गोरखपुर के लोगों के लिए इस बार शुक्रवार की रात पूर्णिमा खास अनुभव लेकर आ रही है। आसमान में “स्टर्जन मून” की उजली चांदनी बिखरेगी, जो शहरवासियों को एक अलग ही सुकून भरा नजारा देगी। हालांकि इसी दिन होने वाला चंद्र ग्रहण गोरखपुर में दिखाई नहीं देगा। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल) के खगोलविद अमर पाल सिंह के मुताबिक, पूर्णिमा का चरम समय सुबह 9 बजकर 48 मिनट होगा। उस वक्त दिन होने के कारण गोरखपुर के लोग न तो चंद्र ग्रहण देख पाएंगे और न ही पूर्णिमा का चरम रूप। शाम होते ही छतों और गलियों में दिखेगा चांद खगोलविदों के अनुसार, शाम करीब 6:35 बजे चांद पूर्व दिशा से आसमान में उभरेगा। इसके बाद पूरी रात शहर की छतों, गलियों और खुले मैदानों में चांदनी फैली रहेगी, जो एक सुकून भरा माहौल बनाएगी। भले ही ग्रहण का दृश्य न मिले, लेकिन स्टर्जन मून की चमक शहर के लोगों को खास अनुभव देगी। परिवार के साथ छत पर बैठकर या खुले स्थानों पर इस चांदनी रात का आनंद लेना यादगार बन सकता है। क्या है ‘स्टर्जन मून’? इस दौरान चंद्रमा का लगभग 96% हिस्सा पृथ्वी की छाया में चला जाएगा, जिससे यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में चांद तांबे जैसा लाल या गहरा नारंगी दिखाई देगा। लेकिन गोरखपुर समेत पूरे भारत में यह दृश्य नहीं दिखेगा। अगस्त की पूर्णिमा को “स्टर्जन मून” कहा जाता है। यह नाम उत्तरी अमेरिका की परंपराओं से आया है, जहां इस समय स्टर्जन मछलियां ज्यादा पाई जाती थीं। इसे कॉर्न मून, ग्रेन मून और फ्रूट मून जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर पूर्णिमा पर क्यों नहीं लगता ग्रहण खगोलविद बताते हैं कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी होती है। इसी वजह से हर बार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में नहीं आते और चंद्र ग्रहण नहीं बनता। विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार की रात गोरखपुर के लोग शहर की रोशनी से दूर खुले स्थानों पर जाकर चांद का नजारा लें। भले ही ग्रहण न दिखे, लेकिन “स्टर्जन मून” की चमक शहर के आसमान को यादगार बना देगी।

