चुनाव से पहले पंजाब में प्रिंटिंग-पैकेजिंग महंगी:OPA ने 15-20% तक बढ़ाए रेट, कागज,पल्प,इंक,केमिकल और लैमिनेशन फिल्म की कीमत बढ़ने का असर

चुनाव से पहले पंजाब में प्रिंटिंग-पैकेजिंग महंगी:OPA ने 15-20% तक बढ़ाए रेट, कागज,पल्प,इंक,केमिकल और लैमिनेशन फिल्म की कीमत बढ़ने का असर

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले प्रिंटिंग और पैकेजिंग से जुड़े उत्पादों की कीमतें बढ़ने जा रही हैं। पंजाब और पड़ोसी राज्यों की सैकड़ों प्रिंटिंग, पैकेजिंग और बाइंडिंग यूनिट्स का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन (OPA) ने कच्चे माल की बढ़ती लागत को देखते हुए अपने उत्पादों और सेवाओं के रेट तत्काल प्रभाव से 15 से 20% तक बढ़ाने का फैसला किया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ समय में प्रिंटिंग इंडस्ट्री की कुल इनपुट कॉस्ट में करीब 30 से 40% तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर खासतौर पर MSME यूनिट्स पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण फ्रेट रेट बढ़ने, सप्लाई चेन प्रभावित होने और पेट्रोकेमिकल से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी लागत बढ़ा दी है। पोस्टर-बैनर और फ्लेक भी होंगे महंगे OPA के महासचिव कमल चोपड़ा ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के दौरान पोस्टर, बैनर और फ्लेक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही तो इनकी प्रिंटिंग भी महंगी होगी। उन्होंने बताया कि हाल के सप्ताहों में फिनिश्ड पेपर की कीमत 2 से 6 रुपए प्रति किलो बढ़ी है। वहीं क्राफ्ट पेपर और डुप्लेक्स बोर्ड के रेट में 4 से 6 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इससे कॉरुगेटेड बॉक्स और कार्टन की लागत पहले ही 10% से ज्यादा बढ़ चुकी है। पल्प से लेकर इंक और केमिकल तक महंगे इंडस्ट्री के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों के दौरान हार्डवुड पल्प की कीमत में 20 से 25% तक बढ़ोतरी हुई। प्रमुख पेपर मिलों ने राइटिंग और प्रिंटिंग ग्रेड के पेपर में भी 2,000 से 3,000 रुपए प्रति मीट्रिक टन तक और बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके अलावा केमिकल, इंक, एडहेसिव और लैमिनेशन फिल्म की कीमतें भी बढ़ी हैं। कमल चोपड़ा के अनुसार लैमिनेशन फिल्म काफी हद तक पॉलिमर आधारित होती है और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़ी होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर इस पर पड़ता है। इंपोर्टेड वेस्टपेपर, कोयले और ऊर्जा की बढ़ती लागत ने भी निर्माताओं पर दबाव बढ़ाया है। ‘मुनाफे के लिए नहीं, इंडस्ट्री के अस्तित्व के लिए फैसला’ OPA अध्यक्ष परवीन अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्री लंबे समय से लगातार बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाती आ रही है। प्रिंटिंग सेक्टर FMCG, फार्मास्यूटिकल्स, ई-कॉमर्स और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों को सेवाएं देता है। उन्होंने कहा कि रेट बढ़ाने का फैसला ‘मुनाफे के बजाय अस्तित्व’ को ध्यान में रखकर लिया गया है। इसका उद्देश्य हजारों MSME यूनिट्स और उनसे जुड़े लोगों की रोजी-रोटी को सुरक्षित रखना है। OPA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कुशल कुमार जैन ने कहा कि अब एसोसिएशन के सदस्य नए ऑर्डर संशोधित रेट पर ही स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि OPA हमेशा नैतिक कारोबारी प्रथाओं को बढ़ावा देती रही है और बढ़ती लागत के बीच यह फैसला इंडस्ट्री के भविष्य और ग्राहकों को लगातार बेहतर सेवा देने के लिए लिया गया है।

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