सीतामढ़ी पहुंचे जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बिहार चुनाव का मुद्दा उठाया। दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में चुनाव से ठीक दो दिन पहले तक लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए गए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “जब चुनाव से दो दिन पहले ही 10-10 हजार रुपये दे दिए जाएंगे, तो फिर क्यों करेंगे कोई काम?” प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि जनता के पैसे का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित किया गया। मतगणना की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नहीं है, बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था से जुड़ा है। मतदाता सूची तैयार करने, फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में बदलाव, SIR के तहत नाम हटाने, चुनाव की तारीखों, आचार संहिता और मतगणना की प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए। ‘चुनाव आयोग में व्यापक और पारदर्शी सुधार जरूरी’ प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि इन प्रक्रियाओं में चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि वे सत्ताधारी दल की मदद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में डेढ़ करोड़ से अधिक वोट खरीदे गए और इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए चुनाव आयोग में व्यापक और पारदर्शी सुधार जरूरी हैं। जनसुराज पार्टी भी इस मांग के समर्थन में है। सीतामढ़ी पहुंचे जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बिहार चुनाव का मुद्दा उठाया। दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में चुनाव से ठीक दो दिन पहले तक लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए गए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “जब चुनाव से दो दिन पहले ही 10-10 हजार रुपये दे दिए जाएंगे, तो फिर क्यों करेंगे कोई काम?” प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि जनता के पैसे का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित किया गया। मतगणना की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नहीं है, बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था से जुड़ा है। मतदाता सूची तैयार करने, फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में बदलाव, SIR के तहत नाम हटाने, चुनाव की तारीखों, आचार संहिता और मतगणना की प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए। ‘चुनाव आयोग में व्यापक और पारदर्शी सुधार जरूरी’ प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि इन प्रक्रियाओं में चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि वे सत्ताधारी दल की मदद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में डेढ़ करोड़ से अधिक वोट खरीदे गए और इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए चुनाव आयोग में व्यापक और पारदर्शी सुधार जरूरी हैं। जनसुराज पार्टी भी इस मांग के समर्थन में है।

