गोपालगंज- 10 साल पुराने शराब तस्करी केस में आरोपी बरी:कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला, पुलिस पर बदले की भावना से फंसाने का आरोप लगाया

गोपालगंज- 10 साल पुराने शराब तस्करी केस में आरोपी बरी:कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला, पुलिस पर बदले की भावना से फंसाने का आरोप लगाया

गोपालगंज व्यवहार न्यायालय की एडीजे-13 एक्साइज-2 अदालत ने शराब तस्करी से जुड़े 10 साल पुराने मामले में सुजीत शुक्ला को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। न्यायाधीश धीरज मिश्रा की अदालत ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह फैसला सुनाया। फैसले के बाद सुजीत शुक्ला ने इसे सच्चाई और न्याय की जीत बताया। वहीं, उनके अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। निजी विवाद के बाद फंसाने का लगाया आरोप अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सुजीत शुक्ला गोपालगंज शहर के अधिवक्ता नगर, वार्ड संख्या-14 के निवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर 2016 को नगर थाना क्षेत्र के बंजारी मोड़ के पास तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष संतोष कुमार, एसआई नवीन कुमार, एसआई हरकेश रावत और अन्य पुलिसकर्मियों ने सुजीत शुक्ला को गिरफ्तार किया था। अधिवक्ता का दावा है कि एक निजी पार्टी में हुए विवाद के कारण पुलिस ने बदले की भावना से उनकी निजी स्कॉर्पियो गाड़ी में शराब रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया। गिरफ्तारी के बाद अदालत में याचिका दाखिल की अधिवक्ता ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद सुजीत शुक्ला को तीन-चार दिनों तक इधर-उधर रखा गया। इस संबंध में 20 दिसंबर को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में विविध याचिका दाखिल की गई। इसके बाद 21 दिसंबर को उन्हें चोरी के मामले में अदालत में पेश कर रिमांड कराया गया। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सुजीत शुक्ला की स्कॉर्पियो गाड़ी रिलीज हो गई थी। बरी होने के बाद दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की उम्मीद मामले में बरी होने के बाद सुजीत शुक्ला ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने केस दाखिल किया है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होने की उम्मीद है। वहीं, अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने न्यायालय के फैसले को सच्चाई की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्याय मिलने का भरोसा था। गोपालगंज व्यवहार न्यायालय की एडीजे-13 एक्साइज-2 अदालत ने शराब तस्करी से जुड़े 10 साल पुराने मामले में सुजीत शुक्ला को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। न्यायाधीश धीरज मिश्रा की अदालत ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह फैसला सुनाया। फैसले के बाद सुजीत शुक्ला ने इसे सच्चाई और न्याय की जीत बताया। वहीं, उनके अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। निजी विवाद के बाद फंसाने का लगाया आरोप अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सुजीत शुक्ला गोपालगंज शहर के अधिवक्ता नगर, वार्ड संख्या-14 के निवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर 2016 को नगर थाना क्षेत्र के बंजारी मोड़ के पास तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष संतोष कुमार, एसआई नवीन कुमार, एसआई हरकेश रावत और अन्य पुलिसकर्मियों ने सुजीत शुक्ला को गिरफ्तार किया था। अधिवक्ता का दावा है कि एक निजी पार्टी में हुए विवाद के कारण पुलिस ने बदले की भावना से उनकी निजी स्कॉर्पियो गाड़ी में शराब रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया। गिरफ्तारी के बाद अदालत में याचिका दाखिल की अधिवक्ता ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद सुजीत शुक्ला को तीन-चार दिनों तक इधर-उधर रखा गया। इस संबंध में 20 दिसंबर को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में विविध याचिका दाखिल की गई। इसके बाद 21 दिसंबर को उन्हें चोरी के मामले में अदालत में पेश कर रिमांड कराया गया। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सुजीत शुक्ला की स्कॉर्पियो गाड़ी रिलीज हो गई थी। बरी होने के बाद दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की उम्मीद मामले में बरी होने के बाद सुजीत शुक्ला ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने केस दाखिल किया है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होने की उम्मीद है। वहीं, अधिवक्ता रंजन कुमार श्रीवास्तव ने न्यायालय के फैसले को सच्चाई की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्याय मिलने का भरोसा था।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *