गूगल डीपमाइंड के एक पूर्व वैज्ञानिक बिलाल चुगताई ने चेतावनी दी है कि AI पूरी मानव जाति को खत्म कर सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि इसे रोकने के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्होंने इस्तीफा देने के बाद दुनिया को AI के इस छिपे खतरे के प्रति आगाह किया है। इससे पहले एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होेंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AI के खतरे को लेकर कहा था कि एआई बनाने वाले डेवलपर्स खुद मानते हैं कि 2030 तक यह तकनीक इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। AI से इंसानों को दो बड़े खतरें… बिलाल बोले- खतरे को टालने के लिए कम समय बिलाल चुगताई गूगल डीपमाइंड में उस टीम का हिस्सा थे, जिसका काम यह देखना था कि AI इंसानों के फायदे के लिए ही काम करे, नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा, “गूगल में काम करते हुए मैंने AI को बनते और बदलते हुए बहुत करीब से देखा है। यह तकनीक जिस रास्ते पर जा रही है, वह डरावना है। AI इंसानी नस्ल खत्म कर सकता है और इस खतरे को टालने के लिए समय बहुत कम है।” बिलाल मानते है कि कंपनियां जल्द ही इंसानों से भी ज्यादा समझदार AI बना लेंगी। एक वक्त ऐसा आएगा जब इंसानों का इन पर से पूरा कंट्रोल खत्म हो जाएगा। 4 साल में AI साधारण से सीधे हैकिंग तक पहुंचा AI के बदलाव की रफ्तार पर बिलाल ने कहा कि 2022 में जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब AI सिस्टम बहुत ही मामूली थे। लेकिन बीते 4 सालों में ही माहौल पूरी तरह बदल गया है। हाल ही में AI बनाने वाली कंपनी ‘ओपनएआई’ ने दावा किया कि उनके AI सिस्टम ने गणित की 90 साल पुरानी एक बहुत मुश्किल गुत्थी (नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम) सुलझा ली है। वहीं, दूसरा डरावना मामला तब आया जब बिना किसी इंसान के कहे, ओपनएआई के ही करीब 700 AI एजेंट ने ‘हगिंग फेस’ नाम की कंपनी के सिस्टम को हैक करने की कोशिश की। एआई कंपनियों की होड़ रोकने की मांग बिलाल का कहना है कि एआई को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए सभी कंपनियों को आपसी तालमेल बैठाना होगा। उन्होंने कहा, “कंपनियों के बीच चल रही इस पागलपन भरी रेस को रोकना होगा। हमें एआई के विकास की रफ्तार को उस स्तर पर लाना होगा जिसे हमारा समाज संभाल सके, ताकि किसी भी बड़े खतरे से पहले ही उसका समाधान निकाला जा सके।” एंथ्रोपिक सीईओ की भी रफ्तार धीमी करने की मांग एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी एक लेख में एआई बनाने की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इससे एआई से जुड़े खतरों को समझने और निपटने का समय मिल जाएगा। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और इलॉन मस्क ने भी इस बात का समर्थन किया है। ट्रम्प बोले- नियम बनाए तो चीन आगे निकल जाएगा एक तरफ जहां वैज्ञानिक और एआई कंपनियों के प्रमुख नियम और सख्ती की मांग कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रुख अलग है। ट्रम्प ने एआई पर सख्त नियम के विचार को खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि अगर अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदियां लगाई गईं तो चीन इस रेस में आगे निकल जाएगा। ट्रम्प ने कहा, “जो एआई की रेस जीतेगा, वही दुनिया पर राज करेगा।”
गूगल रिसर्चर बोले- इंसानी नस्ल खत्म कर देगा AI:खतरा टालने के लिए बहुत कम समय; 4 साल में मामूली से हैकर बने AI एजेंट्स

