चक्रवात की आहट: Odisha के 6 जिलों में पर्यटन स्थलों पर लगा प्रतिबंध

चक्रवात की आहट: Odisha के 6 जिलों में पर्यटन स्थलों पर लगा प्रतिबंध

ओडिशा सरकार ने चक्रवाती तूफान के मद्देनजर समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी है और छह जिलों में पहाड़ियों, झरनों तथा बांधों पर पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान के अगले 48 घंटों में पड़ोसी आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने की आशंका है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने दक्षिणी क्षेत्र के संवेदनशील जिलों गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, मलकानगिरि, कोरापुट और नबरंगपुर में संसाधनों को सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात से पहले की तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं तथा पुलिस के बचाव दलों को संवेदनशील इलाकों में पहले से तैनात किया गया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार सुबह जारी बुलेटिन में बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव पिछले छह घंटों में 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगभग पश्चिम की ओर बढ़ा और चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके 26 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर को अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है। विभाग के अनुसार, तूफान के बुधवार को आंध्र प्रदेश के तट पर आने की संभावना है।

ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि भले ही तूफान के आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने का अनुमान है, लेकिन ओडिशा सरकार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि तट से टकराने के बाद मौसम प्रणाली के ओडिशा के कुछ इलाकों की ओर बढ़ने का अनुमान है। मंत्री ने बताया कि खराब मौसम की आशंका के कारण छह संवेदनशील जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

इन जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय के लिए नियंत्रण कक्ष खोले गए हैं। कृषि विभाग ने किसानों को 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित रखने की सलाह दी है। किसानों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किए गए हैं।

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