गोरखपुर में पति से अलग होना चाहती थी पत्नी:परिवार के दखल से टूट रहा था रिश्ता, महिला थाने पर सुलझा विवाद, एक हुए दंपत्ति

गोरखपुर में पति से अलग होना चाहती थी पत्नी:परिवार के दखल से टूट रहा था रिश्ता, महिला थाने पर सुलझा विवाद, एक हुए दंपत्ति

कई बार पति- पत्नी की छोटे- मोटे झगड़ें परिवारों के दखल देने से बड़े बन जाते हैं। गोरखपुर में ऐसे कई केसेज देखने को मिले। जिसमें लड़ाई इतना बढ़ गया कि बात तलाक तक पहुंच गई। किसी की पत्नी 8 साल से मायके रह रही तो कोई दो बच्चों के बावजूद अलग होना चाहता है। हालांकि ऐसे मामले महिला थाने और परिवार परामर्श केंद्र पर आसानी से सुलझाए जा रहे हैं। थाने की SHO सुनीता सिंह ने बताया कि थाने में आए दिन अधिकतर केस ऐसे ही आते हैं। जिनमें छोटी सी बात बड़ी बन गई रहती है। पति- पत्नी के बीच की लड़ाई दो परिवारों की लड़ाई बन जाती है। ऐसे में दोनों को बैठाकर समझाया जाता है। रिश्ते की हर गलतफमी को दूर की जाती है, और पति पत्नी को एक करने की हर कोशिश की जाती है। अधिकतर मामले 2 से 3 काउसंलिंग में सुलझ जाते हैं। 2 बच्चे के साथ पति से अलग होना चाहती थी महिला
उन्होंने हाल के कुछ केस का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 3 से 4 महीने पहले उनके पास एक आया। तिवारीपुर के रहने वाले एक दम्पति की शादी 7 से 8 साल पहले हुई थी। दोनों के 2 बच्चे थे और पत्नी 4 महीने की प्रेग्नेंट भी थी। शुरुआत में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन कुछ साल बाद घरेलू विवाद की वजह से वह अपने पति से दूर होना चाहती थी। इसमें उसके मायके वाले खास कर बहनें भी उसका साथ देती थी। ससुराल में थोड़ी भी परेशानी होने पर वह अक्सर मायके भाग जाया करती थी और महीनों तक वहीं रहती थी। इधर पति उसे अक्सर मना कर बुला लेता था।लेकिन दोनों के बीच लड़ाई हमेशा हो जाती थी। जिसकी वजह से पत्नी कोर्ट से केस लड़ कर उससे अलग होना चाहती थी। परिवार परामर्श केंद्र पर चल रही काउंसलिंग
पिछले करीब 1 से डेढ़ साल से इनकी काउंसलिंग परिवार परामर्श केंद्र पर चल रही थी। जब वहां कोई हल नहीं निकला तो पत्नी महिला थाने पहुंची। जहां पूरी बात जानने के बाद दोनों पति- पत्नी और उनके परिवारों को बुलाया गया। दो- तीन काउंसलिंग में बात बनी
इस मामले में SHO के समझाने के बाद पत्नी अपने पति के साथ रहने को राजी हो रही थी लेकिन उसकी बहन फिर भी केस करवाने पर तुली थी। जबकि ससुर उसे अपने घर ले जाने को तैयार था। हालांकि दो- तीन काउंसलिंग के बाद पत्नी खुशी- खुशी अपने ससुराल में रहने को तैयार हो गई। मामले में सुलह मंगलवार को हुआ। महिला को यकीन दिलवाया गया कि कोई भी परेशानी होने पर वह बेझिझक तुरंत थाने में संपर्क कर सकती है। पति सुनता परिवार की बात, पत्नी बचाना चाहती रिश्ता
उन्होंने बताया कि ऐसा ही एक केस लगभग एक हफ्ते पहले आया है, जिसमें परिवार बहुत हाई- फाई है। सभी लोग वेल एजुकेटेड हैं। बहू भी कोई बढ़िया नौकरी करती है। लेकिन वह बहुत सीधी साधी लड़की है। जिसकी वजह से ससुराल वाले हर बात में उसे डोमिनेट करते हैं। पति भी अक्सर उनकी बातों में आकर पत्नी की बेज्जती कर देता है, जो उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं आता है। माहौल ऐसा हो गया है कि महिला को उस घर में रहना मुश्किल हो गया है। हालांकि वह अपना परिवार बचाना चाहती है। इसी वजह से ये सब कोई बात किसी को बता भी नहीं पाती है। कुछ समय पहले ही वह महिला थाने पहुंची। उसकी पूरी परेशानी सुनने के बाद अगली काउंसलिंग में उसके पति को बुलाया गया है। पूरी कोशिश की जाएगी कि पति को समझाया जाए ताकि दोनों के रिश्ते को बचाया जा सकें। शादी के 2 महीने बाद मायके गई महिला, 8 साल तक नहीं लौटी
इसके अलावा एक और केस का जिक्र करते हुए SHO ने बताया कि गोला क्षेत्र की एक महिला की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी। शादी के एक दो महीने बाद उसका पति कम्बोडिया चला गया। पत्नी प्रेग्नेंट थी। उस समय ससुराल वालों से छोटी- छोटी बात को लेकर अनबन होने लगी। जिससे परेशान होकर वह मायके चली गई। तबसे ससुराल लौटी ही नहीं। पति भी विदेश रहता था। पत्नी का पिता कभी उसे समझा कर ससुराल नहीं भेजा। वह अपनी बेटी को 8 साल से अपने घर में रखा था। इस समय उसका बेटा 8 साल का हो गया है लेकिन अपने पापा को पहचानता नहीं है। उन्हें पापा कहने के बजाय नाम से बुलाता है। जब पति कोर्ट से विदाई करवाया तब पत्नी थाने पहुंच कर उसके खिलाफ केस करने की मांग करने लगी। हालांकि उसकी पूरी बात सुनकर ऐसा करने से रोका गया और समझा कर ससुराल जाने को कहा गया। अभी उसकी एक ही काउंसलिंग हुई है फिर भी वह पति के साथ रहने को तैयार हो गई है। हालांकि दोनों को एक बार फिर थाने बुलाया गया है। ताकि अच्छे से समझाया जा सके और रिश्ता जीवन भर चले। महीने में 30 से 40 केस आते
SHO सुनीता सिंह ने बताया कि हर दिन लगभग 6 से 7 मामले थाने में ऐसे आते हैं। वहीं महीने में औसतन 30 से 40 के करीब रिपोर्ट दर्ज होती है। इसमें से अधिकतर को समझाबुझा कर सुलह करवा दिया जाता है। जबकि कुछ को न्यायालय भेजना पड़ता है।

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