पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों की 10 सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की ओर से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शनिवार को छठे दिन खत्म हो गई। AISF के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन में बात के लिए बुलाया गया था। राज्यपाल के मुख्य सचिव के समक्ष प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की 10 सूत्री मांगें रखीं। मुख्य सचिव ने मांगों पर बिंदुवार सहमति जताते हुए उन्हें जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। राजभवन ने छात्रों की मांगों पर जल्द कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया है। जूस पिलाकर समाप्त कराया गया अनशन राजभवन में वार्ता के बाद AISF का प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचा। यहां आंदोलनरत छात्रों और समर्थकों की मौजूदगी में पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. नवल किशोर चौधरी, सेफाली राय, अनीश कुमार, निखिल झा, पटना विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. शालिनी और प्रो. मनोज सहित अन्य लोगों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं बिट्टू भारद्वाज, किशलय और प्रिंस राज को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस मौके पर प्रो. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि कभी पटना विश्वविद्यालय को गर्व की नजर से देखा जाता था, लेकिन आज छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुलपति को संवेदनशीलता के साथ छात्रों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करना चाहिए। पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेता प्रो. शिवशंकर ने भी छात्रों की दस सूत्री मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन मांगों का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर ही किया जा सकता था, लेकिन छात्रों से बातचीत तक नहीं की गई। आंदोलन जारी रखने की चेतावनी AISF के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से आंदोलन को सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि भविष्य में छात्रों की समस्याओं को लेकर बातचीत की मांग उठेगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी बात सुननी होगी। भूख हड़ताल पर बैठे बिट्टू भारद्वाज, प्रिंस राज और किशलय ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर AISF का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय को बचाने के लिए संगठन हर स्तर पर आंदोलन करेगा। AISF ने स्पष्ट किया कि राजभवन के आश्वासन के बावजूद छात्रों की समस्याओं के समाधान और विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा। पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों की 10 सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की ओर से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शनिवार को छठे दिन खत्म हो गई। AISF के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन में बात के लिए बुलाया गया था। राज्यपाल के मुख्य सचिव के समक्ष प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की 10 सूत्री मांगें रखीं। मुख्य सचिव ने मांगों पर बिंदुवार सहमति जताते हुए उन्हें जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। राजभवन ने छात्रों की मांगों पर जल्द कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया है। जूस पिलाकर समाप्त कराया गया अनशन राजभवन में वार्ता के बाद AISF का प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचा। यहां आंदोलनरत छात्रों और समर्थकों की मौजूदगी में पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. नवल किशोर चौधरी, सेफाली राय, अनीश कुमार, निखिल झा, पटना विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. शालिनी और प्रो. मनोज सहित अन्य लोगों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं बिट्टू भारद्वाज, किशलय और प्रिंस राज को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस मौके पर प्रो. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि कभी पटना विश्वविद्यालय को गर्व की नजर से देखा जाता था, लेकिन आज छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुलपति को संवेदनशीलता के साथ छात्रों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करना चाहिए। पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेता प्रो. शिवशंकर ने भी छात्रों की दस सूत्री मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन मांगों का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर ही किया जा सकता था, लेकिन छात्रों से बातचीत तक नहीं की गई। आंदोलन जारी रखने की चेतावनी AISF के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से आंदोलन को सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि भविष्य में छात्रों की समस्याओं को लेकर बातचीत की मांग उठेगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी बात सुननी होगी। भूख हड़ताल पर बैठे बिट्टू भारद्वाज, प्रिंस राज और किशलय ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर AISF का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय को बचाने के लिए संगठन हर स्तर पर आंदोलन करेगा। AISF ने स्पष्ट किया कि राजभवन के आश्वासन के बावजूद छात्रों की समस्याओं के समाधान और विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा।

