गोपालगंज में मौसम के अचानक बदले मिजाज और तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कटाई के लिए तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है। कई निचले इलाकों में खेतों में पानी जमा होने से फसल के सड़ने का खतरा है। जिले के आठ प्रखंडों में 240 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की फसल प्रभावित हुई है। तूफानी हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। किसानों के मुताबिक, महीनों की मेहनत, सिंचाई और खेती पर खर्च करने के बाद फसल कटाई के लिए तैयार थी। लेकिन असमय बारिश और तेज हवा ने नुकसान पहुंचाया। खेतों में पानी जमा होने से गिरी हुई फसल की बालियां सड़ने की आशंका बढ़ गई है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… आठ प्रखंडों में 240 हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बैकुंठपुर, सिधवलिया, मांझा, बरौली, कुचायकोट, फुलवरिया, हथुआ और गोपालगंज सदर प्रखंड में धान की फसल प्रभावित हुई है। जिले में बीते 24 से 36 घंटे के दौरान औसतन 11.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस दौरान 17 से 23 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि कुछ जगहों पर हवा की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। धान की गुणवत्ता और पैदावार पर भी असर की आशंका खेतों में गिरी और पानी में भीगी फसल से पैदावार के साथ अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को डर है कि धान में अंकुरण होने पर बाजार में उचित कीमत नहीं मिलेगी। खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर खर्च करने वाले किसानों के सामने अब लागत निकालने की चुनौती है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की चिंता और बढ़ गई है। आलू, सरसों और मटर की अगेती बुवाई भी टली बारिश के बाद खेतों में नमी और जलजमाव के कारण आलू, सरसों और मटर की अगेती बुवाई प्रभावित हुई है। इससे रबी सीजन की तैयारी भी पिछड़ने लगी है। किसानों को आशंका है कि खेत सूखने में देरी हुई तो अगली फसल की बुवाई का समय भी प्रभावित हो सकता है। सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग प्रभावित किसानों ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से फसल क्षति का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग जल्द प्रभावित खेतों का आकलन करे, ताकि नुकसान के अनुसार राहत मिल सके और वे अगली रबी फसल की तैयारी कर सकें। गोपालगंज में मौसम के अचानक बदले मिजाज और तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कटाई के लिए तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है। कई निचले इलाकों में खेतों में पानी जमा होने से फसल के सड़ने का खतरा है। जिले के आठ प्रखंडों में 240 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की फसल प्रभावित हुई है। तूफानी हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। किसानों के मुताबिक, महीनों की मेहनत, सिंचाई और खेती पर खर्च करने के बाद फसल कटाई के लिए तैयार थी। लेकिन असमय बारिश और तेज हवा ने नुकसान पहुंचाया। खेतों में पानी जमा होने से गिरी हुई फसल की बालियां सड़ने की आशंका बढ़ गई है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… आठ प्रखंडों में 240 हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बैकुंठपुर, सिधवलिया, मांझा, बरौली, कुचायकोट, फुलवरिया, हथुआ और गोपालगंज सदर प्रखंड में धान की फसल प्रभावित हुई है। जिले में बीते 24 से 36 घंटे के दौरान औसतन 11.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस दौरान 17 से 23 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि कुछ जगहों पर हवा की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। धान की गुणवत्ता और पैदावार पर भी असर की आशंका खेतों में गिरी और पानी में भीगी फसल से पैदावार के साथ अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को डर है कि धान में अंकुरण होने पर बाजार में उचित कीमत नहीं मिलेगी। खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर खर्च करने वाले किसानों के सामने अब लागत निकालने की चुनौती है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की चिंता और बढ़ गई है। आलू, सरसों और मटर की अगेती बुवाई भी टली बारिश के बाद खेतों में नमी और जलजमाव के कारण आलू, सरसों और मटर की अगेती बुवाई प्रभावित हुई है। इससे रबी सीजन की तैयारी भी पिछड़ने लगी है। किसानों को आशंका है कि खेत सूखने में देरी हुई तो अगली फसल की बुवाई का समय भी प्रभावित हो सकता है। सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग प्रभावित किसानों ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से फसल क्षति का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग जल्द प्रभावित खेतों का आकलन करे, ताकि नुकसान के अनुसार राहत मिल सके और वे अगली रबी फसल की तैयारी कर सकें।

