है, जबकि 16 नवंबर से पहले इसी ट्रेन में वेटिंग 10 से कम थी। यही स्थिति इस्लामपुर से खुलने वाली मगध एक्सप्रेस, अहमदाबाद जाने वाली अजीमाबाद एक्सप्रेस और मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस की है। इन सभी प्रमुख ट्रेनों में 17 से 22 नवंबर के बीच ‘नो रूम’ और भारी वेटिंग की स्थिति बन चुकी है। आसमान छू रहा हवाई किराया ट्रेनों में जगह न मिलने का फायदा विमानन कंपनियां जमकर उठा रही हैं। आम दिनों में पटना से दिल्ली का हवाई किराया 4,000 से 7,000 रुपये के बीच रहता है, जो 16 से 20 नवंबर के दौरान बढ़कर 9,000 से 15,000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, मुंबई का किराया आम दिनों के मुकाबले तीन गुना तक महंगा होकर 17,000 से 30,000 रुपये के पार बिक रहा है। 20 नवंबर के बाद ही हवाई किराये में कुछ नरमी आने के आसार हैं। स्पेशल ट्रेनें बन सकती हैं सहारा यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने राहत के तौर पर कई पूजा स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इनमें 17 से 22 नवंबर तक पाटलिपुत्र-आनंद विहार स्पेशल, 26 नवंबर तक पटना-नई दिल्ली वंदे भारत स्पेशल और पटना-नई दिल्ली अनारक्षित/आरक्षित स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि नियमित ट्रेनों में सीट न मिलने पर यात्री इन स्पेशल ट्रेनों के आरक्षित कोचों में तुरंत टिकट बुक कराएं, क्योंकि इनमें अभी कुछ सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा तत्काल टिकट ही यात्रियों के पास अंतिम विकल्प बचा है। दशहरा और दिवाली पर किसी तरह धक्के खाकर घर पहुंचे परदेसियों की चिंता अब काम पर लौटने को लेकर बढ़ गई है। छठ महापर्व के समापन के बाद कार्यक्षेत्र पर लौटने के लिए ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना नामुमकिन साबित हो रहा है। पर्व खत्म होते ही 17 नवंबर से लेकर अगले एक सप्ताह तक दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब जाने वाली सभी नियमित ट्रेनों में सीटें पूरी तरह फुल हो चुकी हैं। वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि टिकट कन्फर्म होने की गुंजाइश न के बराबर है। नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट 16 नवंबर को छठ के सुबह के अर्घ्य (पारण) के बाद 17 नवंबर से वापसी की मारामारी शुरू हो जाएगी। राजगीर से नई दिल्ली जाने वाली 12391 श्रमजीवी एक्सप्रेस में 17 नवंबर से स्लीपर और थर्ड एसी में वेटिंग 100 के पार पहुंच चुकी है, जबकि 16 नवंबर से पहले इसी ट्रेन में वेटिंग 10 से कम थी। यही स्थिति इस्लामपुर से खुलने वाली मगध एक्सप्रेस, अहमदाबाद जाने वाली अजीमाबाद एक्सप्रेस और मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस की है। इन सभी प्रमुख ट्रेनों में 17 से 22 नवंबर के बीच ‘नो रूम’ और भारी वेटिंग की स्थिति बन चुकी है। आसमान छू रहा हवाई किराया ट्रेनों में जगह न मिलने का फायदा विमानन कंपनियां जमकर उठा रही हैं। आम दिनों में पटना से दिल्ली का हवाई किराया 4,000 से 7,000 रुपये के बीच रहता है, जो 16 से 20 नवंबर के दौरान बढ़कर 9,000 से 15,000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, मुंबई का किराया आम दिनों के मुकाबले तीन गुना तक महंगा होकर 17,000 से 30,000 रुपये के पार बिक रहा है। 20 नवंबर के बाद ही हवाई किराये में कुछ नरमी आने के आसार हैं। स्पेशल ट्रेनें बन सकती हैं सहारा यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने राहत के तौर पर कई पूजा स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इनमें 17 से 22 नवंबर तक पाटलिपुत्र-आनंद विहार स्पेशल, 26 नवंबर तक पटना-नई दिल्ली वंदे भारत स्पेशल और पटना-नई दिल्ली अनारक्षित/आरक्षित स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि नियमित ट्रेनों में सीट न मिलने पर यात्री इन स्पेशल ट्रेनों के आरक्षित कोचों में तुरंत टिकट बुक कराएं, क्योंकि इनमें अभी कुछ सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा तत्काल टिकट ही यात्रियों के पास अंतिम विकल्प बचा है।

