गोरखपुर में प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज-मांझा:युवक की मौत से भड़का लोगों का गुस्सा, बोले- हादसे के बाद ही जागता है प्रशासन

गोरखपुर में प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज-मांझा:युवक की मौत से भड़का लोगों का गुस्सा, बोले- हादसे के बाद ही जागता है प्रशासन

गोरखपुर में चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार अभियान चलाने और सख्ती करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बदलती नजर नहीं आ रही है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चाइनीज मांझे की बिक्री होने के आरोप लग रहे हैं। दरअसल, शनिवार को इलाहीबाग इलाके में बांध पर मांझे की चपेट में आने से 35 वर्षीय युवक की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिबंध के प्रभावी पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बाजार में अब भी बिक रहा मांझा स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन लगातार चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए अभियान चलाने की बात करता है, लेकिन इसका असर बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों के मुताबिक, जब भी चाइनीज मांझे से कोई हादसा होता है, तब कार्रवाई की चर्चा तेज हो जाती है और अभियान चलाया जाता है। इसके बावजूद कुछ समय बाद फिर इसकी बिक्री होने लगती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर प्रतिबंध और कार्रवाई के दावों के बाद भी चाइनीज मांझा बाजार तक कैसे पहुंच रहा है? आसपास दर्जनों दुकानों पर बिक्री का आरोप इलाहीबाग में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां के स्थानीय लोगों का दावा है कि आसपास ही दर्जनों दुकानें हैं, जहां चाइनीज मांझा बेचा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन की ओर से नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की जा रही है, तो प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है? लोगों ने मांग की है कि दुकानों की जांच कर मांझे की सप्लाई और बिक्री से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए। चाइनीज मांझा दोपहिया वाहन चालकों और सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इलाहीबाग में 35 वर्षीय युवक की मौत ने इस खतरे को फिर सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अभियान चलाने और कार्रवाई का दावा करने से समस्या खत्म नहीं होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिबंधित मांझा बाजार में उपलब्ध ही न हो। इसके लिए नियमित निगरानी, दुकानों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच सवाल इलाहीबाग की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए लगातार अभियान चलाने की बात कही जा रही है, तो इसकी बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? स्थानीय लोगों के आरोपों की जांच और बिक्री के ठिकानों पर कार्रवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, युवक की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध का दावा तभी असरदार माना जाएगा, जब इसकी बिक्री वास्तव में बंद होगी और लोगों की जान सुरक्षित रहेगी।

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