गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर 15 फीट लंबे गड्ढे:पैचवर्क भी बारिश में उखड़ा; 100 किमी की रफ्तार से गाड़ी चलाना मुश्किल

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर 15 फीट लंबे गड्ढे:पैचवर्क भी बारिश में उखड़ा; 100 किमी की रफ्तार से गाड़ी चलाना मुश्किल

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को गोरखपुर से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेस-वे खस्ताहाल हो चुका है। 91 किमी लंबे लिंक एक्सप्रेस-वे की 45 किमी सड़क में 74 जगहों पर गड्ढे हो चुके हैं। ये कहीं 10 से 15 फीट लंबे, तो कहीं आधे फीट गहरे हैं। कई जगह पर रोड बीच से फट गई है। एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी ने इन गड्ढों में गिट्टियां भरी हैं, लेकिन वह भी रोड पर दूर तक फैली नजर आती हैं। जहां-जहां पैच वर्क उखड़ा, वहां दोबारा गहरे गड्ढे हो चुके हैं। यह आपके ‘सुकून भरे सफर’ के अनुभव को खराब करता है। 100 किमी की रफ्तार बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा नहीं है कि एक्सप्रेस-वे जल्दबाजी में तैयार किया गया था। ये 5 साल में बनकर तैयार हुआ। सिर्फ 4 लेन का है। इसको बनाने में 7,283 करोड़ रुपए खर्च हुए। मतलब हर एक किमी को तैयार करने में औसतन 80 करोड़ रुपए लगे। इसमें जमीन अधिग्रहण की लागत भी जुड़ी है। एक्सप्रेस-वे के हालात सिलसिलेवार जानिए… लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सफर करते हुए हम गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर पहुंचे। करीब 3 किमी बाद टोल बूथ से आगे बढ़ते ही रोड पर ताजे पैचवर्क दिखने लगे। कई जगहों पर पैचवर्क 50 से 100 मीटर लंबा था। रफ्तार से गाड़ी लाने पर गड्ढों में उछल जा रही थी। हमारी कार जोगीपुर, बनवारीपट्टी और चंद्रभानपुर होते हुए करीब 10 किमी आगे बढ़ी। इस दौरान हमें 20 और जगहों पर रोड टूटी मिली। इनकी मरम्मत की कोशिश हुई थी, लेकिन गिट्टियां गाड़ियों के टायरों के साथ रोड पर दूर तक फैल गई थीं। हमारे सामने से गुजर रही कई गाड़ियां इन गड्ढों से बचते हुए सफर कर रही थी। कटोही, शेखपुरा के करीब एक्सप्रेस-वे बीचों-बीच टूट गया था। थोड़ा आगे बढ़ने पर बड़हलगंज में हमें काफी दूर तक रोड बीच-बीच में टूटी नजर आई। यहां उतरकर हमने गड्ढे गिने, ये करीब 20 थे। रोड बीच में फट गई थी। यहां आधा फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा हो गया है। इसकी चौड़ाई 10 फीट से ज्यादा है। यह सिर्फ एक ही जगह नहीं था, बल्कि 100 मीटर के एरिया में 4 जगहों पर ऐसे ही गड्ढे हो गए हैं। देखकर ऐसा लगा कि कुछ दिन पहले ही इन्हें भरा गया था। लेकिन, गिट्टी-डामर अब गड्ढे से निकलकर सड़क पर इकट्ठा होकर ठोकर जैसे बन गए हैं। मतलब, बीच सड़क पर एक तरफ गड्ढा है और दूसरी तरफ गड्ढे से ठीक बगल 1-1 फीट की ठोकर बन गई है। इसी जगह पर सड़क धंस गई है। बीच में नाली बन गई है। बारिश होने पर वह पानी किनारे न जाकर उसी जगह जमा हो जा रहा है। इससे सड़क और खराब होती जा रही है। हालांकि, इसके बाद करीब 25 किमी तक सड़क ठीक मिली। रियलिटी चेक में सड़क बुरी तरह टूटी मिली सफर करने वाले बोले- ये लखनऊ के किसान पथ जैसा भी नहीं एक्सप्रेस-वे पर चलते हुए टोल प्लाजा पर हमारी मुलाकात बाराबंकी के पंकज वर्मा से हुई। पंकज कहते हैं- पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे या फिर आगरा एक्सप्रेस-वे जैसा यह नहीं है। मैं तो कहना चाहूंगा कि ये लखनऊ के किसान पथ जैसा भी नहीं है। इस पर बहुत गड्ढे हैं। पंकज जैसे कुछ अन्य लोग भी कहते हैं कि इस एक्सप्रेस-वे पर सफर करना आसान नहीं है। आप 100 किमी की रफ्तार से कार दौड़ा रहे हैं। फिर अचानक गड्ढे आ जाते हैं और कई बार गाड़ी बेकाबू हो जाती है। लखनऊ लौटते हुए 22 जगह रोड टूटी मिली पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से गोरखपुर तक 91 किमी के सफर के बाद हम लखनऊ की तरफ लौट चले। अब सड़क के दूसरे हिस्से को देखना था। शुरुआत के करीब 30 किमी की सड़क अच्छी नजर आई। अब हम 50 किमी तक पहुंचे। एक्सप्रेस-वे पर दोबारा गड्ढे नजर आने लगे। कुकरीपुर, बोराजपुर और दहिया बुजुर्ग गांव के पास की सड़क उखड़ी हुई थी। लौटने के दौरान पूरे सफर में हमें 22 गड्ढे मिले। DBL कंपनी का कंस्ट्रक्शन ज्यादा खराब लिंक एक्सप्रेस-वे के सफर में हमें कुल 74 जगह पर रोड टूटी हुई मिली। इनमें कई जगह पर पैचवर्क होकर उखड़ चुका था। कई जगह पर पैचवर्क किया ही नहीं गया था। इनमें छोटे गड्ढों को हमने शामिल ही नहीं किया है। इस एक्सप्रेस-वे के उखड़ने के साथ ही इसको बनाने वाली कंपनी की चर्चा शुरू हो चुकी है। इसे 2 फेज में दो अलग-अलग कंपनियों ने बनाया है। ग्राउंड जीरो पर हमें APCO इंफ्राटेक का काम DBL के मुकाबले अच्छा नजर आया। मतलब, DBL की बनाई हुई सड़क जल्दी टूट गई है। आप 80-90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से नहीं चल सकते। जगह-जगह गड्ढे यात्रा को मुश्किल बनाते हैं। एक्सीडेंट की संभावना बनी रहती है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया, जिससे सफर में 3 घंटे कम समय लगें यह एक्सप्रेस-वे गोरखपुर को आजमगढ़ (सलारपुर) के पास सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ता है। इससे गोरखपुर से लखनऊ, आगरा और दिल्ली तक का सफर आसान हो जाता है। इसके बनने से गोरखपुर से लखनऊ की दूरी तय करने में लगने वाले समय में लगभग 2 से 3 घंटे की कमी आई है। जब फरवरी, 2020 में ये बनना शुरू हुआ, तब इसका बजट 5,876 करोड़ रुपए था। लेकिन 2025 में जब बनकर तैयार हुआ, तब तक इसका फाइनल बजट 7,283 करोड़ पहुंच गया था। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे में कुल 7 फ्लाईओवर, 8 बड़े पुल, 14 छोटे पुल और करीब 100 से ज्यादा अंडरपास बनाए गए हैं। 2023 में जब इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो रहा था, तब कम्हरियाघाट के पास घाघरा नदी ने अपनी दिशा बदल दी। इसके चलते निर्माण में दिक्कत आ गई। काम रुक गया। इसके बाद एलाइनमेंट में बदलाव किया गया, पुल को और लंबा बनाया गया। 20 जून, 2025 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस 4 लेन एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया। टोल कलेक्ट करने का 2 साल का एग्रीमेंट इस वक्त हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड इस एक्सप्रेस-वे पर टोल कलेक्ट करती है। 2 साल के लिए उनका एग्रीमेंट हुआ है। यह एग्रीमेंट 220 करोड़ 66 लाख रुपए में हुआ है। पहले साल के लिए 105 करोड़ और दूसरे साल 10% बढ़ाकर 115 करोड़ रुपए तय हुआ। मतलब हर दिन करीब 30 लाख रुपए उन्हें यूपीडा को देना होगा। कंपनी पेट्रोलिंग के लिए 4 गाड़ियां भी तैनात करनी होंगी। इनका काम सड़क के टूटने और हादसे की संभावना को कम करना होता है। एक्सप्रेस-वे पर गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी किसकी? यूपीडा की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे में उद्धाटन (20 जून, 2025) से अगले 5 साल तक किसी भी तरह की खराबी आती है, तो जिम्मेदारी इसे बनाने वाली दोनों कंपनियों की है। दोनों कंपनियों ने कर्मचारी नियुक्त किए हैं, जो समय-समय पर इसकी मरम्मत करते हैं। मरम्मत के लिए यूपीडा को किसी भी तरह का खर्च नहीं देना होता। अब तक दोनों कंपनियों ने रिपेयरिंग पर कितना खर्च किया है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की है। गड्ढों की शिकायत मिलने पर 24 घंटे की भीतर मरम्मत की जाती है। जहां बड़ी खराबी आती है, वहां 2 से 10 दिन तक का समय लग सकता है। ————————— यह खबर भी पढ़ें – UP- सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे 18 दिन में 84 जगह धंसा, गडकरी ने अमेरिका के जैसा बताया था; BJP सांसद के भाई की कंपनी को ठेका मिला ‘उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका के जैसे होंगे। ये वचन, मैं आपको देना चाहता हूं।’ देश के सड़क परिवहन मंंत्री नितिन गडकरी ने यह बात लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के वक्त 13 जुलाई, 2026 को कही थी। ये दावे सिर्फ 18 दिन में ही गलत साबित हो गए। 63 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे 18 दिन में 84 जगहों पर धंस गया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें…

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